बिजनेस स्टैंडर्ड - रीपो दर में कमी : मासिक किस्त में आ सकती है मामूली गिरावट
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रीपो दर में कमी : मासिक किस्त में आ सकती है मामूली गिरावट

संजय सिंह और तिनेश भसीन /  February 18, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती की है। इससे उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जिन्होंने आवास और कार ऋण लिए हुए हैं। बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) आदिल शेट्टी ने कहा, 'दर में कटौती स्वागत योग्य है। लेकिन हमें यह देखना होगा कि इस 25 आधार अंक की कटौती का कितना लाभ खुदरा कर्जदारों को पहुंचाया जाता है।' इसका फायदा न केवल नए कर्जदारों बल्कि वर्तमान कर्जदारों को भी मिलेगा। यह बैंकों पर निर्भर करेगा कि वे दर में कटौती का कितना लाभ ग्राहकों को देते हैं। 

अगर बैंक दर में कटौती का लाभ आगे पहुंचाएंगे तो कर्जदारों को कुछ राहत मिलेगी। उदाहरण के लिए अगर किसी ऋण लेने वाले व्यक्ति ने 75 लाख रुपये का ऋण 20 साल के लिए 8.8 फीसदी सालाना ब्याज दर पर लिया है तो मासिक किस्त (ईएमआई) 67,238 होगी। अगर दर में कटौती के बाद ब्याज दर घटाकर 8.55 फीसदी की जाती है तो ईएमआई 1,199 रुपये घटकर 66,039 रुपये हो जाएगी। पूरे 20 साल की अवधि के दौरान ब्याज देनदारी में बचत 2,87,760 रुपये होगी। 

माना कि किसी व्यक्ति ने सात साल के लिए 10 लाख रुपये का कार ऋण 9.25 फीसदी ब्याज दर पर लिया है। अगर ब्याज दर घटकर 9 फीसदी हो जाएगी तो ईएमआई महज 127 रुपये कम होगी। (सारणी देखें) हालांकि यह बात ध्यान देने लायक है कि बैंक कभी-कभार ही दर में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को देते हैं। इसलिए ब्याज दर में 10 से 15 आधार अंक की कटौती से कर्जदारों को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। 

माईलोनकेयर डॉट इन के संस्थापक और सीईओ गौरव गुप्ता ने कहा कि ब्याज दरों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा और चीजें अप्रैल से बदलेंगी। उन्होंने कहा, 'बैंकों के लिए दर में कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों को देना मुश्किल होगा क्योंकि वे नवंबर में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में नकदी की किल्लत के बाद बैंकिंग प्रणाली में कम नकदी की स्थिति से जूझ रहे हैं।' वह कहते हैं कि ब्याज दरों में कटौती का लाभ मार्च के अंत में मुहैया कराए जाने के आसार हैं। यह कटौती 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। वह कहते हैं, 'इस बात की संभावना है कि साïर्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को दरों में कटौती के दबाव का सामना करना पड़े क्योंकि चुनाव नजदीक आ गए हैं। ऐसी स्थिति में बैंकों को कुछ नए तरीके ढूंढने होंगे। उदाहरण के लिए वे कार्ड दरों में छूट और इस समय मुहैया कराई जा रही योजनाओं को वापस ले सकते हैं।'

इसके अलावा बहुत से कर्जदारों ने सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) पर ऋण लिया हुआ है, इसलिए उनके लिए ब्याज दर घटने में समय लगेगा। पैसाबाजारडॉटकॉम के सीईओ और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा ने कहा, 'जब बैंक एमसीएलआर दर में कटौती के जरिये नीतिगत दर में कमी का लाभ ग्राहकों को देते हैं तो आवास ऋण लेने वाले नए लोगों के लिए उधारी की लागत घटेगी। हालांकि वर्तमान कर्जदार तब तक उसी दर से ब्याज का भुगतान करते रहेंगे, जब तक उनकी ब्याज दर में फेरबदल की तारीख नहीं आएगी। इस फेरबदल की तारीख पर लागू एमसीएलआर अगली फेरबदल की तारीख तक बरकरार रहेगी।' 

अगर अन्य बैंक ब्याज दर में कटौती करते हैं और आपका बैंक ऐसा नहीं करता है तो क्या आपको अपने ऋण को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना चाहिए? एक डिजिटल होम लोन ब्रोकर स्विचमी के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मिश्रा ने कहा, 'अपनी आवास ऋण दर की बाजार में उपलब्ध बेहतर दरों से तुलना करें। अगर अंतर 25 से 50 आधार अंक का है और आपके कर्ज चुकाने की अवधि काफी बची हुई है तो आपको कर्ज को स्थानांतरित करने से फायदा मिल सकता है।'

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