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कार बेचें तो कागजों में नाम बदलवाना न भूलें

तिनेश भसीन /  February 18, 2019

अगर आपने हाल ही में कार बेची है या कार बेचने जा रहे हैं तो कार के कागजों का खास ध्यान रखें। गाड़ी के कागज यानी पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) में मालिक का नाम अगर आप नहीं बदलवाते हैं तो आपके लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है। इसके लिए आपको कार बेचते ही स्थानीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में पहुंचना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उच्चतम न्यायालय का हाल का ही एक फैसला इसकी अहमियत बताता है।

अदालत ने अपने एक आदेश में कहा कि अगर कागजों में मालिकाना हक नहीं बदलवाया जाता है और वाहन से दुर्घटना हो जाती है तो जुर्माना उसी व्यक्ति को देना होगा, जिसके नाम पर आरटीओ में वह गाड़ी चढ़ी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के बाद कार बेचने वाले को कागजों में मालिक के नाम बदलवाना जरूरी हो जाता है और उसे आरटीओ में जाकर देखना भी चाहिए कि नए मालिक का नाम चढ़ा है या नहीं। पॉलिसीबाजार में मोटर बीमा प्रमुख प्रवीण चौधरी कहते हैं, 'दुर्घटना होने और देनदारी का सवाल खड़ा होने पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार आरटीओ के पास उपलब्ध जानकारी में जिसके नाम पर वाहन होगा, उसे जुर्माना देना होगा।'

इस आदेश के बाद साफ है कि कार का मालिकाना नियंत्रण स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी इसे बेचने वाले की बनती है। क्विकर के मुख्य परिचालन अधिकारी अतुल तिवारी कहते हैं, 'अगर कार बेचने वाला व्यक्ति बिक्री से जुड़ी पूरी जानकारी के साथ न्यायालय से एक शपथ पत्र हासिल करता है तो उसके लिए अच्छा रहेगा। इसके अलावा वाहन बेचने की पूरी प्रक्रिया के दौरान विक्रेता के पास वैध बीमा होना चाहिए। इससे इस प्रक्रिया के दौरान होने वाली किसी भी वित्तीय देनदारी से निपटने में मदद मिलेगी।'

कभी-कभी नया वाहन खरीदते समय कार मालिक पुरानी कार भी साथ में देते हैं। इसके बाद कार लेने वाला डीलर एक नोट जारी करता है, जिसमें लिखा होता है कि वास्तविक मालिक ने कार डीलर को दे दी है और इसके बाद उसकी यानी कार मालिक की किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं होगी। लेकिन चौधरी का कहना है कि यह नोट लेकर आराम से नहीं बैठ जाना चाहिए। उनका कहना है, 'इस तरह के नोट से कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि किसी तरह का मामला होता है तो अदालत में उसी जानकारी पर विचार किया जाएगा, जो आरटीओ के पास मौजूद है। लेकिन नई कार खरीदते वक्त एक्सचेंज योजना के तहत पुरानी कार देने पर वास्तविक मालिक को वाहन की स्थिति के बारे में मालूमात हासिल करने के लिए डीलर पर ही निर्भर रहना पड़ता है। उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं होता।'

अगर आप ऑनलाइन माध्यम से कार बेच रहे हैं तो आपको सतर्क रहना चाहिए। बिक्री से पहले ही यह सुनिश्चित कर लें कि वाहन का खरीदार मिलने पर सेवा प्रदाता कम से कम वक्त में वाहन के कागजों में नए मालिक का नाम चढ़वाएगा। उदाहरण के तौर पर क्विकर की वेबसाइट पर जाकर आप कार बेचते हैं तो वह क्विकर एश्योर्ड कार्स प्रोग्राम के तहत आपको इसमें मदद करती है।  अगर कार बेचने वाला व्यक्ति खरीदार से सीधे बात कर रहा है तो खरीदार द्वारा औपचारिकताएं पूरी करने और स्थानांतरण का प्रमाणपत्र दिए जाने तक वास्तविक मालिक कार अपने पास रख सकता है। आरटीओ एजेंट के अनुसार स्थानांतरण आवेदन परिवर्तन डॉट जीओवी डॉट इन पर दिया जा सकता है। विक्रेता जैसे ही कागजी कार्रवाई पूरी करता है वैसे ही आवेदन क्रमांक, सरकारी शुल्क प्राप्ति रसीद और आवेदन से जुड़ा संदेश उसके मोबाइल पर आ जाता है। 

आरटीओ एजेंट से बात करें तो आपको कई नई बात पता चलते हैं। वे बताते हैं कि गाड़ी के कागजों पर मालिक का नाम नहीं बदला जाए तो कई अन्य दिक्कतें भी आ सकती हैं। अगर खरीदार गाड़ी का गलत इस्तेमाल करता है तो पुराना मालिक ही उसके लिए जिम्मेदार होगा। अगर खरीदार जुर्माना नहीं भरता है तो बाद में जुर्माने पर ब्याज भी देना होगा और आरटीओ वास्तविक मालिक को इसके लिए जिम्मेदरार ठहराएगा। ऊपर दिए गए मामले में शीर्ष न्यायालय ने वास्तविक और नए मालिक दोनों को मुआवजे देने के लिए जवाबदेह ठहराया है और उन्हें साथ मिलकर रकम का भुगतान करना पड़ा था। न्यायालय ने कहा, 'पंजीकृत मालिक को केवल इसी आधार पर बरी नहीं किया जा सकता कि वाहन किसी दूसरे के पास चला गया है। आरटीओ रिकॉर्ड में जब तक उसका नाम रहेगा तब तक वह तीसरे पक्ष के प्रति जवाबदेह रहेगा।'

Keyword: RTO, RC, CAR, Supreme Court, Paper, Accident, Fine,
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