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सही तरीके अपनाएं, कर बचाएं, मुनाफा भी कमाएं

संजय कुमार सिंह /  February 18, 2019

निवेश के सबूत जमा करने का वक्त करीब आ गया है। इसलिए समझ लीजिए कि कर बचाने के लिए ईएलएसएस, टर्म बीमा और स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय क्या देखना जरूरी है। बता रहे हैं संजय कुमार सिंह 

वित्त वर्ष अब आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है और वेतनभोगी आयकर बचाने की आखिरी कोशिश में जुटे होंगे। बमुश्किल हफ्ते भर के भीतर आपका दफ्तर भी आपसे पूछेगा कि कर बचाने के लिए आपने कहां-कहां निवेश किया है और इस वित्त वर्ष में हुए निवेश के सबूत भी आपसे मांगे जाएंगे। आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए और साथ में आयकर बचत कराने के लिए तीन प्रमुख तरीके आपके काम आ सकते हैं (और इन तरीकों या माध्यमों के बारे में ही पाठकों ने हमसे सबसे ज्यादा सवाल पूछे हैं)। ये तरीके हैं इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस), टर्म बीमा और स्वास्थ्य बीमा। लेकिन म्युचुअल फंड कंपनियां और बीमा कंपनियां भी इस समय ग्राहक तलाशने और अपनी योजनाएं बेचने में इतनी तेजी दिखा रही होंगी कि सही योजना या तरीका चुनना मुश्किल काम हो सकता है। आइए, देखते हैं कि कर बचाने या वित्तीय लक्ष्य पूरा करने के लिए योजनाएं चुनते समय आपको किन कसौटियों का खयाल रखना चाहिए। 

ईएलएसएस फंड

आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के अंतर्गत ईएलएसएस पर कर बचत की सुविधा मिलती है। ईएलएसएस योजनाओं में सबसे बड़ा फायदा यह है कि लंबी अवधि तक निवेश करने पर ये स्थिर आय योजनाओं के मुकाबले बहुत अधिक प्रतिफल दे सकती हैं क्योंकि ये योजनाएं सीधे शेयरों से जुड़ी होती हैं। साथ ही इनसे कर संबंधी लाभ भी मिलता है। ईएलएसएस में लॉक-इन अवधि भी तीन साल की होती है, जबकि दूसरी योजनाओं में यह अवधि ज्यादा होती है। अगर आप लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद भी अपनी रकम को नहीं निकालें और निवेश ज्यों का त्यों बना रहने दें तो दीर्घकालिक संपत्ति तैयार करने के लिहाज से ईएलएसएस अच्छा जरिया साबित हो सकते हैं। इस श्रेणी का 10 साल का औसत चक्रवृद्घि सालाना प्रतिफल 17.63 फीसदी रहा है। लेकिन बाजार में इस समय 42 ईएलएसएस फंड मौजूद हैं, इसलिए सही फंड चुनने में आपको मुश्किल हो सकती है। अगर फंडों की फेहरिस्त छोटी करना चाहते हैं तो ऐसे फंड चुन सकते हैं, जिनका कम से कम 7 से 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड उपलब्ध हो। प्रिंसिपल म्युचुअल फंड के इक्विटी प्रमुख पीवीके मोहन की सलाह है, 'यह देखिए कि फंड ने लंबी अवधि में कैलेंडर वर्ष में कितना प्रतिफल दिया है।' ऐसा फंड चुनिए, जिसने पिछले सात साल में लगातार बेंचमार्क से अधिक प्रतिफल दिया है या अधिक से अधिक साल में उसका प्रतिफल बेंचमार्क से अधिक रहा है। बेहतर गुणवत्ता वाले फंड चुनने का एक तरीका रॉलिंग प्रतिफल देखना भी है और ज्यादातर वित्तीय सलाहकार इसी पैमाने पर चलते हैं। सेबी में पंजीकृत वित्तीय सलाहकार पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव समझाते हैं, 'ऐसा फंड चुनने की गलती से बचें, जिसने केवल पिछले साल में ही सबसे अच्छा प्रदर्शन किया हो या पिछले कुछ समय में ही उसका प्रदर्शन अच्छा रहा हो।'

ईएलएसएस फंड लार्ज-कैप पर केंद्रित हो सकते हैं और हो सकता है कि उनमें मल्टी-कैप शेयरों की भरमार हो। मोहन कहते हैं, 'अगर आपके पोर्टफोलियो में लार्ज-कैप फंड पहले ही बहुत अधिक हैं तो आपको ऐसे ईएलएसएस फंड में निवेश करना चाहिए, जो मल्टी कैप शेयरों पर केंद्रित हो और अगर मल्टी-कैप शेयर पहले ही आपके पास हों तो लार्ज-कैप की ओर जाइए।' 

स्वास्थ्य बीमा

अगर आप अपने, अपने जीवनसाथी, स्वयं पर आश्रित बच्चों और माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम जमा करते हैं तो प्रीमियम की राशि पर आपको धारा 80 डी के तहत कर में छूट मिलती है। अपने और परिवार के स्वास्थ्य बीमा में प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की सालाना कर कटौती की जा सकती ीहै। अगर आप वरिष्ठï नागरिक हैं यानी आपकी उम्र 60 साल से अधिक है तो आप आयकर का हिसाब-किताब लगाते समय 50,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी अर्चित गुप्ता बताते हैं, 'यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता की उम्र 60 साल से अधिक नहीं है और उनके स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम वही व्यक्ति भरता है तो वह 25,000 रुपये की अतिरिक्त कर कटौती का दावा भी कर सकता है। माता-पिता वरिष्ठï नागरिक हों तो वह धारा 80 डी के तहत 50,000 रुपये की कटौती का दावा कर सकता है। इस तरह अपने, जीवनसाथी के, आश्रित बच्चों और 60 साल से कम उम्र के आश्रित माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के बदले 50,000 रुपये तक की कर कटौती का दावा किया जा सकता है। यदि माता-पिता वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में आते हैं तो प्रीमियम के एवज में कर कटौती 75,000 रुपये तक जा सकती है।'

स्वास्थ्य बीमा में कवर कितनी राशि का रखा जाए, यह बात इस पर निर्भर करती है कि आपके परिवार में कितने सदस्य हैं। जेएलटी इंडिपेंडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के उप मुख्य कार्य अधिकारी अरविंद लड्ढïा समझाते हैं, 'अगर आप अविवाहित हैं और आपकी उम्र 25 साल है तो आप अपने लिए 3 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा खरीद सकते हैं। लेकिन अगर आप 35 साल के हैं और आपकी संतानें तथा माता-पिता आप पर ही निर्भर हैं तो आपको 5 से 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कराना पड़ सकता है। वरिष्ठï नागरिक की श्रेणी में आने वाले दंपती 3 से 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा खरीद सकते हैं और चाहें तो इसे 10 लाख रुपये तक बढ़ा सकते हैं।' पिछले कुछ अरसे में वरिष्ठï नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा का खर्च बहुत ज्यादा हो गया है, इसलिए बीमा कराना उनकी कुव्वत से बाहर की बात हो गई है। महानगरों में रहने वालों को बड़े और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के मुकाबले ज्यादा रकम के बीमा की जरूरत होती है। यदि किसी के परिवार में दिल की बीमारियों या कैंसर आदि के मामले होते आए हैं तो उसे भी अधिक रकम का बीमा कराना होगा। अपनी जरूरत के मुताबिक ही स्वास्थ्य बीमा लें और केवल कर बचाने के फेर में अधिक रकम का बीमा न लें।

बीमा पॉलिसी चुनते समय ऐसी पॉलिसी ने किनारा कर लें, जिनमें कुछ बंदिशें लगती हों। सबसे अहम बंदिश अस्पताल के कमरे के किराये की सीमा है। अगर कमरे का अधिकतम किराया बीमित राशि के 1 फीसदी पर रोक दियाग या है तो आपको इतनी रकम का बीमा तो कराना ही चाहिए कि जिस अस्पताल में आप जाना चाहते हैं वहां सिंगल रूम का किराया बीमा में ही शामिल हो सके। लड्ढïा कहते हैं, 'पॉलिसी खरीदने वालों को ऐसी पॉलिसियों से भी दूर रहना चाहिए, जिनमें कुछ खास बीमारियों के इलाज में बंदिश हो और को-पेमेंट (इसमें कुल खर्च का कुछ हिस्सा मरीज को उठाना पड़ता है) का फेर हो। ऐसी पॉलिसी को ज्यादा तवज्जो दीजिए, जिसमें प्रतीक्षा अवधि कम हो।' यह जरूर देख लीजिए कि जिन अस्पतालों में आप इलाज कराना चाहते हैं, वे बीमा कंपनी के अस्पताल नेटवर्क में शामिल हो। सिक्योर नाउ जैसे ब्रोकर स्वास्थ्य बीमा को भी रेटिंग देते हैं और आप उनकी मदद ले सकते हैं। 

टर्म बीमा

अगर आप टर्म बीमा लेते हैं तो उसके प्रीमियम के बदले भी आपको धारा 80 सी के तहत कर छूट का फायदा मिल सकता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपको कितने बीमा की जरूरत है तो यह नियम आपके काम आएगा: आपके परिवार की कुल हैसियत यानी नेटवर्थ और जीवन बीमा की रकम इतनी होनी ही चाहिए कि आपके वित्तीय लक्ष्य पूरे हो सकें, सभी देनदारियां निपट सकें और खर्च भी निकल सके। बीमा इतनी राशि का तो होना ही चाहिए कि कमाने वाले व्यक्ति को कुछ हो जाने पर भी परिवार को अपनी जीवनशैली से समझौता नहीं करना पड़े। कवरफॉक्स डॉट कॉम के निदेशक - स्वास्थ्य, जीवन एवं रणनीतिक पहल महावीर चोपड़ा कहते हैं, 'समझदारी इसी बात में होगी कि कम उम्र में ही टर्म बीमा खरीद लिया जाए क्योंकि उस समय प्रीमियम कम होगा और लंबे अरसे के लिए बीमा की सुरक्षा हासिल हो जाएगी।' लड्ढा की राय है कि मजबूत और भरोसेमंद ब्रांड से ही टर्म बीमा लिया जाए। वह समझाते हैं, 'बीमा लंबी अवधि के लिए होता है, आम तौर पर 20 से 30 साल तक चलता है। मजबूत ब्रांड के साथ जाने से यह सुनिश्चित होगा कि जरूरत पडऩे पर बीमा कंपनी आपके साथ ही होगी।'

चोपड़ा प्रीमियम की अच्छी और किफायती दर हासिल करने का तरीका भी बताते हैं। उनकी सलाह है कि बीमा कंपनियों के प्रीमियम ऑनलाइन जांच लिए जाएं और उसके बाद ऐसा बीमा कवर चुना जाए, जो आपकी सभी कसौटियों पर खरा उतरता हो। आप मूल पॉलिसी में कुछ राइडर भी चुन सकते हैं। इनमें प्रीमियम माफी, दुर्घटना मृत्यु, दुर्घटना में अपंगता और गंभीर बीमारी शामिल हैं।

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