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कोल इंडिया का तीसरी तिमाही में दमदार प्रदर्शन

उज्ज्वल जौहरी /  February 18, 2019

कोल इंडिया को दिसंबर तिमाही के दौरान मजबूत मांग से मदद मिली। विद्युत और गैर-विद्युत क्षेत्रों, दोनों से शानदार मांग की वजह से ईंधन आपूर्ति समझौते (एफएसए) के साथ साथ ई-नीलामी (बाजार निर्धारित मूल्य) के जरिये बेचे जाने वाले कोयले की प्राप्तियों में सुधार आया। हालांकि कुल बिक्री वृद्घि धीमी बनी हुई है।

तीसरी तिमाही में बिक्री में सालाना आधार पर महज एक अंक की वृद्घि का यह भी मतलब है कि एफएसए के तहत आपूर्ति के लिए देयताओं को पूरा करने के बाद ई-नीलामी के लिए बहुत ज्यादा स्टॉक नहीं रह गया। ई-नीलामी बिक्री में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की गिरावट का प्रभाव पड़ा। बिक्री को लेकर चिंताएं और सरकार की हिस्सेदारी बिक्री योजना पर गतिरोध बरकरार रहने से यह आश्चर्यजनक नहीं है कि बाजार की प्रतिक्रिया सुस्त बनी हुई है, भले ही कोल इंडिया ने तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर आंकड़े पेश किए हैं।

मूल्य निर्धारण लाभ

तीसरी तिमाही के लिए बाजार अनुमान की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को अधिसूचित कोयले (विश्लेषकों के अनुमान के अनुसार, सालाना आधार पर 9 प्रतिशत ज्यादा) और एफएसए कोयले (सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 1,334 रुपये) की मजबूत प्रति टन कीमतों से मदद मिली। प्रति टन ई-नीलामी प्राप्तियां भी सालाना आधार पर 43 प्रतिशत तक बढ़ीं और तिमाही आधार पर ये 10 प्रतिशत बढ़कर 2,847 रुपये पर दर्ज की गईं। जहां मिश्रित प्राप्तियों से राजस्व को मदद मिली, वहीं 770 करोड़ रुपये के निकासी सुविधा शुल्क को शामिल किए जाने से भी मुनाफे को ताकत मिली। कंपनी के लागत नियंत्रण उपाय भी मददगार साबित हुए हैं।

इस तरह से, राजस्व सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ा, जबकि परिचालन लाल 5,127.4 करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया जो ब्लूमबर्ग द्वारा जताए गए 5,015 करोड़ रुपये के अनुमान से अधिक है। शुद्घ लाभ भी विश्लेषकों के 3,845 करोड़ रुपये के अनुमान की तुलना में 4,566 करोड़ रुपये पर रहा। 

बिक्री चिंताएं

जहां घरेलू मांग मजबूत बने रहने की संभावना है, वहीं बिक्री में सुधार लाने की कोल इंडिया की क्षमता पर भी निवेशकों की नजर लगी रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि आम चुनाव और आगामी गर्मी के मौसम की वजह से विद्युत क्षेत्र से मांग ऊंची बने रहने का अनुमान है। हालांकि उत्पादन वृद्घि और निकासी से खुदाई से संबंधित समस्याएं दूर होना कंपनी के लिए एफएसए के तहत ज्यादा आपूर्ति सुनिश्चित करने और ई-नीलामी से संबंधित बिक्री में तेजी के लिए जरूरी होगा। जनवरी तक का उत्पादन और बिक्री का आंकड़ा उत्साहजनक नहीं है। कोल इंडिया की खेपों में जनवरी में सालाना आधार पर 2.3 प्रतिशत की कमी आई, हालांकि उत्पादन सालाना आधार पर 0.7 प्रतिशत ज्यादा रहा। इसकी वजह यह थी कि उसकी बड़ी सहायक इकाइयों महानदी कोलफील्ड्स (एमसीएल) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एसईसीएल) ने उत्पादन में 10.1 प्रतिशत और 9.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि यदि एसईसीएल और एमसीएल में समस्याओं को दूर नहीं किया जाता है तो कोल इंडिया की खेपों में वृद्घि वित्त वर्ष 2019 में 5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।

वित्तीय परिणाम घोषित होने के बाद प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषक वित्त वर्ष 2019, वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 में बिक्री में महज 4.3 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत का अनुमान जता रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि भूमि अधिग्रहण, लॉजिस्टिक और मंजूरी संबंधित चुनौतियों की वजह से बिक्री वृद्घि को लेकर निराशा बनी रह सकती है। बिक्री को लेकर कमजोर परिदृश्य और बैलेंस शीट पर दबाव (लाभांश कटौती की वजह से) ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से विश्लेषक इस शेयर पर 'होल्ड' रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय कोयला कीमतों में गिरावट को देखते हुए ई-नीलामी प्राप्तियों की निरंतरता को लेकर भी चिंताएं हैं, क्योंकि इससे घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए आयातित कोयला अधिक आकर्षक विकल्प हो सकता है। इससे एफएसए कीमतों की तुलना में ई-नीलामी कीमत का प्रीमियम घट सकता है।  

मूल्यांकन

कोल इंडिया के शेयर में अगस्त के 300 रुपये के ऊंचे स्तर से 25 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। हालांकि वित्त वर्ष 2020 के कीमत-आय अनुपात अनुमान के 8 गुना पर भी यह उचित दिख रहा है, लेकिन इस शेयर को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। बिक्री वृद्घि से जुड़ी चिंताओं के अलावा, सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की योजना से भी निवेशक धारणा प्रभावित हुई है।
Keyword: Coal India, E-Auction, FSA, Quarter, Sale, Share, Revenue,
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