बिजनेस स्टैंडर्ड - परस्पर फायदे को साबित करने की चुनौती
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परस्पर फायदे को साबित करने की चुनौती

सुदीप्त दे /  February 17, 2019

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी चंदा कोछड़ और उनके पति दीपक कोछड़ तथा वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों के बीच कारोबारी सौदों की जांच कर रही जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन पर जो आरोप लगाए हैं वे एकदूसरे को परस्पर फायदा पहुंचाने पर केंद्रित हैं। इस आरोपों को अदालत में साबित करने की जिम्मेदारी अब जांचकर्ताओं और नियामकों की है। फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए जांचकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि एकदूसरे को परस्पर फायदा पहुंचाने वाले संबंधों से दोनों पक्षों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय फायदा हुआ। उनका कहना है कि वित्तीय लाभ के सबूत के अभाव में इसे साबित करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इससे जांचकर्ताओं की दृढ़ता और क्षमता की कड़ी परीक्षा होगी। 

कानूनी रूप से देखें तो भेदिया कारोबार और परस्पर फायदा पहुंचाने के संबंधों में अंतर है। ईवाई में फोरेंसिक और इंटिग्रिटी सर्विसेज के प्रमुख अरपिंदर सिंह के मुताबिक भेदिया कारोबार में आमतौर पर कोई व्यक्ति अनुचित तरीके से लाभ कमाने के लिए गोपनीय कारोबारी जानकारी का अनुचित फायदा उठाता है। परस्पर फायदे वाली स्थिति में दो पक्ष होते हैं और एक पक्ष को मूल्य के लिए प्रतिपूर्ति की जाती है। 

क्रॉल में बिजनेस इंटेलीजेंस और जांच की प्रमुख रेशमी खुराना का कहना है कि दोनों एक ही समस्या का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'जब कोई भेदिया शेयरों पर कारोबार के लिए किसी गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल करता है तो यह माना जाता है कि उसे कुछ न कुछ व्यक्तिगत लाभ (परस्पर फायदा) हुआ होगा।  वह प्रत्यक्ष रूप से या किसी तीसरे पक्ष की ओर से ऐसा कर सकता है। उसे रिश्वत, शेयरों की कीमत में तेजी या गिरावट या कंपनी पर ज्यादा नियंत्रण के रूप में यह फायदा मिल सकता है।'

आमतौर पर भेदिया कारोबार को साबित करना मुश्किल होता है क्योंकि यह साबित करने में कठिनाई आ सकती है कि किसी व्यक्ति के हाथ गोपनीय सूचना कैसे लगी और इसके आधार पर ही लेनदेन हुआ है। दूसरी ओर ईवाई के सिंह ने कहा, 'घटनाक्रम को साबित करना आसान हो सकता है। साथ ही परस्पर संबंधों का अस्तित्व भी साबित किया जा सकता है।'

ग्रांट थॉर्नटन इंडिया में पार्टनर समीर परांजपे ने कहा कि जब यह साफ हो कि गोपनीय जानकारी का आदान-प्रदान किसी फायदे के लिए हुआ है तो फिर यह एकदूसरे को परस्पर फायदा पहुंचाने का मामला है। उन्होंने कहा, 'भेदिया कारोबार का मतलब गोपनीय जानकारी तक पहुंच का अनुचित फायदा उठाना है।'

दुनियाभर में नियामकों और जांचकर्ताओं की अत्याधुनिक टूल तक पहुंच होती है जिससे भेदिया कारोबार का सक्रियता से पता लगाया जा सकता है। इनमें डेटा एनालिटिक्स प्रोग्राम, निगरानी व्यवस्थाएं, व्हिस्ल ब्लोअर हॉटलाइन शामिल हैं जिनसे भेदिया कारोबार की पहचान में मदद मिलती है और इसे साबित करने के लिए जरूरी सबूत हासिल होते हैं। खुराना ने कहा, 'विकसित बाजारों में यह बेहद कारगर साबित हुआ है। कानून का क्रियान्वयन और इसमें पुलिस तथा अन्य एजेंसियों की मदद भी अहम है।' कई परिपक्व बाजारों में विशेषज्ञ अनुशासन और भेदिया कारोबार के बारे में व्यवस्थाएं बनी हुई हैं। बीडीओ इंडिया में पार्टनर और कारोबारी सलाहकार सेवाओं के प्रमुख कार्तिक राडिया ने कहा, 'व्हिसल ब्लोअर व्यवस्थाएं और भेदिया कारोबार ऑडिट, कॉरपोरेट प्रशासन की सर्वश्रेष्ठï व्यवस्थाओं का क्रियान्वयन, वित्तीय समीक्षाएं और अनुपालन को लेकर सक्रिय प्रमाणन से इन बाजारों में नियम बनाने में मदद मिली है।'

भारतीय जांचकर्ताओं और नियामकों को इसी तरह की व्यवस्थाओं की कमी है। भेदिया कारोबार के मामलों में सजा की दर बहुत कम है क्योंकि जानकारी के आदान-प्रदान को साबित करना मुश्किल होता है। सिंह ने कहा, 'कई मामलों में नियामक व्यक्ति विशेष का अपराध साबित करने की कोशिश में लगे रहते हैं ताकि प्रबंधन को जवाबदेह बनाया जा सके।'

विशेषज्ञों का कहना है कि विशिष्टï कानूनी चुनौतियां किसी को हुए व्यक्तिगत फायदे को साबित करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रियाएं हैं। साथ ही किसी व्यक्ति के निजता के अधिकारों और इससे जुड़े कानूनों के दायरे में काम करना भी अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण है। परांजपे का कहना है कि भारतीय जांचकर्ताओं को कई तरह की सीमाओं में काम करना होता है जबकि पश्चिमी देशों में भेदिया कारोबार के कई मामलों में वायर टैप या फोन टैप के जरिये इक_ïा किए गए सबूतों के आधार पर कई जाने माने लोगों को सजा हुई है। उन्होंने कहा, 'यह ऐसा जरिया है जो भारतीय नियामकीय एजेंसियों को उपलब्ध नहीं है।'

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भेदिया कारोबार और परस्पर फायदे के लिए लेनदेन जैसे सफेदपोश अपराधों को उतनी तरजीह नहीं दी जाती है जितनी दी जानी चाहिए। खुराना ने कहा, 'भेदिया कारोबार जैसे वित्तीय अपराध को दूसरी आपराधिक गतिविधि की तरह माना जाना चाहिए।' इस खतरे से निपटने के लिए नियामकीय ढांचा और अनुपालन तथा सबूत हासिल करने की व्यवस्थाएं भी इसी के मुताबिक होनी चाहिए। 

सिंह ने कहा, 'कंपनियों के भीतर एक सशक्त और स्वतंत्र अनुपालन व्यवस्था को प्रोत्साहित करने, कंपनी के भीतर ऐसे मामले उठने पर निर्णायक और स्पष्टï कार्रवाई करने से ही इन चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।' चंदा कोछड़ के मामले में इन चुनौती से निपटने की जिम्मेदारी जांचकर्ताओं पर है।

Keyword: ICICI Bank, CEO, MD, Chanda Kochhad, ED, Enforcement Director, Forensic Expert, Integrity Services, Business Intelingenc,
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