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रेडीमेड संकट : खरीदार का ध्यान बांग्लादेश पर

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई February 17, 2019

भारत के परिधान निर्माण की सफलता के आसार दिख रहे हैं। इसका निर्यात पिछले तीन साल तक 17 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। ऐसा नहीं है कि मांग में कमी आ रही है। इसके बजाय खरीदार अब पड़ोसी देश बांग्लादेश पर ध्यान दे रहे हैं। बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धियों को मात देने में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और कम पारिश्रमिक से मदद मिल रही है। 

जहां भारत ने निर्यात में कमजोरी दर्ज की है, वहीं बांग्लादेश का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक आठ महीनों में भारत का निर्यात 9.975 अरब डॉलर पर रहा जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 11.05 अरब डॉलर पर था। बांग्लादेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार बांग्लादेश के लिए निर्यात नवंबर तक के पांच महीनों में 14.19 अरब डॉलर पर रहा जो पिछले साल की समान अवधि के 11.96 अरब डॉलर से 19 प्रतिशत अधिक है। 

टेक्सटाइल क्षेत्र का बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान है और यही वजह है कि 2021 तक इस देश का मध्यम-आय वाले देश की श्रेणी में प्रवेश का रास्ता आसान हो गया है। बांग्लादेश ने 2021 तक 50 अरब डॉलर का अपैरल निर्यात लक्ष्य रखा है और अब तक वह इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ता दिख रहा है। बांग्लादेश को इस क्षेत्र में देर से प्रवेश करने के बावजूद सफलता मिली है और उसके पास कपास जैसा कच्चा माल भी नहीं है जिसके लिए भारत दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक है। लागत यूरोपीय देशों और अमेरिका से किफायती श्रम और शुल्क लाभ का मतलब है कि बांग्लादेश में उत्पादित गारमेंट भारत की तुलना में 10-20 प्रतिशत सस्ते हैं।

कुछ विश्लेषक भारत के अपैरल निर्यात क्षेत्र को पसंद नहीं कर रहे हैं। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व चेयरमैन अशोक जी रजनी का कहना है कि मौजूदा परिवेश में भारत में निर्यातकों के लिए अच्छा भविष्य नहीं है। वह कहते हैं, 'हमने सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराने की कोशिश की और विभिन्न मंचों पर स्वयं को पेश किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है।' ज्यादातर निर्यातक चाहते हैं कि निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए यूरोप के साथ लंबी समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते को पूरा किया जाए, क्योंकि इससे उन्हें अपनी लागत में 10-12 प्रतिशत तक की कमी लाने में मदद मिलेगी। लेकिन ब्रेक्सिट और भारत में इस साल चुनाव की वजह से ब्रिटेन के साथ यह समझौता अगले साल के दौरान होने की संभावना नहीं दिख रही है। 

हालांकि उद्योग इसे लेकर सहमत नहीं है कि सिर्फ एफटीए से उसकी समस्याएं दूर हो जाएंगी। भारत ने 2007 के एफटीए करने के लिए विभिन्न देशों के साथ 13 बार बातचीत की, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला, क्योंकि कई देश सीमा शुल्कों में पारस्परिक कमी की उम्मीद कर रहे हैं। दूसरी तरफ, बांग्लादेश को मौजूदा समय में अल्प विकसित देश का दर्जा हासिल है, जो शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच या कई विकसित और विकासशील देशों के लिए कम शुल्क की सुविधाओं का हकदार है। बांग्लादेश को लगभग 52 देशों तक शुल्क-मुक्त पहुंच हासिल है जिनमें अमेरिका, आस्ट्रेलिया, स्विटजरलैंड, जापान, तुर्की, रूस, नॉर्वे, न्यूजीलैंड, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, मलेशिया और भारत शामिल हैं। 

साथ ही, बांग्लादेश ने अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए कई व्यापार सौदे किए हैं। दूसरी तरफ भारत की मौजूदा समस्याएं नवीनता और डिजाइन के बजाय निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और शुल्क वापसी पर उसकी निर्भरता की वजह से भी पैदा हुई हैं। भारत के लिए कुल उत्पादन लागत अधिक और उत्पादकता कम है। औसतन भारतीय फैक्टरियां हर शिफ्ट में 10-12 उत्पाद तैयार करती हैं, जो बांग्लादेश में प्रति शिफ्ट में उत्पादित 19-20 उत्पादों की तुलना में लगभग आधा है। इसके लिए कुछ हद तक पारिश्रमिक का अंतर भी जिम्मेदार है। केरल के प्रमुख ब्रांड काइटेक्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम जैकब कहते हैं, 'जहां भारत में औसत वेतन 10,000 रुपये प्रति महीने है, वहीं बांग्लादेश में यह 5,000-6,000 रुपये है।' 

Keyword: Clothes, India, Export, FTA, Inernational Market, US, America, Japan, Bangladesh, Switzerland, Turkey, New Zealand, South Korea, Thighland, malaysia, Australia,
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