बिजनेस स्टैंडर्ड - धातुओं में मजबूती का रुख
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धातुओं में मजबूती का रुख

राजेश भयानी / मुंबई February 17, 2019

इस साल की शुरुआत से ही धातुओं की कीमतों में तेजी बनी हुई है। सभी मूल धातुओं के दाम बढ़े हैं। हालांकि तांबे और जस्ते जैसी कुछ धातुओं की कीमतों में औसत बढ़ोतरी 3 से 5 फीसदी के बीच रही है, जबकि निकल, लौह अयस्क और इस्पात के दाम दो अंकों में बढ़े हैं। विश्लेषकों का कहना है कि धातु खंड के फंडामेंटल तेजी को सहारा दे रहे हैं। लेकिन रुझान बड़ी तेजी के मददगार नहीं हैं क्योंकि बड़े खरीदार और निवेशक व्यापार युद्ध की तस्वीर साफ होने तक खरीद के अपने फैसलों को टाल रहे हैं। घरेलू कंपनियों, विशेष रूप से एल्युमीनियम उत्पादकों पर दबाव तभी कम होगा, जब इस प्राथमिक सफेद धातु के दाम बढ़ेंगे और उसके नतीजतन इसके आयात में कमी आएगी।

कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन ने कहा, 'हाल की तेजी की मुख्य वजह रुझान हैं।' पिछले महीने ब्राजील में एक बड़ी खदान में दुर्घटना हुई है, जिससे आपूर्ति में अवरोध पैदा हुआ है। इससे धातुओं की कीमतों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि ऐसी वजह स्थायी नहीं है और इनका असर खत्म हो सकता है। 

शुल्कों को लेकर अमेरिका और चीन के बीच विवाद की तलवार लटक रही है, जिससे बड़े खरीदार दूर बने हुए हैं। मौजूदा फंडामेंटल तेजी के मददगार नहीं हैं। उदाहरण के लिए लंदन मेटल एक्सचेंज में स्टॉक का स्तर एक अहम संकेतक है। जिंसों में तांबे और सीसे जैसी जिंस एक दशक के निचले स्तर पर हैं। यह तेजी के लिए एक बड़ा फंडामेंटल कारण है क्योंकि यह दर्शाता है कि मांग अधिक है। बाजार को बड़े खरीदारों और निवेशकों का इंतजार है, जो इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब व्यापार युद्ध के बादल छंटें और वे बाजार में प्रवेश करें।

रेगसस कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप डागा ने कहा, 'अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने दोनों पक्षों के धीरज की परीक्षा ली है। व्यापार-युद्धों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने के तरीकों में अनिश्चितता आई है। एक मार्च की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है। अगर दोनों देशों के बीच कोई समाधान नहीं हुआ तो इस तिथि से चीन के आयात पर अमेरिका के नए शुल्क लागू हो जाएंगे। लेकिन हमारा मानना है कि दोनों के बीच आंशिक या तात्कालिक समझौता होने की प्रबल संभावनाए हैं।' इस्पात और लौह अयस्क जैसी जिंसों की कीमतें पिछले 2-3 महीनों से बढ़ रही हैं। पहले चीन के प्रदूषण फैलाने वाली मिलों पर कार्रवाई और अब ब्राजील में खदान दुर्घटना की खबरों से। वर्ष 2019 में हॉट रोल्ड इस्पात की कीमतें 10.5 फीसदी बढ़ चुकी हैं, जबकि लौह अयस्क के दाम 22 फीसदी चढ़ चुके हैं। भारतीय इस्पात कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ाई हैं। इस्पात और अयस्क में यह रुझान तब तक बना रहेगा, जब तक आपूर्ति सीमित बनी रहेगी। 

वैश्विक उत्पादकों के लिए एल्युमीनियम भी चिंता का विषय है। इस धातु की कीमतें पिछले रूसी विनिर्माता रूसाल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बढ़ गई थी, लेकिन प्रतिबंध हटाए जाने के बाद कीमतें फिर गिरने लगी हैं। इस समय एल्युमीनियम के दाम करीब 1,850 डॉलर प्रति टन हैं, जो उत्पादन लागत से भी कम हैं। इसी वजह से चीन और अन्य देश अपने माल, विशेष रूप से एल्युमीनियम स्क्रैप की भारत में डंपिंग कर रहे हैं। भारत में स्क्रैप शुल्क प्राथमिक धातु से कम है। कंपनियां अपने उत्पाद निर्यात बाजार में घरेलू बाजार की तुलना में कम मार्जिन पर उत्पाद बेच रही हैं। इसकी वजह यह है कि आयातित सामग्री सस्ती आ रही है और सरकार लंबे समय से उद्योग की मांग के बावजूद शुल्क नहीं बढ़ा रही है। वैश्विक कीमतों में तेजी से ही निकट भविष्य में भारतीय कंपनियों को लेकर रुझान मजबूत हो सकता है। 
Keyword: Iron Ore, Metal, Fundamental, aluminium, Margin, Scrap Tariff, Export,
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