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आर पावर का हिस्सा बेचेगा एडीएजी

देव चटर्जी और जश कृपलानी / मुंबई February 17, 2019

अनिल अंबानी समूह की प्रवर्तक इकाइयों की 90 फीसदी से ज्यादा लेनदारों के साथ सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन गई है, जिसके तहत लेनदार इस साल सितंबर तक गिरवी शेयरों की बिकवाली नहीं करेंगे। समूह ने लेनदारों को यह भी सूचित किया है कि उसने रिलायंस पावर लिमिटेड की 30 फीसदी शेयरधारिता संस्थागत निवेशकों को बेचने के लिए निवेश बैंकरों की नियुक्ति की है। सूत्रों ने कहा, इस मसले पर निवेश बैंकर अगले हफ्ते रोडशो की शुरुआत करेंगे। सहमति के तहत लेनदार एडीएजी की परिचालित कंपनियों की शेयर कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट के चलते कोलेटर कवर में कमी या मार्जिन घटने पर प्रवर्तकों के गिरवी शेयरों की बिकवाली नहीं करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, अनिल अंबानी समूह ने लेनदारों को कर्ज समझौते में तय तारीख पर मूलधन और ब्याज भुगतान का वादा किया है। शेयर कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट से पहले रिलायंस पावर में प्रवर्तक हिस्सेदारी की कीमत 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा थी और इससे कुल प्रवर्तक उधारी का 65 फीसदी से ज्यादा चुकाया गया होता।

रिलायंस पावर में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 40 फीसदी हिस्सेदारी है और प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बेचे जाने के बाद भी बहुलांश हिस्सेदारी और नियंत्रण अनिल अंबानी समूह के पास बना हुआ है। एडीएजी की प्रवर्तक इकाइयों पर नौ लेनदारों का कर्ज है और उन्होंने सूचीबद्ध परिचालित कंपनियों के शेयर कोलेटरल के तौर पर लिए हुए हैं। इस महीने कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट के बाद दो लेनदारों एडलवाइस और एलऐंडटी फाइनैंस ने गिरवी शेयर बेच दिए थे। इस वजह से एडीएजी समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों ने अपनी आधी कीमत गंवा दी थी। अवैध रूप से शेयर बेचने का आरोप लगाते हुए एडीएजी समूह ने एडलवाइस के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में मुकदमा ठोक दिया है। एलऐंडटी फाइनैंस के पास एडीएजी की प्रवर्तक कंपनियों के शेयर अब नहीं हैं, लेकिन एडलवाइस का 150 करोड़ रुपये बकाया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई सोमवार को होगी और एडीएजी को पहली सुनवाई में किसी तरह की अंतरिम राहत नहीं मिली थी। अनिल अंबानी समूह की प्रवर्तक इकाइयों ने भारतीय म्युचुअल फंडों से 1,000 करोड़ रुपये उधार लिए हैं। इनमें से फ्रैंकलिन टेम्पलटन का 871 करोड़ रुपये है, जो समूह कंपनियों में म्युचुअल फंडों के कुल कर्ज का 90 फीसदी बैठता है। 6 फरवरी को फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड ने कहा था, हमारा मानना है कि यह लेनदेन पर्याप्त तौर पर कवर्ड है और भविष्य की राह तय करने के लिए एडीएजी के साथ बातचीत जारी रखे हुए हैं। इस बारे में जानकारी के लिए फ्रैंकलिन टेम्पलटन को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

सूत्रों के मुताबिक, डीएचएफएल प्रामेरिका एमएफ और इंडियाबुल्स एमएफ का कर्ज संयुक्त रूप से 100 करोड़ रुपये का है और इन्हें 31 मार्च 2019 से पहले अपना बकाया मिल सकता है। एडीएजी के प्रवक्ता ने कहा, हमारी कंपनियों की आंतरिक व फंडामेंटल वैल्यू में भरोसा जताने के लिए हम अपने लेनदारों के शुक्रगुजार हैं। साथ ही समझौते को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी देने के लिए हम उनके आभारी हैं।
Keyword: DHFL, Indiabulls, Mutual Fund, MF, Company, ADAG, Reliance, Anil Ambani, Promoter, Shareholding, Reliance Power,
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