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पाक का तरजीही दर्जा भारत ने खत्म किया

शुभायन चक्रवर्ती /  February 15, 2019

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ  सख्त प्रतिक्रिया दिखाते हुए पड़ोसी देश से व्यापार में सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा वापस ले लिया है। वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान से एमएफएन दर्जा वापस लिए जाने का प्रस्ताव अभूतपूर्व है लेकिन यह देश के अधिकार के दायरे में आता है। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के करीब 40 जवान शहीद हो गए जिसके बाद सरकार ने पाकिस्तान का एमएफएन दर्जा वापस लेने की घोषणा कर दी। अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच सालों में उरी और पठानकोट हमले के बाद कम से कम दो बार इस कदम पर विचार किया गया था और अब भारत व्यापार संबंधों को भी खत्म करने पर विचार कर रहा है। 

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत को इसके लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को भी सूचना देने की जरूरत नहीं है और इस बाबत जल्द ही एक अधिसूचना जारी हो सकती है। हालांकि अधिकारी ने इस बात की ओर इशारा किया कि ऐसा पहले कभी नहीं किया गया क्योंकि इसका इस्तेमाल राजनीतिक खामियों के बजाय 'आर्थिक गलतियों' को न्यायोचित बताने के लिए किया जाता रहा है। 

अभूतपूर्व कदम!

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार एवं शुल्क पर आम समझौते (जीएटीटी) के तहत एमएफएन का दर्जा दिया जाता है।  डब्लयूटीओ के सदस्य देश अन्य व्यापारिक देशों के साथ बिना किसी भेदभाव के व्यापार करने के लिए समझौता करते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि जब भी कोई देश अपने बाजार को खोलता है या फिर व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करते हैं तो उसे अपने सभी व्यापारिक साझेदारों के साथ समान वस्तुओं/सेवाओं के लिए ऐसा करना होता है। एमएफएन की शर्त को डब्ल्यूटीओ ने समर्थन दिया है क्योंकि यह दोहरे और पक्षपाती व्यापार प्रक्रियाओं से बचाव करता है और पारस्परिक मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है। हालांकि आर्थिक प्रतिबंधों की संभावनाओं का पाकिस्तान पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि दोनों देशों के द्विपक्षीय कारोबार बेहद कम है। भारत ने पाकिस्तान को वर्ष 1996 में यह दर्जा दिया था। वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, 'बहुपक्षीय व्यापार मंचों पर एमएफएन दर्जे को वापस लिए जाने की बात पर असहमति जताई जाती है क्योंकि अमूमन देश किसी व्यापार साझेदार द्वारा आर्थिक विरोध की स्थिति को छोड़कर अन्य परिस्थिति में दर्जा खत्म नहीं करते हैं।' वह कहते हैं कि पाकिस्तान ने कभी भारत को एमएफएन दर्जा नहीं दिया ऐसे में देश की स्थिति मजबूत है।  

अन्य विकल्प

भारत पाकिस्तान को डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान संस्था में घसीटने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि एक कूटनीतिक सूत्र के मुताबिक पाकिस्तान के पास 'सुरक्षा अपवादों' का हवाला देने का विकल्प है जिसके जरिये सुरक्षा के आधार पर एक सदस्य देश दूसरे सदस्य को एमएफएन का दर्जा नहीं दे सकता है। दोनों देशों के बीच 2017-18 में द्विपक्षीय व्यापार 2.4 अरब डॉलर या भारत के कुल वाणिज्यिक वस्तुओं के व्यापार का महज 0.3 फीसदी रहा। पाकिस्तान में किया जाने वाला निर्यात 1.9 अरब डॉलर या भारत के कुल निर्यात का 0.63 फीसदी रहा। भारत में पाकिस्तान से होने वाला आयात 48 करोड़ डॉलर या देश के कुल आयात का 0.10 फीसदी है। भारत कपास, जैविक रसायन, प्लास्टिक का निर्यात करता है जबकि खनिज ईंधन, बादाम और प्लास्टर करने वाली वस्तुओं का आयात प्रमुखता से होता है। 
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