बिजनेस स्टैंडर्ड - समुचित प्रक्रिया जरूरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, March 19, 2019 11:56 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

समुचित प्रक्रिया जरूरी

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  February 15, 2019

लड़ाकू विमान या हेलीकॉप्टर जैसे जटिल युद्घक हथियार खरीदने का काम आसान नहीं है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने वायु सेना के लिए की गई मझोले लड़ाकू विमानों की खरीद के ऑर्डर पर 660 तथा रडार सिस्टम पर 42 विशेष टिप्पणियां की हैं। यह प्रक्रिया इतनी सीधी सपाट भी नहीं कि बिना सोच विचार पूरी कर ली जाए। क्योंकि तब अधिकांश बोली लगाने वाले एकबारगी ही अयोग्य घोषित हो सकते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर ऐसी विशेषताएं या उत्पाद की विशिष्टताओं को महत्त्व दिया जा सकता है जो यह तय करने में मदद करें कि क्या बेहतर हो सकता है और क्या नहीं? यह अक्सर निर्णय से जुड़ा मामला होता है।

वास्तविक तौर पर देखें तो उपयोगकर्ता की प्राथमिकता की भी एक अहमियत होती है। वायु सेना के साथ भी यही मामला है। शुरुआती चरण में उसने बार-बार इस बात पर जोर देना जारी रखा कि उसे मिराज की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि करगिल युद्घ में इस विमान का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा था। क्या 2012 में मिराज के उत्तराधिकारी के रूप में राफेल के चयन के लिए भी वायु सेना का ऐसा ही दबाव था, हालांकि उस वक्त उसे कामयाबी नहीं मिल सकी। 

यह दो ऐसी चीजों के बीच चयन हो सकता है जिनमें बहुत कम अंतर हो। यकीनी तौर पर यूरोफाइटर भी राफेल के समान ही बेहतर रहा होगा क्योंकि इसका भी चयन किया गया था, और स्वीडन की बोफोर्स गन का फ्रेंच विकल्प भी उतना ही दमदार रहा होगा। परंतु क्या यूरोफाइटर का चयन करने से उसे भारत के लिए खास जरूरतों के मुताबिक उन्नत नहीं बनाना पड़ता? और राफेल को इस रूप में ढालने में लगी 140 करोड़ डॉलर या कुछ अधिक की राशि खर्च नहीं करनी पड़ती? सबसे बढ़कर कूटनयिक निहितार्थ भी चयन को प्रभावित कर सकते हैं और करते हैं। आखिर इस बात की और क्या वजह हो सकती है कि भारवाहक हेलीकॉप्टरों की मानक दर बदली गई, वह भी बोलियां खोले जाने के बाद? ऐसे में एक ओर जहां अंकेक्षण की बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, वहीं व्यावहारिक बातों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। 

ऑडिट रिपोर्ट भी हथियार खरीद की जटिल रिपोर्ट से आसान नहीं होतीं। ऐसे में यह समझ होनी आवश्यक है कि आखिर क्यों सीएजी रक्षा मंत्रालय के इस बात पर जोर देने पर चुपचाप मान गया कि राफेल अनुबंध में वित्तीय गोपनीयता का प्रावधान है। जबकि अन्य तमाम हथियार खरीद सौदों से जुड़े वित्तीय आंकड़े सीएजी की उसी रिपोर्ट में साफ देखे जा सकते हैं। यह भी जाहिर है कि सीएजी ने राफेल की वित्तीय गारंटी न दिए जाने के कारण हुई बचत की राशि का उल्लेख न कर भी सरकार को राहत दी है। अंकेक्षकों के लिए काफी कुछ है। 

क्या हथियार खरीद की यह विस्तृत प्रक्रिया इसलिए कम गुणवत्ता की है क्योंकि यह इतनी विस्तृत है? इस समीकरण में समय को कारक मानकर देखिए। कई मामलों में चयन प्रक्रिया में ही 8 से 10 वर्ष का समय लगता है और इस दौरान रक्षा सेवाओं को प्रतीक्षा करनी होती है। कई बार तो इसके बाद भी खरीद को अंजाम नहीं दिया जाता। कई बार अंतरिम तौर पर तकनीक बदल चुकी होती है। क्या प्रतिस्पर्धी बोलियों के बीच चयन की संक्षिप्त प्रक्रिया संभव है? क्योंकि हाल के दिनों में तो अधिकांश खरीद बिना ऐसी बोली के हुई है। जहां तक लेनदेन की बात है, शायद ही कोई होगा जो सोचेगा कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले सौदों में पैसे का लेनदेन नहीं होता होगा। ध्यान रहे कि ये निर्णय कई स्तरों पर, कई वर्ष में लिए जाते हैं और चयन करना इतना जटिल होता है कि इनमें हेराफेरी की काफी गुंजाइश रहती है। 

इस बीच बड़े सवालों का कोई उचित जवाब ही नहीं है। उदाहरण के लिए इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि जब वायु सेना को 126 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता थी तो 36 विमान क्यों खरीदे गए जबकि वैसे ही विमानों के लिए नए सिरे से बोली लगने तथा उनके हासिल होने में कई वर्ष का समय लग सकता है। रक्षा मंत्रालय ने इस मसले पर प्रतिक्रिया दी है कि हल्के लड़ाकू विमानों के ऑर्डर दिए जा रहे हैं। यानी उसके हिसाब से मझोले और हल्के विमानों में कोई फर्क ही नहीं है। तेजस के मामले में भी धीमी प्रगति हो रही है। अब वायु सेना अतिरिक्त सुखोई-30 हासिल करने में लगा है जो भारी विमान हैं। इस बीच वायु सेना घरेलू विमान निर्माण उद्योग तैयार करने से निरंतर दूरी बनाए हुए है। नौसेना जहाज निर्माण के क्षेत्र में बहुत पहले स्वदेशी अपना चुकी है। यानी इतने भारी रक्षा बजट के बावजूद हमारा देश आयात पर निर्भर हो चुका है। कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ अवश्य है।

Keyword: CAG, France, Fighter plane, Rafale, Parliament, UPA, NDA, Defence, Report, eurofighter, sukhoi 30, Airforce, Defecne Budget, Bidding, Audit Report,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य हासिल कर पाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.