बिजनेस स्टैंडर्ड - सड़क निर्माण में सुस्त पड़ेगा एचएएम
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सड़क निर्माण में सुस्त पड़ेगा एचएएम

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 02 14, 2019

पड़ेगा छोटी-मझोली कंपनियों पर असर

एचएएम मॉडल सुस्त पडऩे से मझोले आकार की कंपनियां गंवा सकती हैं कारोबार
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में सरकार उठाती है जोखिम
2016 में केंद्र ने राजमार्ग परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए दी थी एचएएम मॉडल को मंजूरी
इसके तहत 40 प्रतिशत धन केंद्र सरकार देती है

बिजनेस स्टैंडर्ड सड़क निर्माण में सुस्त पड़ेगा एचएएमहाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत सड़क निर्माण अगले साल तक सुस्त पड़ जाने की उम्मीद है। ऐसे में मध्यम आकार वाली गावर कंस्ट्रक्शन, दिलीप बिल्डकॉन और अशोक बिल्डकॉन जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में अपना शीर्ष स्थान गंवा सकती हैं। हाइब्रिड एन्युटी जिसमें बड़े वित्तीय जोखिम केंद्र सरकार उठाती है, की ओर रुझान बढऩे के बाद ये कंपनियां विजेता के तौर पर उभरी थीं। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक अंकुर अग्रवाल ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान कहा, 'अगले वित्त वर्ष में हाइब्रिड-एन्युटी निष्क्रिय होगा क्योंकि इस क्षेत्र में अब और अधिक एचएएम को समाहित करने की क्षमता घटी है।'

अग्रवाल ने कहा, 'अगले साल जारी होने वाली राष्टï्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में बड़ी हिस्सेदारी ऐसी ईपीसी परियोजनाओं की होगी जो 2018-19 में प्रभावी थीं। ऐसे में मध्यम आकार वाली कंपनियों को अपनी क्रियान्वयन क्षमताओं को आगे बढ़ाना होगा।'

हालांकि डेलॉयट इंडिया में पार्टनर विश्वास उद्गीरकर इससे अलग मत रखते हैं। वह कहते हैं, 'मध्यम आकार वाली कंपनियां अपनी चमक नहीं खाऐंगी क्योंकि वे निर्माण के क्षेत्र में लगी हुई हैं और ईपीसी परियोजनाएं पूरा करेंगी। चूंकि ठेके आकार में छोटे हैं या इनका आर्थिक मूल्य एचएएम के मुकाबले कम है, ऐसे में दौर में बने रहने के लिए राजमार्ग डेवलपरों को अधिक परियोजनाओं को पूरा करना होगा।'

2016 में केंद्र सरकार ने राजमार्ग परियोजनाओं में तेजी लाने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को सक्रिय करने और इस क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए सड़कों के निर्माण की खातिर हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को मंजूरी दी थी।इस मॉडल के तहत सरकार काम शुरू करने के लिए परियोजना लागत की 40 फीसदी डेवलपरों को मुहैया कराती है और शेष निवेश डेवलपरों को करना होता है।

डिजाइन, निर्माण, परिचालन और स्थानांतरण (डीबीओटी) या बीओटी राजमार्ग निर्माण का एक दूसरा तरीका है जिसमें निजी निवेशक परियोजना की लागत का एक निश्चित प्रतिशत तक ही पैसा देते हैं।  ईपीसी या इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण परियोजना पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त पोषित होती है जिसमें निर्माण के दौरान समूचा निवेश या तो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किया जाता है और उसके बाद परिचालन और रख रखाव के लिए राजमार्ग कंपनियों को ठेका देने के लिए निविदा लाई जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में देश की बुनियादी परिदृश्य बदल गया। इसकी वजह है कि इस क्षेत्र में कभी दबदबा रखने वाली लार्सन ऐंड टुब्रो, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी, पुंज लॉयड, जीएमआर और जीवीके जैसी बड़ी कपंनियों के स्थान पर दिलीप बिल्डकॉन और अशोक बिल्डकॉन जैसी कंपनियों ने शीर्ष स्थान पर कब्जा जमा लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में निष्ठावान कंपनियों ने अपनी जमीन गंवा दी और मध्यम आकार वाली कंपनियों के लिए रास्ता तैयार किया। यह मुख्य तौर पर आक्रामक बोली लगाने और इन कंपनियों की परियोजनाओं को वित्त मुहैया कराने में देरी और बैंकों की बेरुखी की वजह से हुआ है।
Keyword: hybrid, Annuity, Modal, HAM, Ashok Buildcon, Delip Bildcon, Highway, NHAI,
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