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टाटा मोटर्स: तीसरी तिमाही में घाटे से विदेश में अधिग्रहण पर नजर

कृष्णकांत / मुंबई February 14, 2019

टाटा स्टील ने 2007 में 13 अरब डॉलर के एक सौदे के तहत कोरस (बाद का नाम टाटा स्टील यूरोप) का अधिग्रहण किया था। उसके बाद टाटा समूह ने 2008 में टाटा मोटर्स के जरिये 2.3 अरब डॉलर के एक अन्य सौदे के तहत ब्रिटेन की लक्जरी कार कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) का अधिग्रहण किया। डॉलर में किए गए इन दो बड़े अधिग्रहण के बल पर टाटा समूह ने अपने कारोबार का वैश्विक विस्तार किया है जिससे भारतीय बाजार पर उसकी निर्भरता कम हुई। टाटा ग्लोबल बेवरिजेस, इंडियन होटल्स, टाटा कम्युनिकेशंस और टाटा केमिकल्स जैसी समूह की अन्य कंपनियों ने भी विदेश में परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर काफी खर्च किया, लेकिन उनके दांव अपेक्षाकृत छोटे थे।

टाटा समूह इन अधिग्रहण के बल पर एक वैश्विक कंपनी बन गया लेकिन समूह की वित्तीय वित्तीय सेहत को दुरुस्त करना अभी बाकी है। टाटा स्टील और जगुआर लैंड रोवर दोनों सौदों के लिए समूह को काफी क्षतिपूर्ति का झटका लगा है। वित्त वर्ष 2018 में टाटा समूह के कुल 6.5 लाख करोड़ रुपये के एकीकृत राजस्व में विदेशी कारोबार की हिस्सेदारी करीब दो तिहाई है।

हालांकि टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) समूह के लिए नकदी का प्रमुख स्रोत बनी हुई है जिसका समूह के बाजार पूंजीकरण में 70 फीसदी हिस्सेदारी है। साथ ही, प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस को समूह की सभी कंपनियों से होने वाली लाभांश आय में टीसीएस का योगदान 90 फीसदी है।

टाटा मोटर्स की जेएलआर इकाई ने वित्त वर्ष 2019 के पहले नौ महीने के दौरान करीब 32,500 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया जबकि यूरोपीय इकाई सहित टाटा स्टील के विदेशी कारोबार को इस अवधि में 1,239 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। टाटा स्टील यूरोप ने पिछले 11 वित्त वर्षों में से 8 में घाटा दर्ज किया है।

रुपये में इन दोनों कंपनियों के निवेश अथवा पूंजीगत खर्च में 2007 के बाद 3.6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई लेकिन इस अवधि के दौरान उनके एकीकृत बाजार पूंजीकरण में महज 46,500 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस प्रकार टाटा संस सहित इन दोनों कंपनियों के शेयरधारकों मूल्य में उल्लेखनीय कमी आई।

टाटा समूह की कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में टाटा मोटर्स और टाटा स्टील की एकीकृत हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम है। जबकि सितंबर 2018 में समाप्त पहली छमाही के दौरान समूह की कुल परिसंपत्तियों और राजस्व में हिस्सेदारी करीब दो तिहाई है। विश्लेषकों ने कहा कि दो बड़े अधिग्रहण सौदे के बाद इन दोनों कंपनियों के ऋण बोझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई जबकि उनकी लाभप्रदता में मामूली वृद्धि दर्ज की गई। टाटा मोटर्स समूह की सबसे बड़ी कंपनी है जिसकी वित्त वर्ष 2018 में समूह के राजस्व में 45 फीसदी और परिसंपत्तियों में 35 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके बाद समूह के राजस्व में 21 फीसदी और परिसंपत्तियों में 29 फीसदी हिस्सेदारी के साथ टाटा स्टील दूसरे पायदान पर है।

विश्लेषकों का कहना है कि टाटा मोटर्स और टाटा स्टील के कमजोर प्रदर्शन से समूह की वित्तीय सेहत पर दबाव हो सकता है लेकिन समूह को टीसीएस के दमदार प्रदर्शन से बल मिला है। अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एक विश्लेषक ने कहा, 'समूह अपनी दो सबसे बड़ी कंपनियों के वित्तीय घाटे से उबर जाएगा लेकिन उसकी वित्तीय लागत का प्रभाव अगले कुछ वर्षों तक बरकरार रहेगा।'

टाटा समूह के प्रवक्ता ने कहा कि टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के विदेशी अधिग्रहण से मूल्य अर्जित हुआ लेकिन हालिया नुकसान वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के कारण है जो उसके वश में नहीं है। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों के दौरान समूह के बाजार पूंजीकरण में टाटा स्टील और टाटा मोटर्स दोनों का योगदान बढ़ा है। वित्त वर्ष 2007 से वित्त वर्ष 2018 के बीच टाटा मोटर्स के बाजार में 3.7 गुना और टाटा स्टील के बाजार पूंजीकरण में 2.5 गुना वृद्धि हुई।' कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2007 से वित्त वर्ष 2018 के बीच टीसीएस को छोड़कर समूह के बाजार पूंजीकरण में इन दोनों कंपनियों ने 40 फीसदी से अधिक का योगदान किया। प्रवक्ता ने कहा, 'टाटा मोटर्स के बाजार पूंजीकरण में आई हालिया गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक वाहन उद्योग की चुनौतियां है।'
Keyword: Tata Group, Tata Industries, Company, Investment, Telecom, Ligistics, Indian Hotels, Tata Communication, Tata Consultancy, TCS, JLR, Tata Motors,
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