बिजनेस स्टैंडर्ड - एनरॉन जांच बंद करने का महाराष्ट्र का अनुरोध खारिज
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एनरॉन जांच बंद करने का महाराष्ट्र का अनुरोध खारिज

आशिष आर्यन / नई दिल्ली 02 14, 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने ठुकराया अनुरोध

बिजनेस स्टैंडर्ड एनरॉन जांच बंद करने का महाराष्ट्र का अनुरोध खारिजसर्वोच्च न्यायालय ने एनरॉन-दाभोल विद्युत परियोजना में कथित रिश्वत के मामले को बंद करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध को ठुकरा दिया है। आरोप है कि परियोजना की तत्कालीन बोलीदाता एनरॉन ने सौदा हासिल करने के लिए राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों को पैसे चुकाए थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि इस बारे में 13 मार्च तक प्रमाण सौंपा जाए कि सरकार ने किस आधार पर इस मामले को तार्किक रूप देने का फैसला किया। तीन न्यायाधीशों वाले इस पीठ ने राज्य से समिति के सुझाव के आधार पर अब तक उठाए गए कदमों की भी संपूर्ण जानकारी देने को कहा है। 

वर्ष 1992 में अमेरिकी ऊर्जा कंपनी एनरॉन ने महाराष्ट्र के दाभोल में गैस-संचालित विद्युत संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस परियोजना के कार्य पर जल्द ही भ्रष्टाचार और रिश्वत के आरोपों के बादल छा गए। 1995 में महाराष्ट्र में नई सरकार सत्ता में आई और समिति के सुझावों पर परियोजना रोक दी गई। तब एनरॉन ने सरकार के साथ मध्यस्थता की पेशकश की, लेकिन एक साल बाद नया समझौता हुआ।

वर्ष 2000 में, जब दूसरी सरकार सत्ता में आई तो उसने दिसंबर 2000 के महीने के लिए एनरॉन को बकाया लगभग 2.2 करोड़ डॉलर का भुगतान रोक दिया। तब राज्य सरकार ने विद्युत खरीद समझौते को भी रद्द कर दिया जिससे एनरॉन को परियोजना के दूसरे चरण का काम बंद करने और पहला चरण बेचने के लिए बाध्य होना पड़ा। वर्ष 2001 में महाराष्ट्र सरकार ने आईएएस अधिकारी माधव गोडबोले के नेतृत्व में एक अन्य जांच का आदेश दिया था। गोडबोले की अध्यक्षता वाली समिति ने विद्युत संयंत्र के लिए शर्तों में बदलाव का विरोध किया और प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की न्यायिक जांच का सुझाव दिया। 

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