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खुलकर सामने आई पायलटों की कमी

सुरजीत दास गुप्ता और अनीश फडणीस / नई दिल्ली February 13, 2019

इंडिगो की 30 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने के बाद पायलटों की कमी फिर से चर्चा में आ गई है। खासकर ऐसी एयरलाइंस को संकट है, जो अपने बेड़े में बड़े पैमाने पर विमान शामिल कर रहे हैं। उद्योग के अनुमान के मुताबिक अगले 12 महीने में भारत में 100 से ज्यादा नए विमान आएंगे, जिनमें से सबसे ज्यादा इंडिगो के होंगे। कंपनी हर महीने 9 नए विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही है। परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 19 में ही करीब 1,500 से 2,000 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी, जिससे नए विमानों को उड़ाया जा सके और मौजूदा कमी को दूर किया जा सके। 

ज्यादा उड़ानें परिचालन में लाने की वजह से भी यह संकट बढ़ा है।  उसकी तुलना में भर्तियां सुस्त हैं। उद्योग का अनुमान है कि अतिरिक्त कमांडरों की भर्ती वित्त वर्ष 17 की तुलना में वित्त वर्ष 18 में करीब 10 प्रतिशत घटी है। ऐसा इस स्थिति में हुआ है, जब एयरलाइंस के पास विदेशी कमांडर तलाशने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसकी वजह के कमी और ज्यादा हुई है। एक निजी एयरलाइंस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'कुछ साल से हम विदेशी कमांडरों पर निर्भरता कम कर रहे हैं। लेकिन अब यह बढ़ रहा है और हमारा मानना है कि यह जल्द ही करीब 10 प्रतिशत हो जाएगा।' 

सीएपीए के एक शोध के मुताबिक देश में 7,963 से ज्यादा पायलट हैं और अगले 10 साल में 17,000 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी, जिनमें से 9,000 फस्र्ट ऑफिसर्स कमांडर के रूप में पदोन्नत हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर देखें तो इस समय इंडिगो के पास सभी पायलटों में से 38 प्रतिशत पायलट हैं, लेकिन उसकी घरेलू बाजार में हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है और कंपनी विदेश में उड़ान की आक्रामक योजना बना रही है। इसके पास 1250 से ज्यादा कैप्टन हैं, जो सेवा में मौजूद 4,000 कमांडरों के करीब 31 प्रतिशत हैं। 

एक एयरलाइंस के शीर्ष अधिकारी के मुताबिक आपको 5 से 6 कमांडरों और इतनी ही संख्या में सहायक पायलटों सहित कुल 12 सदस्यों की जरूरत एक एयरक्राफ्ट में होती है। उन्होंने कहा, 'इससे आप कठिनाई का अनुमान लगा सकते हैं कि कितना कठिन लक्ष्य है, क्योंकि एक पायलट को कमांडर बनने में 4 से 5 साल लगते हैं।' 

इससे यह साफ है कि वेतन बढ़ेगा। एक एयरलाइन के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वेतन एक बार फिर सालाना 5-7 प्रतिशत बढ़ेगा। पायलटों की कमी स्थानीय समस्या नहीं है। पायलटों की वैश्विक मांग है, खासकर चीन और पश्चिम एशियाई देशों जैसे एमिरेट्स, कतर के अलावा अन्य दिग्गजों ने अपने बेड़े का विस्तार किया है। उदाहरण के लिए चीन में हवाई यात्रा बहुत ज्यादा बढऩे से उसे 5,000 से ज्यादा पायलटों की जरूरत है। 

वहीं यूरोप में भी पायलटों की समस्या है। एक प्रमुख मसला यह है कि लाइसेंस जारी किए जाने की संख्या कम हो रही है जबकि पायलटों की मांग बढ़ रही है। एयरलाइंस की यह भी शिकायत है कि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षण केंद्र नहीं बन रहे हैं और गुणवत्ता भी कम है जिसकी वजह से कुल मिलाकर प्रशिक्षण संबंधी बुनियादी ढांचा कमजोर पड़ गया है। 

Keyword: airlines, flight, CAPA, Airlines industry, International Route, Fuel, Loss, Indigo,
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