बिजनेस स्टैंडर्ड - कर मांग को चुनौती देगी आईबीएम
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कर मांग को चुनौती देगी आईबीएम

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु 02 13, 2019

कर विवाद

आईबीएम की भारतीय इकाई को 2014 में आयात किए गए सामान की इनवॉइस के आधार पर पिछले सप्ताह 620 करोड़ रुपये का नोटिस मिला था

आईबीएम कर अधिकारियों के सामने अपनी मूल्यांकन पद्धति बताने की तैयारी कर रही है। अगर यह बातचीत काम नहीं करती है तो कंपनी कानूनी रास्ता अपनाएगी।

बिजनेस स्टैंडर्ड कर मांग को चुनौती देगी आईबीएमवैश्विक तकनीकी कंपनी आईबीएम 620 करोड़ रुपये की कर मांग के खिलाफ न्यायाधिकरण में चुनौती देने के बारे में विचार कर रही है। कर की यह मांग कर अधिकारियों ने आयात की कम कीमत दिखाने को लेकर की थी। मामले से जुड़े एक सूत्र ने यह जानकारी दी। हालांकि कंपनी कानूनी रास्ता अपनाने से पहले आयात के लिए अपनाई गई मूल्यांकन पद्धति पर अपने विचार कर अधिकारियों के सामने रखेगी। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'आईबीएम कर अधिकारियों के सामने अपनी मूल्यांकन पद्धति बताने की तैयारी कर रही है। अगर यह बातचीत काम नहीं करती है तो कंपनी कानूनी रास्ता अपनाएगी।' 

आईबीएम की भारतीय इकाई को 2014 में आयात किए गए सामान की इनवॉइस के आधार पर पिछले सप्ताह 620 करोड़ रुपये का नोटिस मिला था। नोटिस में यह भी कहा गया कि आईबीएम ने अपने अंतर-कंपनी लेनदेन पर सीमा शुल्क भी नहीं चुकाया है। आईबीएम के प्रवक्ता ने मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। आईबीएम एक अन्य मामले में आयकर विभाग से 5,300 करोड़ रुपये की कर मांग का सामना भी कर रहा है। कंपनी पर यह कर पेनल्टी लाभ को कम करके दिखाने के आरोप में वर्ष 2013 में लगाई गई थी। 

आईबीएम कर्नाटक उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ मामला लड़ रही है। पिछले कुछ सालों से तकनीकी सेवा क्षेत्र में काम कर रहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय कर अधिकारियों की निगरानी में हैं। कर विशेषज्ञ और उद्योग पर नजर रखने वालों का मानना है कि अंतर-कंपनी लेनदेन, विदेशी कंपनी की भारतीय इकाई द्वारा रॉयल्टी भुगतान, लाभांश वितरण कर और आयात को कम करके दिखाना जैसे कुछ क्षेत्रों में कंपनियों से कर संबंधी मांग की जा रही है। फिलहाल मध्यस्थ की परिभाषा भी काफी विवादास्पद है और अग्रिम कर नियम किसी भी मध्यस्थ द्वारा किए गए निर्यात पर कर लगाने के पक्ष में हैं। 

पारिख कंसल्टिंग के संस्थापक और इंजीनियरिंग सेवा सलाहकार पारिख जैन कहते हैं, 'वैश्विक तकनीकी कंपनियों की भारतीय इकाइयां आमतौर पर अंतर-कंपनी लेनदेन के मामले में लेनदेन कीमत और दूसरे मामलों में रॉयल्टी भुगतान को लेकर कर मांग संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं। हम कह सकते हैं कि 'सेवा' की परिभाषा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और यहां अभी भी बहुत से ग्रे एरिया हैं।'

कर संबंधी इन प्रावधानों के अलावा लाभांश वितरण कर (डीडीटी) का भुगतान भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां कई कंपनियों को कर मांग का सामना करना पड़ता है। मार्च 2018 में आयकर अधिकारियों ने लाभांश वितरण कर के भुगतान संबंधी विवाद में आईटी सेवा प्रदाता कॉग्निजेंट के कुछ बैंक खाते सीज कर दिए थे। कंपनी को डीडीटी का भुगतान नहीं करने पर करीब 2,800 करोड़ रुपये का नोटिस मिला था और फिलहाल मद्रास उच्च न्यायालय में इस मामले में वाद चल रहा है। आयकर विभाग का आरोप था कि कंपनी ने मई 2016 में करीब 19,415 करोड़ रुपये अनिवासी शेयरधारकों को दे दिए थे लेकिन इस पर किसी तरह का लाभांश वितरण कर नहीं चुकाया गया था। 
Keyword: IBM, Technology, Company, Tax demand, Indian Unit,
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