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संप्रग से सस्ता मोदी का राफेल

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली February 13, 2019

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की बुधवार को संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए मोदी सरकार द्वारा किया गया सौदा पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की पेशकश से सस्ता है। नए सौदे के तहत हरेक विमान की कीमत कम से कम 2.86 फीसदी कम बैठती है। मोदी सरकार ने 36 विमान खरीदने के लिए सौदा किया है जबकि मनमोहन सिंह सरकार ने 126 विमान खरीदने की नाकाम कोशिश की थी। 

 

रिपोर्ट में 126 बहुद्देशीय लड़ाकू विमानों (एमएमआरसीए) को खरीदने के लिए हुए मूल सौदे की खामियों हो उजागर किया है और 36 विमान खरीदने के लिए हुए सौदे में फ्रांस के सरकारी गारंटी देने के बजाय प्रधानमंत्री के महज आश्वासन पत्र देने पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय के दो पत्रों के बाद कीमतों को संपादित किया गया और इसमें कीमतों के लिए यू वी और सीवी जैसे अक्षरों का इस्तेमाल किया गया। 

36 राफेल विमान खरीदने के लिए फ्रांस और भारत की सरकारों के बीच 2016 में समझौता हुआ था। ये विमान उडऩे की स्थिति में भारत को सौंपने जाने हैं जबकि एमएमआरसीए सौदे के तहत 18 विमानों की आपूर्ति उडऩे की स्थिति में होनी थी और बाकी 108 विमान प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए जाने थे। 

रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि 2007 और 2015 में हुए सौदों की कीमतों के बीच सीधी तुलना संभव नहीं है। सौदे के लिए वार्ता करने वाली भारतीय टीम (आईएनटी) ने कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया था जिसमें फ्रेंच नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऐंड इकनॉमिक स्टडीज द्वारा प्रकाशित औद्योगिक लागत सूचकांकों का इस्तेमाल किया गया था। 

आईएनटी ने दोनों सौदों का मात्रात्मक विश्लेषण किया और फिर महंगाई को समायोजित करते हुए 2007 की कीमतों को 2015 के स्तर पर लाया गया। सीएजी ने कहा कि प्रति विमान लागत का निर्धारण करने के लिए दोनों सौदों के उन विमानों की कीमतों की तुलना की जा सकती है जिन्हें उडऩे की स्थिति में भारत लाया जाना था। 

रिपोर्ट में कहा गया, 'यह समायोजन के बाद निर्धारित कीमत है यानी 2015 में उडऩे की स्थिति वाले विमानों की कीमत, बशर्ते अगर 2007 की पेशकश में भी कीमत समान होती। ऑडिट में भी यही तरीका अपनाया गया और आईएनटी द्वारा की गई मूल्यों की तुलना का सत्यापन किया गया।' इसमें कहा गया है कि सीएजी द्वारा निर्धारित कीमत आईएनटी की कीमत से 1.23 फीसदी कम है। 

रिपोर्ट में मुख्य रूप से सीएजी की कीमत और उस कीमत के बीच तुलना की गई है जिस पर 2016 का सौदा हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट के मुताबिक इस सौदे की अनुमानित लागत 'सीवी' मिलियन डॉलर होनी चाहिए जबकि सौदे 'यू' मिलियन डॉलर में किया गया। यानी यह सौदा ऑडिट अलाइंड प्राइस से 2.86 फीसदी कम पर हुआ। रिपोर्ट में सौदे के विभिन्न पहलुओं की अनुबंधित कीमतों और ऑडिट द्वारा निर्धारित मूल्य की भी तुलना की गई। इनमें सेवाओं, सहायक उपकरणों, विशेष रूप से भारत के लिए लगाए गए उपकरण, इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज, प्रदर्शन आधारित लॉजिस्टिक्स, हथियार प्रणालियां, जमीनी उपकरण, पायलटों और चालकदल का प्रशिक्षण और उड़ान सिमुलेटर शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लिए विशेष रूप से लगाए गए उपकरणों की कीमत 2016 के सौदे में ऑडिट द्वारा तय कीमत की तुलना में 17.08 फीसदी कम है। इसी तरह ऑपरेशन सपोर्ट उपकरण और तकनीकी सहायता अवयवों की कीमत 4.77 फीसदी और हथियार प्रणाली की कीमत 1.05 फीसदी कम है। दूसरी तरफ 2016 के अंतिम अनुबंध की अनुबंधित कीमत ऑडिट में तय कीमत के मुकाबले 6.54 फीसदी ज्यादा महंगी थी और इसकी कीमत इंजीनियरिंग पैकेज और प्रदर्शन आधारित लॉजिस्टिक्स की वजह से बढ़ गई। पायलट का प्रशिक्षण और जमीनी स्तर पर विमान को सेवाएं देने वाले तकनीशियन और मेकेनिक की टीम भी ऑडिट में तय की गई कीमतों के मुकाबले 2.68 फीसदी महंगा ही रहा। 

सीएजी की रिपोर्ट में एमएमआरसीए के मूल प्रस्ताव की निंदा की गई थी जिसमें दसॉ ने खुद को सबसे कम बोली लगाने वाले के तौर पर घोषित किया गया था और इसे मार्च 2015 में वापस ले लिया गया। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में असंगति पाई। स्वतंत्र बाह्य निरीक्षकों के एक पैनल ने पाया कि दसॉ को सबसे कम बोली लगाने वाले के तौर पर घोषित तक नहीं किया जाना चाहिए था। मई 2008 में छह विमानों के तकनीकी मूल्यांकन का जिक्र करते हुए सीएजी ने कहा कि अन्य चार विमानों में एक से दो चूक थी, वहीं राफेल विमान प्रस्ताव में तय 9 एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट मानकों को पूरा नहीं कर सकी। इसने कलपुर्जे और इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज के विनिर्माताओं की सूची का डेटा भी जमा नहीं किया था। 

सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से ज्यादातर में से छूट दी गई और दसॉ ने अन्य जरूरतों को पूरा करने पर सहमति जताई ताकि इसकी बोली की अनुमति मिले। एमएमआरसीए के लिए जिन अन्य विमानों पर विचार किया गया उनमें यूरोफाइटर टाइफून, यूनाइटेड एयरक्राफ्ट मिग 35, लॉकहीड मार्टिन एफ-16, बोईंग एफ/ए-18 और साब ग्रिपेन थी।

सीएजी के लिए दूसरी चिंता की वजह यह थी कि 36 राफेल सौदे के मामले में दसॉ ने कोई वित्तीय और प्रदर्शन आधारित गारंटी पूरा नहीं की थी। रिपोर्ट में कहा गया, 'फ्रांस सरकार और वेंडर ने बैंक गारंटी या सरकारी गारंटी पूरा करने पर सहमति नहीं जताई थी। बैंक गारंटी के बजाय इसने आश्वासन पत्र मुहैया कराया जिस पर फ्रांस के प्रधानमंत्री का हस्ताक्षर था।' 

रिपोर्ट में कहा गया फ्रांस सरकार ने एस्क्रो अकाउंट पर कोई सहमति नहीं दी थी क्योंकि इसने यह महसूस किया कि फ्रांस सरकार द्वारा दी गई गारंटी अभूतपूर्व और व्यापक है।
Keyword: CAG, France, Fighter plane, Rafale, Parliament, UPA, NDA, Congress, BJP, Defence, Report, Prime Minsiter, Narendra Modi, Rahul Gandhi,
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