बिजनेस स्टैंडर्ड - आपके बैंक खाते से बकाया वसूल सकता है आयकर विभाग
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आपके बैंक खाते से बकाया वसूल सकता है आयकर विभाग

तिनेश भसीन /  02 12, 2019

सख्त कार्रवाई

दो स्टार्टअप कंपनियों के खिलाफ आयकर विभाग की आक्रामक कार्रवाई
कंपनियां अपनी नकदी का स्रोत बताने में रहीं नाकाम
इस तरह की स्थिति से बचने के लिए कंपनियों को अधिकारी से करना चाहिए तत्काल संपर्क
विभाग के पास फ्रीज किए गए बैंक खातों से बकाया वसूलने का अधिकार
आयकर कानून की धारा 68 का किया गया इस्तेमाल

बिजनेस स्टैंडर्ड आपके बैंक खाते से बकाया वसूल सकता है आयकर विभागदो स्टार्टअप कंपनियों ट्रैवलखाना और बेबीगोगो के खिलाफ आयकर विभाग की आक्रामक कार्रवाई से उद्योग सकते में है। विभाग का कहना है कि ये दो कंपनियों अपनी नकदी का स्रोत बताने में नाकाम रही हैं जिसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग ने उनके इन कंपनियों से खाते से पैसे ले लिए। ऐसा कम ही देखने को मिलता है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम तभी उठाए जाते हैं जब कंपनी बिकने के कगार पर हो। 

अलबत्ता कर अधिकारियों का यह भी कहना है कि कंपनियों को बहुत सक्रियता दिखाने की जरूरत है और इस तरह की स्थिति से बचने के लिए उन्हें नोटिस जारी होते ही सही अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'ऐसे अधिकांश मामलों में अधिकारी अपील और विवादित राशि के 20 फीसदी का भुगतान करने सलाह देते हैं या वे किस्तों में इसके भुगतान की अनुमति दे सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्टार्टअप का मामला क्या है और वह कौन सा रास्ता अपनाना चाहती है।' बीडीओ इंडिया में पार्टनर (कर एवं नियामकीय सेवाएं) प्रणय भाटिया भी यही सलाह देते हैं। उन्होंने कहा, 'स्टार्टअप को तुरंत नोटिस के खिलाफ अपील करनी चाहिए और कर कानूनों के तहत उनके पास मौजूद विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए।'

कर विभाग के लिए बैंक खाते फ्रीज करना कोई असामान्य बात नहीं है। ऐसे भी कई मामले हैं जब अधिकारियों ने बैंक से बकाया वसूला है। हालांकि इस तरह की कार्रवाई कम ही होती है। सुराणा ने कहा, 'विभाग के पास फ्रीज किए गए बैंक खातों से अपना बकाया वसूलने का अधिकार है लेकिन यह मामले और टाइमलाइन पर निर्भर करता है। अधिकारियों के पास यह अधिकार भी है कि वे कंपनी के कर्जदारों को सीधे विभाग को भुगतान करने के लिए भी कह सकते हैं।' लेकिन इतने सख्त कदम कुछ खास मामलों में ही उठाए जाते हैं। अगर कंपनी परिसमापन की प्रक्रिया से गुजर रही हो तो ऐसा किया जा सकता है। आमतौर पर कर आकलन अधिकारी बैंक को संबंधित कंपनी का खाता फ्रीज करने को कहता है। वह बैंक से कहता है जब तक बकाये का निपटान नहीं हो जाता है तब तक खाते से कोई भुगतान नहीं होना चाहिए। 

इस मामले में आयकर विभाग ने आय कर कानून की धारा 68 का इस्तेमाल किया है। यह धारा एक दुरुपयोग विरोधी उपाय है जिसका मकसद ऐसी कंपनियों से निपटना है जिनके खाते में ज्ञात स्रोतों से अधिक राशि आती है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि कई स्टार्ट-अप कंपनियों को प्रमुख कर के अलावा स्रोत पर कर (टीडीएस) के अनुपालन से संबंधित नोटिस भी मिल रहे हैं। स्टार्ट-अप के लिए शुरुआती वर्षों में नकदी के लिए संघर्ष करना आम बात है। वे टीडीएस को जमा करने की समयसीमा का पालन नहीं कर पाते हैं। विभाग इस बात को गंभीरता से ले रहा है। 

जो नकदी संग्रह कर रहे हैं वे आय कर विभाग के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। कर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकारी उनसे कानून के मुताबिक काम करने की उम्मीद करते हैं। अगर किसी स्टार्टअप को टीडीएस का नोटिस मिलता है तो कंपनी के लिए सबसे अच्छा विकल्प यह है कि वह निर्धारित समयसीमा के भीतर कर मांग का भुगतान करे। अगर वह इसमें नाकाम रहती है तो कर विभाग कड़ी कार्रवाई कर सकता है। 

ट्रैवलखाना और बेबीगोगो के मामले में आय कर विभाग ने बकाया कर मांग के लिए नोटिस जारी किए थे और फिर अपने बकाये की वसूली के लिए इन कंपनियों के खाते फ्रीज कर दिए। बैंक खातों से लेनदेन पर रोक लगने के कारण इन कंपनियों के पास कोई पैसा नहीं रह गया। इन कंपनियों का क्या मामला था, इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है लेकिन कर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्टार्टअप थोड़ी सावधानी बरतें और समय पर कार्रवाई करें तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष के अंत में आय कर विभाग के अधिकारी आक्रामक हो जाते हैं क्योंकि उन्हें अपने सालाना लक्ष्य पूरे करने होते हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में करदाता ही समय पर कदम नहीं उठाते हैं जिससे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है। 

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