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कांग्रेस सरकार लेकिन अलग हैं मिजाज

संदीप कुमार /  February 12, 2019

अप्रैल 2018 में जब कमलनाथ को मध्य प्रदेश प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया तो एक सवाल हर किसी के मन में था कि क्या यह उम्रदराज लेकिन तजुर्बेकार नेता पार्टी को विधानसभा चुनाव में जीत दिला पाएगा। वह ऐसा करने में कामयाब रहे और उनकी पार्टी प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाब रही। गत वर्ष 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के तत्काल बाद उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र के वादे के मुताबिक किसानों के 2 लाख रुपये तक के कर्ज माफ कर दिए।

 

मुख्यमंत्री बनने के बाद दो महीने से भी कम समय में उनकी सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए जो जनता के हित के थे। किसान कर्ज माफी के बाद उन्होंने औद्योगिक नीति में बदलाव किया और यह सुनिश्चित किया कि 70 फीसदी से अधिक रोजगार स्थानीय युवाओं को मिलें। उन्होंने युवा स्वाभिमान योजना के अधीन शहरी युवाओं को कम से कम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करने का वादा भी किया। 

परंतु इससे इतर सरकार के कुछ शुरुआती निर्णयों में गड़बड़ी होती नजर आई। इन निर्णयों में संवाद की कमी साफ नजर आई और सरकार को अपने निर्णय बदलने भी पड़े। 

पीछे हटी सरकार 

सरकार ने पहले तो माह के पहले दिन वंदे मातरम के गायन की परंपरा को निलंबित किया लेकिन जब भाजपा ने आलोचना शुरू की तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि इस परंपरा को परिवर्तित रूप में जारी रखा जाएगा। नई सरकार ने आपातकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा के रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत बंदी बनाए गए लोगों को मिलने वाले भुगतान पर रोक लगाई। यह योजना भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई थी। भारी विरोध के बाद सरकार ने कहा कि उसने केवल उन लोगों के भौतिक प्रमाणन के आदेश दिए हैं जो अधिनियम के तहत बंदी बनाए गए थे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल योग्य उम्मीदवारों को ही पेंशन मिल रही है। 

भावांतर भुगतान योजना जिसे अब प्राइस डेफिसिट स्कीम कहा जा रहा है, उसके साथ भी यही हुआ। जिन दिनों कमलनाथ दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में शामिल होने दावोस गए हुए थे, राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि सरकार ने इस योजना को बंद करने का निर्णय लिया है क्योंकि यह किसानों के लिए नुकसानदेह है। बहरहाल, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के तीखे विरोध और कमलनाथ के हस्तक्षेप के बाद यादव ने कहा कि इस योजना की खामियों को दूर किया जाएगा और किसानों के लिए बेहतर से बेहतर योजना पेश की जाएगी। 

प्रशासनिक मोर्चा 

जैसा कि हमारे मुल्क में होता है सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बदलाव की उम्मीद जताई जा रही थी। सन 1982 बैच के आईएएस एस आर मोहंती को प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाना ऐसा ही एक कदम था। मोहंती को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। वहीं कमलनाथ और सिंह की करीबी भी किसी से छिपी नहीं है। 

एक अन्य अहम निर्णय था ऋषि कुमार शुक्ला को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के पद से हटाने का। उन्हें सरकार ने एमपी पुलिस हाउसिंग बोर्ड का प्रमुख बना दिया था। बाद में केंद्र सरकार ने उन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का प्रमुख बना कर दिल्ली बुला लिया। 

प्रशासनिक तौर पर सुस्ती से जुड़े सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक उच्चपदस्थ सूत्र ने कहा कि प्रदेश में कुल 300 से अधिक वरिष्ठï अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री को काम तो उन्हीं के साथ करना है। वह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाए। 

राजनीतिक मोर्चा 

मुख्यमंत्री कमलनाथ तकनीकी तौर पर एक अल्पमत सरकार चला रहे हैं। उन्हें कुछ निर्दलीय विधायकों और कुछ छोटे दलों के विधायकों का समर्थन मिला हुआ है। इसके बावजूद कमलनाथ अपने विरोधियों पर हमले करने में चूक नहीं रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा कांग्रेस के विधायकों को तोडऩे का प्रयास कर रही है तो उन्होंने जवाब में कहा कि कम से कम चार भाजपा विधायक उनके साथ संपर्क में हैं। सूत्रों की मानें तो कम से कम दो भाजपा विधायक विधानसभा में उनके लिए अपनी सीट खाली करने को तैयार हैं। वह जब भी भोपाल में रहते हैं तो देर रात तक अपने कार्यालय में काम करते हैं। यह उनके पूर्ववर्ती चौहान से एकदम उलट है। चौहान बहुत सीमित समय तक आफिस में बैठते थे। कमलनाथ के एक करीबी सूत्र के मुताबिक, 'उनका काम करने का तरीका कॉर्पोरेट प्रकृति का है। वह लक्ष्य तय करते हैं और उनको हासिल करने का प्रयास करते हैं।'

राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर मध्य प्रदेश की नयी सरकार की कार्य संस्कृति पर अलग नजरिया रखते हैं। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'ऐसा लगता है कि अभी सरकार धीरे-धीरे अपने पांव जमा रही है। मुझे नई सरकार भ्रमित भी लग रही है। अब तक तो वह भाजपा के एजेंडे पर ही काम करती नजर आई है, और वह भी एकदम स्पष्ट रूप से।'

उन्होंने कहा, '1100 गौशाला शीघ्र खोलने का आदेश, तीन लोगों पर कथित गौहत्या के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाना, मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना को प्रयागराज में आयोजित कुंभ के लिए विस्तारित करना, मंदिरों के पुजारियों का मानदेय तीन गुना करना कुछ ऐसे ही कदम हैं।'

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं। हम सनातन परंपरा में यकीन करने वाले लोग हैं। आपको स्मरण हो तो दो बैलों की जोड़ी और गाय का दूध पीता बछड़ा हमारे चुनाव चिह्नï रहे हैं। गाय से जुड़े मुद्दे हमेशा हमारी प्राथमिकता में थे, हैं और रहेंगे। यह भाजपा है जो गाय के नाम पर विभाजनकारी राजनीति कर रही है। 

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