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तथ्यों की जांच करेगी फेसबुक

एजेंसियां /  February 11, 2019

फेसबुक देश में आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए अपने मंच पर फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए गंभीर है और इसने सोमवार को कहा कि भारत में तथ्यों की जांच करने वाले थर्ड पार्टी को जोडऩे के दायरे में विस्तार किया जा रहा है जिसमें इंडिया टुडे समूह, फैक्टली और फैक्ट क्रेसेंडो जैसे नाम भी जुड़े हैं। लेखों की समीक्षा करने के साथ ही अमेरिकी कंपनी फेसबुक फोटो और वीडियो की जांच के लिए उपकरणों की मदद भी लेगी ताकि उसे गलत सूचना की पहचान करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिले। 

फेसबुक ने अपने एक बयान में कहा, 'इंडिया टुडे समूह, विश्वास डॉट न्यूज, फैक्टली, न्यूजमोबाइल और फैक्ट क्रेसेंडो सभी एक निष्पक्ष इंटरनैशनल फैक्ट चेकिंग नेटवर्क के साथ प्रमाणित हैं और वे फेसबुक पर तथ्यों और उनकी सत्यता की दर तय करने के लिए खबरों की समीक्षा करेंगी।' इसने कहा कि अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, तेलुगू, मलयालम और मराठी जैसी भाषाओं की सामग्री की भी समीक्षा की जाएगी। फेसबुक इंडिया के समाचार साझेदारी प्रमुख मनीष खंडूड़ी ने कहा, 'हम 2019 के आम चुनावों से पहले फेसबुक पर फर्जी खबरों के प्रसार का सामना करने लिए ज्यादा प्रतिबद्ध हैं। इसका एक तरीका यह भी है कि हम तथ्यों की जांच करने वाली थर्ड पार्टी के साथ साझेदारी बढ़ाएं। हमसे देश भर में सात साझेदार जुड़े हैं जो छह भाषाओं को कवर कर रहे हैं जो फेसबुक पर खबरों की सत्यता की जांच करने के साथ ही उसकी समीक्षा करेंगे।'

उनका कहना है कि ये सभी कोशिशें दीर्घावधि प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है क्योंकि फर्जी और भ्रामक खबरें फैलाने वाले जिस तरह की जुगत का इस्तेमाल करते हैं उनमें बदलाव आ रहा है। वह कहते हैं, 'हम लघु अवधि में कार्रवाई करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हम साझेदारी, टूल्स और तकनीक में भी निवेश करेंगे क्योंकि हमें फर्जी खबरों से आगे रहने की जरूरत है।'

आम चुनावों को देखते हुए सरकार ने भी सोशल मीडिया मंच को यह चेतावनी दी है कि अगर देश की चुनावी प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोई कोशिश होती है तब कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार भी सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव कर रही है जबकि सोशल मीडिया ऑनलाइन मंच और मेसेजिंग ऐप को ज्यादा जवाबदेह बनाया जाएगा। साथ ही उनकी यह अनिवार्यता होगी कि वे गैर कानूनी सामग्री की पहचान कर उन पर रोक लगाएं और इन पर सख्ती दिखाएं। पिछले कुछ महीने में फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसी सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने मंच पर राजनीतिक विज्ञापनों में ज्यादा पारदर्शिता लाने का वादा किया है और चुनावी रणनीति के तहत कुछ उपायों की घोषणा की है। 

फेसबुक और व्हाट्सऐप अपने मंच पर अफवाहों और फर्जी खबरों का दंश झेलती रही हैं। दोनों ही संगठनों ने इस पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनमें देश के उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील बनाने का कार्यक्रम भी शामिल है। पिछले साल अप्रैल से ही फेसबुक विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी कर रही है ताकि अपने मंच पर ऐसे पोस्ट पर नियंत्रण लगा सके। इसने बूम और समाचार एजेंसी एएफपी को भी साझेदार बनाया है। 

फेसबुक ने अपने बयान में कहा कि तथ्यों की जांच करने वाले जब किसी स्टोरी को गलत बताते हैं तब वह न्यूजफीड में सबसे नीचे दिखती है जिसकी वजह से इसके प्रसार में कमी आती है। इसकी वजह से फर्जी खबरों का प्रसार बंद होता है और इसे देखने वाले लोगों की तादाद में भी कमी आती है। जो पेज और डोमेन बार-बार फर्जी खबरों को साझा करते हैं उनके मंच पर आने वाले उपयोगकर्ताओं की तादाद भी कम होती है और इसे भुनाने तथा विज्ञापन की क्षमता भी प्रभावित होती है। 
निश्चित तौर पर इससे वित्तीय रूप से प्रेरित फर्जी खबरों का प्रसार रुकता है। फेसबुक ने कहा कि एक बार जब स्टोरी की रेटिंग फर्जी होती है तब इस मंच के वितरण में 80 फीसदी तक की कमी आती है।
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