बिजनेस स्टैंडर्ड - डी-1 और डी-3 क्षेत्रों से इस साल उत्पादन बंद करेगी आरआईएल
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डी-1 और डी-3 क्षेत्रों से इस साल उत्पादन बंद करेगी आरआईएल

शाइन जैकब / नई दिल्ली 02 11, 2019

नई रणनीति
2020 तक नए क्षेत्रों से उत्पादन शुरू होने के साथ फिर उत्पादन होगा तेज 

बिजनेस स्टैंडर्ड डी-1 और डी-3 क्षेत्रों से इस साल उत्पादन बंद करेगी आरआईएलमुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसकी साझेदार बीपी पीएलसी 6 से 9 महीने के भीतर केजी-डी 6 ब्लॉक के डी-1 और डी-3 क्षेत्रों से उत्पादन बंद कर सकती हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) को इस सिलसिले में सूचित कर दिया है। 2018 में आरआईएल ने कहा था कि उसने इसके लिए औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं, हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा नहीं तय की गई थी। 

एक निवेशक प्रस्तुति के दौरान उसने कहा था कि भारत सरकार द्वारा जारी साइट रेस्टोरेशन गाइडलाइंस का अनुपालन करते हुए आरआईएल ने मौजूदा उत्पादक क्षेत्रों (डी-1, डी-2 और एमए) को लेकर आरआईएल ने इस क्षेत्र में गतिविधियां बंद करने के लिए बैंक गारंटी पेश की है। बाद में मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि एमए उत्पादन अक्टूबर 2018 तक खत्म होने को था। अधिकारी ने कहा कि 3 नई खोजें कंपनी की किस्मत बहाल करने जा रही हैं क्योंकि यह उम्मीद की जा रही है कि इन क्षेत्रों में से करीब 3 करोड़ मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन उत्पादन 2021-22 तक शुरू हो जाएगा। 

आरआईएल द्वारा केजी-डी6 में 19 तेल व गैस खोजों में से एमए में 2008 में काम शुरू हुआ था और धीरूभाई-1 और 3 (डी-1 और डी-3) क्षेत्रों में अप्रैल 2009 में उत्पादन शुरू हुआ। बीपी पीएलसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और भारत प्रमुख शशि मुकुंदन ने बिजनेस स्टैंडर्ड  को संकेत दिए कि केजी बेसिन में जल्द ही फिर काम तेज हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'नए क्षेत्रों से पहला उत्पादन 2020 से शुरू होने की संभावना है। इसके लिए ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।' कंपनियां उम्मीद कर रही हैं कि केजी डी-6 ब्लॉक की 3 परियोजनाओं की तीन परियोजनाएं जिनमें आर सिरीज, सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे (डी55) शामिल हैं, केजी बेसिन के लिए परिवर्तनकारी साबित होंगी। 

इन तीन परियोजनाओं में कुल मिलाकर करीब 3 अरब घन फुट डिस्कवर्ड गैस संसाधन है, जहां कंपनियां करीब 40,000 करोड़ रुपये निवेश कर रही हैं। आरआईएल द्वारा संचालित तेल व गैस ब्लॉकों में भारत में बीपी ने 2011 में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ली थी। उसके बाद से दोनों कंपनियों ने करीब 2 अरब डॉलर निवेश किया है। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में मुकुंदन ने कहा है कि भारत में रिटेल का खाका तैयार करने के लिए कंपनी टिकाऊ योजना पर काम कर रही है। बीपी को भारत में 3,500 पेट्रोल पंप बनाने के लिए लाइसेंस मिला है। बहरहाल इस राह में बड़ी चुनौती सरकारी तेल कंपनियों का दबदबा है। 

भारत में कुल 64,050 पेट्रोलपंपों में से 27,459 इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के, 15,357 हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के और 14,651 पेट्रोल पंप भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के हैं। निजी कंपनियों में नयारा के 5,033, रिलायंस इंडस्ट्रीज के 1,400, शेल के 144 और अन्य छोटे कारोबारियों के 6 पेट्रोल पंप हैं। 
Keyword: Mukesh Ambani, RIL, BP PLC, DGH, Hidrocarbon Directorate,
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