बिजनेस स्टैंडर्ड - एस्सार: बिक्री का रास्ता साफ
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एस्सार: बिक्री का रास्ता साफ

आशिष आर्यन और विनय उमरजी / नई दिल्ली/अहमदाबाद 02 11, 2019

उच्चतम न्यायालय ने खारिज की याचिका

एस्सार का 'दिवालिया' सफर
2018
फरवरी : आर्सेलरमित्तल, न्यूमेटल ने लगाई बोली
मार्च : खारिज हुईं दोनों कंपनियों की बोलियां
अप्रैल : दोनों कंपनियों ने फिर लगाई बोली
सितंबर : न्यूमेटल की बोली को इजाजत, आर्सेलर से बकाया निपटाने को कहा
अक्टूबर : बकाया चुकाने पर दोनों कंपनियां पात्र

2019

जनवरी : एनसीएलटी ने 54,000 करोड़ रुपये भुगतान कर सभी बकाया चुकाने की एस्सार स्टील की योजना  खारिज की
फरवरी : उच्चतम न्यायालय ने आर्सेलर मित्तल की बोली पर फैसला होने से पहले ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की बोली याचिका की खारिज

बिजनेस स्टैंडर्ड एस्सार: बिक्री का रास्ता साफउच्चतम न्यायालय ने कर्ज में फंसी एस्सार स्टील लिमिटेड के 28 परिचालन ऋणदाताओं की याचिका को आज खारिज कर दिया। इसमें मांग की गई थी कि आर्सेलरमित्तल की बोली पर कोई फैसला लिए जाने से पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में उनका पक्ष सुना जाए। शीर्ष अदालत ने साथ ही परिचालन ऋणदाताओं की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पंचाट ने एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ से कहा था कि वह 11 फरवरी तक आर्सेलरमित्तल की बोली पर फैसला करे।

न्यायालय ने कहा कि एस्सार स्टील के प्रवर्तक दिवालिया प्रक्रिया में देरी के लिए परिचालन ऋणदाताओं और छद्म लोगों के जरिये काम कर रहे हैं। कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को शुरू हुए 571 दिन हो चुके हैं और इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए। दिवालिया प्रक्रिया की समयसीमा 270 दिन है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और गुजरात सरकार जैसे परिचालन साझेदारों ने क्रमश: 3,500 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये के बकाये के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने कहा कि एनसीएलएटी ने भी कहा है कि परिचालन ऋणदाताओं के केवल एक ही प्रतिनिधि को एस्सार स्टील पर आर्सेलरमित्तल की समाधान योजना पर कोई भी आपत्ति जताने का मौका दिया जा सकता है। न्यायालय के आज के आदेश के बाद एनसीएलटी के आर्सेलरमित्तल की बोली पर फैसला लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ ने परिचालन ऋणदाताओं द्वारा आर्सेलरमित्तल की बोली पर उठाई गई आपत्तियों पर आज अपना आदेश सुरक्षित रखा और परिचालन ऋणदाताओं को 13 फरवरी तक अपना आवेदन लिखित में देने को कहा। एस्सार स्टील के ऋणदाताओं की समिति ने इससे पहले एनसीएलटी में तर्क दिया था कि जिन परिचालन ऋणदाताओं का एक करोड़ रुपये से कम बकाया है उन्हें कुल मिलाकर 196 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि जिनका एक करोड़ रुपये से अधिक बकाया है उन्हें सांकेतिक राशि के रूप में एक रुपया मिलेगा। अगर एस्सार स्टील का परिसमापन होता तो परिचालन ऋणदाताओं को कुछ नहीं मिलता। ऐसे में उनके लिए आर्सेलरमित्तल की 42,000 करोड़ रुपये की बोली सर्वश्रेष्ठï विकल्प थी।

Keyword: Supreme Court, SC, Essar Steel, NCLAT, NCLT, Debt, Lender, IOCL, Arcelormittal, Resolution,
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