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फर्जी प्रोफाइल पर ट्विटर की सक्रियता, लग रही लगाम

नेहा अलावधी /  02 10, 2019

फर्जी प्रोफाइल का सिरदर्द

आईआईआईटी दिल्ली के मुताबिक 2014 के दौरान इस्तेमाल किए गए केवल 32 फीसदी ट्विटर हैंडल ही सक्रिय
नवंबर में ट्विटर के फर्जी प्रोफाइल खत्म करने के अभियान से मोदी के एक लाख फॉलोअर घटे जबकि राहुल गांधी के 9,000 फॉलोअर घटे

बिजनेस स्टैंडर्ड फर्जी प्रोफाइल पर ट्विटर की सक्रियता, लग रही लगामदेश में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को देखते हुए ट्विटर की चिंताएं बढ़ी हैं और फर्जी प्रोफाइल की समस्या भी बढ़ रही है। राजनीतिक नेताओं के ट्विटर प्रोफाइल के एक स्वतंत्र अध्ययन में अंदाजा मिला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई अन्य नेताओं के हजारों फॉलोअर को नवंबर के बाद इस माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने फर्जी प्रोफाइल करार दिया। इस प्रक्रिया में मोदी के करीब एक लाख ट्विटर फॉलोअर कम हो गए जबकि राहुल गांधी के 9000 ट्विटर फॉलोअर कम हुए। 

ट्विटर इंडिया ने पिछले साल जुलाई में कुछ ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई थी जिससे प्रधानमंत्री के करीब तीन लाख फॉलोअर की तादाद कम हो गई थी। इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, दिल्ली (आईआईआईटी दिल्ली) द्वारा कराया गया अध्ययन सोशल मीडिया पर 2014-2019 के आम चुनावों के बीच के पैटर्न के अध्ययन का एक बड़ा हिस्सा है। इसने देश के करीब 925 राजनीतिक ट्विटर हैंडल का विश्लेषण किया है जिनमें ट्विटर पर मौजूद सभी राजनीतिक दलों और देश की राजनीतिक हस्तियों के यूजर अकाउंट शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के अलावा नवंबर में जिन अन्य हस्तियों के फॉलोअर की तादाद कम हुई इनमें गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर शामिल हैं। इसके मुताबिक जब अध्ययन शुरू हुआ था तब इस रुझान से संकेत मिले कि ज्यादातर बड़े राजनीतिक नेताओं के फॉलोअर में नवंबर की गिरावट को छोड़कर अगस्त-सितंबर के बीच अब तक लगातार बढ़ोतरी हुई है। 

आईआईआईटी दिल्ली और हैदराबाद के प्रोफेसर पोन्नुरंगम कुमारगुरु कहते हैं, '2014 के विश्लेषण के साथ तुलना करना जल्दबाजी होगी लेकिन कुछ शुरुआती रुझान दिलचस्प हैं। मिसाल के तौर पर ट्विटर पर राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी इस वक्त काफी ज्यादा है। हम जिन 925 ट्विटर अकाउंट का विश्लेषण कर रहे हैं उनमें से 500 से अधिक सत्यापित अकाउंट हैं। ऐसा 2014 में नहीं था।' 

इस अध्ययन में कुछ और दिलचस्प रुझान भी दिखे। मिसाल के तौर पर 2014 के आम चुनावों के दौरान करीब 10 लाख ट्विटर हैंडल द्वारा 2.1 करोड़ पोस्ट किए गए। इनमें से केवल 31.64 फीसदी ट्विटर हैंडल ही अभी सक्रिय हैं। संस्थान ने सक्रिय अकाउंट उन अकाउंट को बताया है जिनसे 2018 में कम से कम एक ट्वीट किया गया। ज्यादातर देशों में इस मंच पर दुव्र्यवहार को नियंत्रित करने की वजह से इसकी आलोचना की जाती है और ट्विटर ने पिछले साल इस मंच पर फर्जी प्रोफाइल खत्म करने की शुरुआत कर दी थी।

जुलाई में ट्विटर ने घोषणा की थी कि यह फर्जी प्रोफाइल को खत्म करने की प्रक्रिया जारी रखेगी। प्रधानमंत्री मोदी के करीब 3 लाख फॉलोअर कम हुए और यह उन शीर्ष प्रोफाइल में शामिल है जिनके बड़ी तादाद में फॉलोअर कम हुए। नवंबर में इसने कुछ फर्जी प्रोफाइल बंद किए लेकिन इसकी कोई घोषणा नहीं की थी। इसी वजह से कई सेलेब्रिटी अकाउंट के फॉलोअर कम हुए। ट्विटर के अपने अकाउंट से इस बार 24 लाख फॉलोअर कम हुए। आईआईआईटी-दिल्ली ने अपने अध्ययन में इस डेटा को शामिल किया है। 

ट्विटर पिछले हफ्ते दक्षिणपंथी राजनीतिक ट्विटर हैंडल्स के खिलाफ अपने कथित राजनीतिक पक्षपात की वजह से विवादों में फंसा। 3 फरवरी को ट्विटर इंडिया के कार्यालय के बाहर यूथ फॉर सोशल मीडिया डेमोक्रेसी नाम के संगठन ने धरना प्रदर्शन करते हुए कंपनी से कहा कि वह कंटेंट को हटाने या उसे ब्लॉक करने की अपनी नीति में बदलाव करे। हाल में कंपनी अपने शीर्ष अधिकारियों की वजह से खबरों में रही है और इसके सीईओ ने 7 फरवरी को सोशल/ऑनलाइन न्यूज मीडिया मंच पर नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी मामलों के लिए संसदीय समिति के सामने पेश होने से इनकार कर दिया। समिति ने सोमवार को सुनवाई की तारीख तय की है। 

इस बीच ट्विटर ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। ट्विटर के पब्लिक पॉलिसी के वैश्विक उपाध्यक्ष कॉलिन क्रोवेल कहते हैं, 'ट्विटर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अपनी नीतियों को लागू नहीं करता है और न ही यह उसकी प्राथमिकता है। प्रत्येक ट्विट और अकाउंट को निष्पक्ष तरीके से देखा जाता है। हम अपनी नीतियों को न्यायोचित और उचित तरीके से लागू करते हैं। अगर कोई गलत सकारात्मक फैसला होता भी है तब यह राजनीतिक इरादे से नहीं होता है बल्कि यह मानवीय भूल हो सकती है क्योंकि तेज रफ्तार वाली तकनीक के बीच काम करना होता है।' पिछले साल अक्टूबर में ट्विटर ने फर्जी प्रोफाइल के मामले में कहा था कि यह चुराए हुए फोटो, कॉपी किए हुए प्रोफाइल की छंटनी करेगी और जो इसका इस्तेमाल इरादतन भ्रामक प्रोफाइल सूचनाओं और स्थानों के लिए कर रहे हैं।

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