बिजनेस स्टैंडर्ड - जब रोबोट बनाएगा आपका खाना
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जब रोबोट बनाएगा आपका खाना

पीरजादा अबरार /  February 10, 2019

अगर आपका खाना एक रोबोट बनाए तो क्या आपको आश्चर्य होगा? शायद आपकी सोच से पहले ही ऐसा दिन आ जाएगा। जब आप अगली बार इंटरनेट रेस्टोरेंट कंपनी रिबेल फूड्स से चिकन बिरयानी ऑर्डर करें तो इस बात की काफी संभावना है कि उसे एक रोबोट ने बनाया हो। फासोस और बेहरोज बिरयानी जैसे ब्रांड के लिए प्रसिद्ध मुंबई की कंपनी अपनी क्लाउड रसोई के नेटवर्क को स्वचलित बनाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और रोबोटिक्स के उपयोग की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी का उद्देश्य ना सिर्फ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर बनाना है बल्कि कंपनी इसके जरिये मानव बल में कमी करके मानव की गलतियों को कम करने की योजना बना रही है। रिबेल फूड्स के मुख्य तकनीकी अधिकारी सौम्यदीप बर्मन कहते हैं, 'हम ऐसे रोबोट बना रहे हैं जो मिनट के अंदर आपके लिए डोसा जैसे खाद्य पदार्थ तैयार कर सके। ये एआई और इंटरनेट समर्थित उपकरण होंगे जिनमें हम खाना बनाने की रेसिपी डालेंगे।'

रिबेल फूड्स भारत में फूड-टेक क्षेत्र की ऐसी कंपनियों में शामिल है जो एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से अपनी प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने पर काम कर रही है। इस प्रक्रियाओं में मांग का अनुमान लगाना, ग्राहकों की वरीयताओं को समझना, खाना तैयार करना और कम से कम समय में खाना पहुंचाना शामिल है। 

शोध एवं सलाहकार संस्था रेडसिअर कंसल्टिंग के अनुसार भारत में ऑनलाइन खाना ऑर्डर तथा डिलिवरी बाजार 45 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर से बढ़ेगा और वर्ष 2023 तक इसका सकल कारोबरी मूल्य (जीएमवी) 11 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। अधिकांश कंपनियां गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही हैं जिससे बाजार के बड़े हिस्से में पहुंच बनाई जा सके।  रिबेल फूड्स की स्थापना जयदीप बर्मन और कलोल बनर्जी ने की थी और कंपनी भारत के 16 शहरों में करीब 1,100 ऑनलाइन रेस्टोरेंट और 176 क्लाउड रसोई चलाती है। क्लाउड रसोई एक ऐसा प्लेटफॉर्म होता है जहां बैठकर खाने की सुविधा नहीं होती और वे केवल ऑनलाइन ही खाने का ऑर्डर लेते हैं।

रिबेल फूड्स की रसोइयों में कई प्रक्रियाएं अभी भी स्वचालित हैं। जैसे, मसाला पनीर टिक्का डिश के लिए 30 मशीन लर्निंग टैग उपलब्ध हैं जिसके माध्यम से ग्राहकों की वरीयताओं (तेल का स्तर, कैलरी और हर्बल आदि) को वर्गीकृत किया जा सकता है। साथ ही, मशीन लर्निंग की सहायता से रसोई किसी समय और स्थान के लिए ऑर्डर की कुल संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है और रसोई में संसाधनों को इस हिसाब से प्रबंधित किया जा सकता है। 

मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की मदद से कंपनी ने 'बचे हुए भोजन' के स्तर में 60-70 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। वहीं, मांग का अनुमान लगाने से डिलिवरी समय में 20-30 प्रतिशत की कमी आई है। फूड डिलिवरी फर्म स्विगी भी अपनी प्रणाली स्वचालित करने में लगी है। कंपनी एआई समर्थित प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है जिससे मांग और डिलिवरी की प्रक्रिया बेहतर बनाई जा सके। इसका एक नवोन्मेष 'सूचीबद्ध करना' है, जहां मशीन लर्निंग की सहायता से शाकाहारी, मांसाहारी और अंडा खाने वालों का अपने आप वर्गीकरण हो जाएगा।

कंपनी ग्राहकों को सुझाव देने के लिए भी नई तकनीक का उपयोग कर रही है। स्विगी में इंजीनियरिंग और एआई तकनीक प्रमुख डेल वाज कहते हैं, 'यह कुछ इस तरह है जैसे नेटफ्लिक्स आपके द्वारा देखी गई फिल्म के आधार पर आपको दूसरी फिल्मों का सुझाव देता है। उदाहरण के लिए, अगर आप बहुत अधिक पनीर ऑर्डर कर रहे हैं तो मैं आपको पनीर से बनी और डिश दिखाऊंगा।' वाज स्विगी को 'एआई-प्रथम कंपनी' बनाने के काम पर लगे हैं। 

कंपनी के सक्रिय डिलिवरी पार्टनर की संख्या 1.20 लाख के करीब है। इन सहयोगियों के मोबाइल लागातार स्विगी के सर्वर पर अपनी लोकेशन साझा करते रहते हैं और स्विगी उनके रेस्टोरेंट पहुंचने के समय से लेकर खाना बनने में लगने वाला समय और ग्राहक के पास सामान पहुंचने के समय की गणना मशीन लर्निंग के सहारे करती है। इनके आधार पर स्विगी का सिस्टम खाना पहुंचाने वाले के लिए सबसे अच्छा रास्ता बताता है और सबसे कम समय में खाना पहुंचाने का प्रयास करता है। इस तकनीक के सहारे स्विगी मौसम परिस्थितियों, यातायात का स्थिति और सड़क निर्माण जैसे कारकों के चलते डिलिवरी में लगने वाले समय की गणना भी करती है।

वाज कहते हैं, 'हम जोन स्तर पर आंकड़े संग्रहीत करते हैं जिससे हम डिलिवरी समय पर होने वाले प्रभावों की गणना कर सकें।' वह बताते हैं कि मशीन लर्निंग की सहायता से सामान पहुंचाने वालों के वेटिंग समय में 23 प्रतिशत की कमी आई है और समयबद्ध डिलिवरी में 50 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

स्विगी बेंगलूरु में एआई शोध लैब स्थापित कर रही है जो वॉइस और कंप्यूटर विजन तकनीकों पर काम करेगी। कुछ दिन पहले ही स्विगी ने अपनी भर्ती प्रक्रिया के लिए बेंगलूरु स्थित एआई स्टार्टअप किंट.आईओ का अधिग्रहण किया है। वाज कहते हैं कि भविष्य में वॉइस और कंप्यूटर विजन इस बात में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि ग्राहकों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में स्विगी पर खाना ऑर्डर करना सुविधाजनक हो। वह बताते हैं, 'इसलिए, जब आप सुबह सोकर उठेंगे और कहेंगे, 'हे स्विगी, मुझे नाश्ता चाहिए', तो आपके पास नाश्ता पहुंच जाएगा।'

स्विगी की प्रतिस्पर्धी जोमेटो भी एआई, मशीन लर्निंग तथा डेटा एनालिटिक्स तकनीक मेंं काफी निवेश कर रही है। 24 देशों में 14 लाख रेस्टोरेंट की जानकारी वाली स्विगी ड्रोन आधारित डिलिवरी तकनीक तैयार कर रही है। कंपनी का विचार मल्टी-रोटर ड्रोन के जरिये एक हब-टू-हब डिलिवरी नेटवर्क तैयार करना है। जोमेटो ने दिसंबर 2018 में लखनऊ  की ड्रोन स्टार्टअप टेकईगल इनोवेशन का अधिग्रहण किया है। पहले चरण में कंपनी 5 किलो से कम वजनी सामान पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक पर काम कर रही है। जोमेटो के चीफ टेक्नोक्रेट गुंजन पाटीदार दावा करते हैं कि भारत में डेटा प्लेटफॉर्म, एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस में शुरुआती निवेश से कारोबार के विभिन्न पहलुओं में बहुत लाभ होगा। फूड-टेक कारोबार में एआई और रोबोटिक्स क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं और ग्राहक जरूर जानना चाहेंगे कि वे कब रोबोट के हाथ से बने खाने का स्वाद चखेंगे। 

Keyword: Swiggy, Zomatto, Robot, Rrestaurent, Company, Mumbai, Robotics,
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