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दर घटने से वाहन कंपनियों, एनबीएफसी को मिलेगी मदद

श्रीपाद ऑटे और राम प्रसाद साहू /  February 10, 2019

मौद्रिक नीति समिति द्वारा गुरुवार को रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती से ब्याज दर संवेदी क्षेत्रों पर सकारात्मक असर दिखने की संभावना है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों पर असर अलग अलग दिखने की संभावना है, लेकिन लाभार्थियों में वाहन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) मुख्य रूप से शामिल हैं। रेनेसां इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के पंकज मुरारका का कहना है कि दर कटौती से वाहन जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ाने मे मदद मिलेगी, जो बढ़ती ईंधन कीमतों, ऊंची दरों और ज्यादा उत्पाद लागत की वजह से सुस्त बनी हुई है। 

जहां दोपहिया और यात्री वाहन मांग में अगले कुछ महीनों के दौरान तेजी आने की संभावना है, वहीं वाणिज्यिक वाहन बिक्री में तेजी निवेश चक्र और खपत बढऩे से ही दिखेगी। यह आश्चर्यजनक नहीं है कि बाजार सपाट रहने के बावजूद वाहन शेयरों में 1 से 6 फीसदी के बीच तेजी आई है। रियल्टी सेगमेंट में संरचनात्मक दबाव को देखते हुए इस सेक्टर में बदलाव आने में कुछ समय लगेगा और यह रोजगार सृजन तथा कुल वृद्घि से जुड़ा हुआ है। इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का मानना है कि कम ब्याज दरों से रियल्टी जैसे क्षेत्रों को फायदा नहीं मिल सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में मंदी की स्थिति है और मांग कमजोर बनी हुई है।

आरबीआई की दर कटौती के मुख्य लाभार्थियों में से एक एनबीएफसी हो सकती हैं। देयताओं में बैंकिंग ऋण की ज्यादा भागीदारी को देखते हुए दर कटौती से ज्यादातर एनबीएफसी को मदद मिलेगी। वहीं बेहतर रेटिंग और उपभोक्ता सेगमेंट पर केंद्रित कंपनियां को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। यह आरबीआई द्वारा कई एनबीएफसी को बैंक उधारी के लिए जोखिम भारांक मौजूदा 100 प्रतिशत से घटाए जाने के निर्णय की वजह से संभव होगा। मणप्पुरम फाइनैंस, मुथूट फाइनैंस, और एमएएस फाइनैंशियल सर्विसेज जैसी कई एनबीएफसी के शेयर गुरुवार को 7-8 प्रतिशत चढ़ गए। इन कंपनियों की निवेश ग्रेड रेटिंग आईसीआरए द्वारा निर्धारित रेटिंग से ऊपर है।

मौद्रिक नीति अंतरिम बजट की पूरक है। शेयरखान के शोध प्रमुख गौरव दुआ का कहना है, 'मौद्रिक नीति से केंद्रीय बजट में 1 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय प्रोत्साहन को बढ़ावा मिला है और इससे खपत मांग मजबूत होगी। हम कंज्यूमर फाइनैंस कंपनियों पर सकारात्मक हैं।' इससे इस सेगमेंट की कंपनियों की ऋण बुक को कवर किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, कंज्यूमर सेगमेंट का दिसंबर 2018 में बजाज फाइनैंस की कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों में 40 प्रतिशत योगदान था। 

एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि कम जोखिम भारांक से इन एनबीएफसी को मदद मिलेगी, क्योंकि उनका जोखिम भारांक पहले के 100 प्रतिशत की तुलना में अब 20-50 प्रतिशत पर है। जहां तक अन्य परिसंपत्ति और इन्फ्रास्ट्रक्चर-आधारित वित्तीय कंपनियों का सवाल है, जोखिम भारांक पहले ही उनके रेटिंग प्रोफाइल से जुड़ा हुआ है।

कम जोखिम भारांक से बैंकों की पूंजी को स्वतंत्र बनाने में मदद मिल सकती है जिससे वे और ज्यादा उधारी देने में सक्षम होंगी। इंडिया रेटिंग्स में बीएफएसआई के प्रमुख प्रकाश अग्रवाल का कहना है, 'एक खास श्रेणी के लिए जोखिम भारांक में कमी से बैंकों को कम पूंजी मुहैया कराने की जरूरत होगी। इससे उन्हें अपनी कुल एनबीएफसी सीमा के अंदर इन एनबीएफसी को उधारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।' इसे केंद्रीय बैंक द्वारा एनबीएफसी के लिए बैंकों की उधारी पिछले साल अक्टूबर के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के निर्णय से भी मदद मिलेगी। 

आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2018 तक एनबीएफसी को बैंकिंग उधारी में सालाना आधार पर 55 प्रतिशत की वृद्घि के बाद भी कुल बैंक ऋण में एनबीएफसी की भागीदारी 7 प्रतिशत पर बनी रही। इससे एनबीएफसी के लिए ऋण प्रवाह में और सुधार लाए जाने की गुंजाइश का पता चलता है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि जोखिम वाली एनबीएफसी को इसका फायदा मिलेगा। इसके अलावा, आईएलऐंडएफएस घटनाक्रम के बाद, बैंक ऋण जोखिम का किस तरह से आकलन करते हैं, इस पर ध्यान देने की जरूरत होगी। अग्रवाल के अनुसार, इन एनबीएफसी को क्रेडिट रेटिंग और बैंकों के आंतरिक आकलन के आधार पर बैंकों से ब्याज दर पर लाभ मिलने की संभावना है। 

Keyword: Monetary policy, NBFC, JOB, Fuel, Bike, Market,
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