बिजनेस स्टैंडर्ड - सेबी के पास पहुंची रिलायंस पावर
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सेबी के पास पहुंची रिलायंस पावर

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 02 10, 2019

शेयर टूटने से परेशान रिलायंस समूह

सेबी को यह पत्र 6 फरवरी को लिखा गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एडलवाइस समूह ने बाजार कीमत से कम पर काफी बड़े बिक्री ऑर्डर लगाए, जिसने शेयर कीमतों में भारी गिरावट में योगदान किया

एडलवाइस और एलऐंडटी फाइनैंंस ने किसी तरह की गलत हरकत से इनकार किया है और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए ये दोनों कंपनियां सेबी से संपर्क करने की योजना बना रही हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड सेबी के पास पहुंची रिलायंस पावररिलायंस पावर ने बाजार नियामक सेबी को सख्त लहजे में पत्र लिखकर एडलवाइस समूह को प्रतिभूति बाजार में ट्रेडिंग से रोकने का अनुरोध किया है, जिसकी वजह से दो दिनों में इसका शेयर 57 फीसदी टूट गया। कंपनी ने रिलायंस समूह के शेयरों पर पड़ी चोट के मामले की जांच की मांग नियामक से की है, जिसमें डीलिंग रूम के रिकॉर्ड की जांच (ब्रोकिंग फर्मों के सभी व्यक्तियों के फोन कॉल व एसएमएस की जांच, जहां बिक्री के ज्यादातर सौदे हुए) शामिल है। 

सेबी को यह पत्र 6 फरवरी को लिखा गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एडलवाइस समूह ने मौजूदा बाजार कीमत से कम पर काफी बड़े बिक्री ऑर्डर लगाए, जिसने शेयर कीमतों में भारी गिरावट में काफी योगदान किया।रिलायंस पावर ने यह भी कहा है कि इसने बिकवाली इस तरह से की, जो न सिर्फ नकदी में बल्कि डेरिवेटिव में भी बेतरतीब तरीके से हुई। इस तरह से रिलायंस पावर के शेयरों पर जानबूझकर चोट पहुंचाई गई।

रिलायंस पावर के 31 लाख शेयरधारक हैं और कंपनी पर 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। आर पावर के प्रवर्तकों ने कंपनी के शेयरों को गिरवी रखकर कर्ज लिया था, जिसमें एडलवाइस समूह भी है। अपने पत्र में रिलायंस पावर ने कहा है, भुगतान में कोई चूक नहीं हुई है, लेकिन मार्जिन में कमी आदि के चलते एडलवाइस की इकाइयों ने रिलायंस पावर के गिरवी शेयर बाजार में बेच दिए। रिलायंस समूह के प्रवक्ता ने इस पर कहा, समूह की विभिन्न कंपनियों के निदेशक मंडल के विचार के बाद हम अपने सभी हितधारकों की सुरक्षा व उनकी वैल्यू में इजाफे के लिए जरूरी कानूनी कदम उठाएंगे, जिसमें नियामकों के पास मामला उठाया जाना शामिल है। लेनदारों की तरफ से इसी तरह गिरवी शेयरों की बिकवाली की तुलना करते हुए पत्र में कहा गया है, अन्य कॉरपोरेट हाउस मसलन एस्सेल समूह, सुजलॉन समूह, आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि के साथ भी ऐसा ही गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया गया है।

इस पत्र में कुछ प्रमुख नियमों का न्यायिक स्थिति के आधार पर कानूनी विश्लेषण भी किया गया है। इसमें कहा गया है, अनुचित व्यापार व्यवहार एकल परिभाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मामले दर मामले के आधार पर मध्यस्थता की दरकार होती है। इसमें कहा गया है, व्यापार व्यवहार तब अनुचित बन जाता है जब यह व्यवहार कारोबारी लेनदेन से जुड़े पक्षकारोंं के बीच नैतिक मानकों व अच्छे भरोसे का अवमूल्यन करता हो।

सेबी को अंबानी का पत्र तब लिखा गया जब इसकी समूह की कंपनियों के शेयर इस खबर के बाद टूटे कि समूह को पुनर्गठन योजना में भेज दिया गया है, जिसमें एनसीएलटी में इसकी दूरसंचार कंपनी आरकॉम की बिक्री शामल है क्योंकि लेनदारों की समिति में शामिल विभिन्न बैंकों के बीच सौदे पर आमसहमति नहीं बन पाई।

एडलवाइस और एलऐंडटी फाइनैंस की तरफ से की गई गिरवी शेयरों की बिकवाली पर रिलायंस समूह ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया, लेकिन दोनों लेनदारों ने किसी तरह की गलत हरकत से इनकार किया है और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए ये दोनों कंपनियां सेबी से संपर्क करने की योजना बना रही हैं।

Keyword: Reliance, NCLT, L&T, Reliance power, SEBI, Broking Firm,
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