बिजनेस स्टैंडर्ड - चीनी मिलों पर सरकार की सख्ती
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चीनी मिलों पर सरकार की सख्ती

दिलीप कुमार झा / मुंबई 02 07, 2019

दर्जनों चीनी मिलें निशाने पर

फैक्टरी से लेकर भंडारगृहों तक की चीनी जब्त करने की योजना बना रही राज्य सरकार
मौजूदा पेराई सीजन में चार महीने की अवधि के दौरान कई टन गन्ना पेराई केबावजूद कई मिलों ने नही किया गन्ना भुगतान
मिलों ने किसानों को नकदी के बदले चीनी देने का रखा था प्रस्ताव, लेकिन बाद में इसे टाल दिया

बिजनेस स्टैंडर्ड चीनी मिलों पर सरकार की सख्तीकेंद्र से राहत की उम्मीद के बीच महाराष्ट्र में गन्ना भुगतान में जानबूझकर चूक करने वाली दर्जनों चीनी मिलों से परेशान राज्य सरकार फैक्टरी से लेकर भंडारगृहों तक प्रणालीगत चीनी जब्त करने की योजना बना रही है। चीनी मिलों ने खासतौर पर कोल्हापुर और सांगली की मिलों ने किसानों को नकदी के बदले चीनी देने की पेशकश की थी। हालांकि बाद में मिलों ने कहा कि उन्हें मौजूदा स्टॉक से चीनी नहीं देंगी बल्कि वह चीनी देंगी जिसका उत्पादन अब शुरू किया जाएगा। इस वजह से राज्य के अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई पर विचार करना पड़ा।

मौजूदा पेराई सीजन (अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले) में चार महीने की अवधि के दौरान कई टन गन्ना पेराई करने केबावजूद महाराष्ट्र में बहुत-सी सहकारी और निजी चीनी मिलों ने गन्ने का बकाया भुगतान नहीं किया है। इससे गन्ना किसानों और चीनी मिलों को नियंत्रित करने वाले गन्ना (नियंत्रण) आदेश-1966 का उल्लंघन होता है। इस कानून के अंतर्गत चीनी मिलों को खरीद के समय गन्नामूल्य का 20 प्रतिशत भुगतान करना होता है और शेष राशि 14 दिनों में चुकानी पड़ती है। इसमें असफल रहने पर 15 प्रतिशत का ब्याज लगता है। उद्योग के सूत्रों का अनुमान है कि महाराष्ट्र में सहकारी और निजी मिलों समेत सात मिलों ने एक भी पैसा नहीं दिया है जबकि करीब 40 मिलों ने उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का 20 प्रतिशत से भी कम अदा किया है।

महाराष्ट्र सरकार के चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने कहा, 'महाराष्ट्र में कई मिलों ने सार्वजनिक नोटिस जारी किए हैं जिसमें किसानों से 6 फरवरी से प्रभावी सात दिनों के अंदर स्थानीय कृषि सर्कल कार्यालयों में अपनी मांग दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है। हम यह अवधि समाप्त होने का इंतजार करेंगे। इसके बाद हम फैक्टरी केगेट से भंडारगृह तक जाने वाली चीनी जब्त कर लेंगे जिसे बाद में केंद्र द्वारा निर्धारित मूल्य यानी 29 रुपये प्रति किलोग्राम पर नीलाम किया जाएगा।'

दिलचस्प बात यह है कि बढ़ते बकाये की वजह से किसान भुगतान की मांग कर रहे हैं। लेकिन मिलें प्राय: यह कहती हैं कि कार्यशील पूंजी जुटाने के लिए उन्होंने पूरा स्टॉक बैंकों के पास गिरवी रख दिया है। अकेले महाराष्ट्र में ही गन्ना बकाया बढ़कर करीब 5,000 करोड़ रुपये होने से किसान और मिलें परेशान हैं। किसानों की ओर से दबाव का सामना करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने जिलाधीशों को चूककर्ताओं पर सख्ती करने का निर्देश दिया है। गायकवाड़ ने कहा कि हमेशा ऐसा नहीं होता है कि पूरा स्टॉक बैंकों के पास गिरवी हो। यह मानकर कि मौजूदा पूरा स्टॉक बैंकों के पास रखा हुआ है, हम गन्ना किसानों का भुगतान कराने के लिए प्रणालीगत चीनी को लक्ष्य बना रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार कोल्हापुर और सांगली जिलों की मिलों को अपना लक्ष्य बना रही है जहां बकाया काफी बढ़ गया है। इस बीच मिलों ने किसानों को बकाये के पैसे के बदले चीनी लेने का प्रस्ताव रखा है। इसके बाद गुरुवार को कोल्हापुर और पुणे जिलों में हजारों किसान फैक्टरी के गेट पर पहुंच गए ताकि गन्ना बकाया भुगतान के बदले मिलों द्वारा दिए गए प्रस्ताव के अनुसार चीनी हासिल कर सकें। लेकिन मिलों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भुगतान की बाधा के कारण चीनी देने से मना कर दिया। पांच प्रतिशत जीएसटी कौन अदा करेगा इस बात पर मिलों और किसानों की बीच काफी गरमा-गरम बहस हुई। जहां एक ओर मिलें अपना स्टॉक 29 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचना चाहती थीं, वहीं दूसरी ओर किसान उत्पाद शुल्क दुरुस्त करने के लिए चाहते थे कि चीनी के दाम कम बोले जाएं।
Keyword: sugar, farmer, mills,,
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