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दिवालिया प्रक्रिया में जाना आरकॉम की सही मंशा नहीं

आशिष आर्यन / नई दिल्ली February 06, 2019

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक ताजा अवमानना याचिका में एरिक्सन इंडिया ने कहा है कि आरकॉम द्वारा दिवालिया प्रक्रिया का विकल्प चुनना सही मंशा नहीं है।  इस मामले के करीबी सूत्रों ने बताया कि एरिक्सन का मानना है कि आरकॉम ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से बचने के लिए जानबूझकर ऐसा किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आरकॉम को निर्देश दिया था कि वह 15 दिसंबर तक एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करे। सूत्रों ने कहा कि आरकॉम द्वारा स्वैच्छिक तौर पर कंपनी को बंद करने के लिए दायर आवेदन का उद्देश्य ऋण स्थगन हासिल करना है ताकि उसे एरिक्सन सहित सभी लेनदारों को कोई भुगतान न करना पड़े।
 
आरकॉम ने 1 फरवरी को स्टॉक एक्सचेंज को एक नोटिस भेजकर कहा कि वह अपने ऋण के लिए कोई समाधान तलाशने में असमर्थ रही है और इसलिए ऋण शोधन प्रक्रिया शुरू करने के लिए उसने नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से संपर्क किया है। उस समय कंपनी सूत्रों  ने कहा था कि यह पहल इसलिए की गई है ताकि भारी ऋण बोझ तले दबी यह कंपनी रिलायंस जियो (आरजियो) को जल्द से जल्द अपनी स्पेक्ट्रम एवं फाइबर ऑप्टिक्स परिसंपत्तियों की बिक्री कर सके। कंपनी के एक सूत्र ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'सभी मामले अब एनसीएलटी पहुंच चुके हैं और दूरसंचार विभाग की मंजूरी जल्द ही आने वाली है। दूरसंचार विभाग भी एक लेनदार है और जब तक यह सौदा (25,000 करोड़ रुपये का) पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी देनदार को कुछ नहीं मिलेगा।'
 
एरिक्सन ने अपनी ताजा याचिका में आरोप लगाया है कि रिलायंस जियो इन्फोकॉम को आरकॉम की 3,000 करोड़ रुपये मूल्य की फाइबर एवं संबंधित बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों की बिक्री पूरी होने के बावजूद कंपनी के बकाये का भुगतान नहीं किया गया। सूत्रों ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) संयुक्त लेनदार फोरम का प्रमुख बैंकर है जिसने आरकॉम के स्पेक्ट्रम की बिक्री आरजियो को करने की मंजूरी दी थी। इसलिए अब तक बकाये का भुगतान न होने के लिए एसबीआई को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
 
सर्वोच्च न्यायालय में दायर पिछली अवमानना याचिका में एरिक्सन ने आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी की गिरफ्तारी और बकाये का भुगतान होने तक उनकी परिसंपत्तियों जब्त करने की मांग की थी। सूत्रों ने बताया कि ताजा याचिका में भी वही मांग की गई है और उन्हें देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया है। आरकॉम ने सोमवार को नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में एक याचिका दायर कर एनसीएलटी के मुंबई पीठ में  एरिक्सन इंडिया द्वारा दायर दिवालिया प्रक्रिया के विरोध में अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि एरिक्सन ने दिवालिया प्रक्रिया में जाने के आरकॉम के निर्णय का विरोध किया है क्योंकि उसे डर है कि ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता प्रक्रिया के तहत उसे केवल परिचालन लेनदार करार दिया जा सकता है जिससे उसे मिलने वाली रकम 550 करोड़ रुपये से कम हो सकती है।
Keyword: RCOM, defaulter, anil ambani, NCLT,,
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