बिजनेस स्टैंडर्ड - संगठित क्षेत्र में नौकरियों के सृजन की चुनौती
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संगठित क्षेत्र में नौकरियों के सृजन की चुनौती

शैली सेठ मोहिले / मुंबई 02 05, 2019

चंद्रशेखरन ने कहा...

अनौपचारिक क्षेत्र से लोगों को औपचारिक क्षेत्र में लाना और औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों का सृजन ज्यादा चुनौतीपूर्ण 

सिर्फ 1.5 करोड़ लोग संगठित क्षेत्र में, असंगठित क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की संख्या कम

संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की तुलना में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले अकुशल श्रमिकों का वेतन बहुत कम

वेतन में चार-पांच गुने का अंतर चिंता का विषय, नौकरियों की सुरक्षा व सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलता

बिजनेस स्टैंडर्ड संगठित क्षेत्र में नौकरियों के सृजन की चुनौतीभारत इस समय औपचारिक नौकरियों के सृजन और अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में लोगों को लाने की चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि नौकरियों की कमी की तुलना में यह बड़ा मसला है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा व वित्तीय सेवाओं सहित तमाम सेवाओंं तक पहुंच न होने से समस्या हो रही है। इस तरह से अगर इस समस्या का प्रभावी तरीके से समाधान कर दिया जाए तो रोजगार की समस्या अपने आप हल हो जाएगी।

निजी क्षेत्र के सबसे बड़े नियोक्ता समूह के चेयरमैन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप और सूचना तकनीक क्षेत्र के प्रतिनिधियों को टीआईसीओएन, मुंबई में संबोधित कर रहे थे, जो इनका सालाना कार्यक्रम है। 'अनएक्सप्लोर्ड' थीम के साथ दो दिन तक चलने वाले कार्यक्रम में 2,000 से ज्यादा प्रतिनिधियों के साथ 500 से ज्यादा निवेशकों पर 750 के करीब ज्यादा क्षमता वाले स्टार्टअप के शामिल होने की संभावना है।

चंद्रशेखरन ने कहा, 'नौकरियोंं की कमी कोई मसला नहीं है, हमारे पास नौकरियां हैं। औपचारिक नौकरियों का सृजन और अनौपचारिक से औपचारिक की ओर लोगों का पलायन, उन्हें बेहतर भुगतान वाली नौकरियोंं की पेशकश करना चुनौती है। इस बुनियादी समस्या पर और ज्यादा सोचे जाने की जरूरत है।'  उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब भारत में बेरोजगारी 2017-18 में पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा 6.1 प्रतिशत पर है। चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत के 100 करोड़ से ज्यादा आबादी में से सिर्फ 1.5 करोड़ लोग संगठित नौकरियां करते हैं। बहरहाल उन्होंने संगठित और असंगठित क्षेत्र के बीच कौशल की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि 1.5 करोड़ लोगों में 60 प्रतिशत द्वितीयक शिक्षा वाले और सेवा क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत द्वितीयक और तृतीयक शिक्षा वाले हैं। इस तरह से सभी कुशल लोग 15 प्रतिशत पूल से हैं और असंगठित क्षेत्र के 85 प्रतिशत लोगों मेंं से ज्यादातर कम कुशल और कम शिक्षित हैं। इन 85 प्रतिशत पूल के लोगों का वेतन कम है और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले इनकी तुलना में 5 गुना ज्यादा तनख्वाह पाते हैं। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा कम है और इन्हें इलाज की सुविधा या सेवानिवृत्ति के लाभ नहीं मिलते हैं। चंद्रशेखरन ने कहा कि नौकरियों व गुणवत्तायुक्त सेवाओंं तक पहुंच जैसे दो अहम मसले टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के लिए बेहतर मौका है। महाराष्ट्र में स्टार्टअप को काम करने के लिए वातावरण पर तैयार केपीएमजी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि  भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्टअप आधार वाला देश है, जहां 7,200 के करीब स्टार्टअप हैं। 

मुंबई और पुणे में काम करने वाले स्टार्टअप ने जनवरी 2015 और सितंबर 2018 के बीच 377 अरब रुपये जुटाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 से 2012 की तुलना में 2015 और 2018 के बीच उद्यम पूंजी सौदों की वृद्धि के हिसाब से मुंबई विश्व में सातवें स्थान पर रहा।  नैशनल एसोसिएशन आफ सॉफ्टवेयर कंपनीज ( नैसकॉम) के अध्यक्ष देवजानी घोष ने कहा कि भारत जहां स्टार्टअप के तीसरे बड़े देश होने का दावा करता है, वहीं इस दिशा में बेहतर होने को लेकर चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'आप हर मोर्चों पर बेहतर नहीं हो सकते। आपको अपनी लड़ाई खुद चुननी है।' टेक्नोलॉजी को लेकर उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप को लेकर कदम उठाए गए हैं, वे ज्यादा हैं, लेकिन बहुत तेजी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह वक्त है कि संख्या की डींग हांकना छोड़कर श्रेष्ठ होने की ओर ध्यान केंद्रित किया जाए। 

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