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कर बचाने के लिए ईएलएसएस में न करें 80 सी की सीमा से अधिक निवेश

सर्वजीत सेन /  February 04, 2019

अब फरवरी का महीना आ चुका है और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह वक्त बहुत व्यस्तता भरा होगा। व्यस्तता इसलिए होगी क्योंकि वित्त वर्ष खत्म होने वाला है और आयकर बचाने के तरीके तलाशे जा रहे होंगे क्योंकि चालू वित्त वर्ष में निवेश करने का यह आखिरी मौका है। यही वजह है कि ज्यादातर निवेशक इस समय हड़बड़ी में होंगे और आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत निवेश करने के लिए सही जरिया या योजना तलाश रहे होंगे। अगर आप किसी निवेश सलाहकार से पूछेंगे तो शायद वह आपको यही बताएगा इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) निवेश का सबसे बढिय़ा विकल्प है।

ईएलएसएस योजना या कर बचाने वाली म्युचुअल फंड योजना धारा 80 सी के तहत अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कर लाभ हासिल करने का मौका देती है। इनका एक फायदा यह भी है कि लंबे अरसे तक निवेश करने पर अच्छी खासी संपदा जमा हो सकती है क्योंकि इनमें लगाया गया धन शेयरों में निवेश किया जाता है, जिनके जरिये महंगाई को पछाडऩे वाला प्रतिफल हासिल करने की संभावना अधिक से अधिक होती है। इक्विरस वेल्थ के शोध प्रमुख देवांग कक्कड़ कहते हैं, 'इक्विटी पर केंद्रित योजना होने के कारण ईएलएसएस योजनाएं कर बचाने के दूसरे विकल्पों की तुलना में आपको कहीं अधिक प्रतिफल दिलवा सकती हैं। आंकड़ों पर जाएं तो ईएलएसएस श्रेणी के फंडों में 10 साल की औसत सालाना चक्रवृद्घि दर (सीएजीआर) करीब 16.5 फीसदी रहती है।'

ईएलएसएस फंड का एक बड़ा फायदा यह भी है कि उनमें केवल तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है। यह अवधि कर बचाने के लिए पसंद किए जाने वाले दूसरे निवेश विकल्पों जैसे सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), स्थिर जमा (एफडी) और यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाओं (यूलिप) की लॉक-इन अवधि से कम होती है। बाकी योजनाओं में लॉक-इन अवधि पांच साल से ही शुरू होती है यानी उनमें निवेश पांच साल के बाद ही निकाला या भुनाया जा सकता है। 

ईएलएसएस यूं तो बहुत काम की योजना है, लेकिन अधिकतर निवेशकों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि एक साल में ईएलएसएस फंड में कितना निवेश किया जाए। उन्हें समझ नहीं आता कि 80 सी के तहत निर्धारित 1.50 लाख रुपये की समूची कर सीमा का इस्तेमाल ईएलएसएस में ही कर लिया जाए या नहीं? वे यह भी तय नहीं कर पाते कि ईएलएसएस में आकर्षक प्रतिफल को देखते हुए तय सीमा से ज्यादा निवेश इसमें किया जाए या नहीं क्योंकि कई लोग इसमें सीमा से अधिक निवेश करते हैं।

लेकिन समझदारी इसी बात में है कि ईएलएसएस में 80 सी के तहत निर्धारित सीमा से अधिक निवेश नहीं किया जाए। निवेश विशेषज्ञों को लगता है कि इस सीमा से अधिक निवेश करना अक्लमंदी की बात नहीं होगी। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट में वरिष्ठ कार्यकारी समूह उपाध्यक्ष जयेश फारिया कहते हैं, 'कर छूट की सीमा से अधिक निवेश करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि ईएलएसएस में तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है यानी रकम तीन साल के लिए फंस जाती है। निवेशकों के पास दूसरे ओपन-एंड म्युचुअल फंडों में निवेश करने का विकल्प है, जो कमोबेश इतना ही प्रतिफल देते हैं और किसी भी समय भुनाए जा सकते हैं।'

फंड्सइंडिया डॉट कॉम में म्युचुअल फंड शोध की उप प्रमुख भावना आचार्य भी इस बात पर रजामंदी जताती हैं और बताती हैं कि लॉक-इन अवधि के कारण इसमें सीमित निवेश ही करना चाहिए। उनका कहना है, 'लॉक-इन अवधि सबसे बड़ी कमी है क्योंकि ईएलएसएस फंड का प्रदर्शन कमतर रहने पर या निवेशक द्वारा गलत फंड में निवेश हो जाने की सूरत में भी इस प्रावधान के कारण बीच में निवेश निकालना या अपना निवेश बेहतर इक्विटी फंड में ले जाना मुमकिन नहीं होता।

दूसरी दिक्कत यह है कि यदि निवेशक ईएलएसएस फंडों का इस्तेमाल लक्ष्य आधारित पोर्टफोलिया निवेश में दूसरे मल्टी-कैप फंडों की तरह ही करना चाहते हैं तो अपने लक्ष्य के मुताबिक जरूरत पडऩे पर भी वे जमा रकम के किसी हिस्से का नकदी की तरह इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।' अगर धारा 80 सी तहत मिलने वाली कर बचत की सीमा अन्य विकल्पों में निवेश के जरिये खत्म हो चुकी है तो ईएलएसएस में अधिक निवेश करना आपके लिए शायद ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा।

ईएलएसएस में निवेश आपकी कुल वित्तीय योजना का हिस्सा होना चाहिए। ईएलएसएस आपके निवेश पोर्टफोलियो में इक्विटी निवेश की तरह काम करेंगे। अगर इक्विटी में आपका जरूरत से ज्यादा निवेश हो जाता है तो आपको कर बचाने के लिए डेट पर केंद्रित योजनाएं ही चुननी चाहिए। 

किसी भी निवेश योजना का पिछला प्रदर्शन निवेश करने या नहीं करने का फैसला करने में मदद करता है, लेकिन म्युचुअल फंड योजना चुनते वक्त पिछले प्रदर्शन को ही इकलौती कसौटी नहीं माना जाए। यह देखना बेहतर होगा कि प्रतिफल के मामले में ईएलएसएस फंडों ने पिछले तीन या पांच साल के दौरान दूसरे डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंडों की तुलना में कितना बेहतर प्रतिफल दिया है। यह भी ध्यान रखें कि अगर कर बचत के फायदे को किनारे रख दें तो डाइवर्सिफाइड फंड की अन्य श्रेणियों के मुकाबले ईएलएसएस में नहीं के बराबर फायदे ही हैं।

इन सब पहलुओं का ध्यान रखने के बाद भी आपको ज्यादा फायदा चाहिए तो एक बात गांठ बांध लें। अधिक फायदा आपको तभी मिल पाएगा, जब आप ईएलएसएस श्रेणी के भीतर अपना निवेश एक से अधिक योजनाओं में बांट देंगे। कक्कड़ समझाते हैं, 'इससे आपको किसी एक फंड के खराब प्रदर्शन की सूरत में या फंड प्रबंधक बदल जाने की सूरत में आने वाले जोखिम से बचने में मदद मिलेगी की समस्या से बचने में मदद मिलेगी। यह रणनीति आपको लॉक-इन अवधि में जोखिम से बचाने में खास तौर पर मददगार होगी।'

Keyword: ELSS, Investor, Mutual Fund, Scheme, Tax Saving, Piyush Goyal, Finance Minsiter, 80C, Equity,
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