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अंतरिम बजट से करदाताओं के लिए कागजी कार्रवाई कम

तिनेश भसीन /  February 04, 2019

अगर आप विभिन्न बजट प्रस्तावों को जोड़ते हैं तो अगले वित्त वर्ष से बहुत से करदाताओं पर अनुपालनाओं का बोझ कम हो जाएगा। टैक्स रिबेट और मानक कटौती के प्रस्तावों पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई है क्योंकि इनका करदाताओं को सीधा फायदा मिलता है। लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में बहुत से प्रस्तावों से करदाताओं के लिए अतिरिक्त कागजी काम घटेगा। करदाताओं को अब तक बहुत कागजी कार्रवाई करनी होती थी। 

उदाहरण के लिए बैंक और डाकघर जमाओं पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा में बढ़ोतरी को ही लें। इस समय अगर किसी व्यक्ति को जमाओं पर 10,000 रुपये से अधिक ब्याज मिलता है तो बैंक कर काटता है और उसे आयकर विभाग में जमा करा देता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दी गई है। टैक्समैन डॉट कॉम के चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा ने कहा, 'गृहिणियों जैसे ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी कर योग्य आय नहीं है। अगर वे हर वित्त वर्ष में फॉर्म 15जी नहीं जमा कराती हैं और कर योग्य आय न होने की घोषणा नहीं करती हैं तो बैंक जमाओं पर ब्याज का भुगतान करते समय कर काट लेते हैं। अब अगर उनकी ब्याज आमदनी 40,000 रुपये तक है तो उन्हें यह फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी।' 

पिछले बजट में सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को 50,000 रुपये तक की बैंक और डाकघर सावधि जमाओं पर कर में छूट दी थी, इसलिए बैंकों ने इस सीमा तक कोई कर नहीं काटना था। कर विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से बैंकों ने टीडीएस जारी रखा और बाद में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। अब टीडीएस की सीमा हर किसी के लिए बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दी गई है। इसलिए अब उन वरिष्ठ नागरिकों को भी राहत मिलेगी, जिनका टीडीएस कटता था। 

वित्त मंत्री ने धारा 194आई के तहत चुकाए जाने वाले किराये पर टीडीएस की सीमा भी बढ़ा दी है। इसकी एक वित्त वर्ष में सीमा बढ़ाकर 2.4 लाख रुपये कर दी गई है, जो पहले 1.8 लाख रुपये थी। धारा 191आई के तहत अगर किरायेदार (एक व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार को छोड़कर) किसी वित्त वर्ष में निर्धारित सीमा से अधिक किराया चुकाता है तो उसे 10 फीसदी की दर से कर कटौती करनी होगी। आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा ने कहा, 'बजट घोषणा में उस व्यक्ति के लिए अनुपालना कम की गई है, जो किसी कारोबारी या कंपनी को प्रॉपर्टी किराये पर देता है। अगर स्रोत पर कर कटौती की जाती है तो प्रॉपर्टी के मालिक को कर विभाग से इसका दावा करना पड़ेगा। उसे रिटर्न भरना पड़ेगा, भले ही उसकी कुल आमदनी बुनियादी छूट सीमा के अंदर हो।' उन्होंने कहा कि बहुत से वरिष्ठ नागरिक किसी छोटी प्रॉपर्टी से मिलने वाले किराये से जीवनयापन करते हैं। इस प्रस्ताव से ऐसे लोगों के लिए अनुपालना का बोझ कम हो जाएगा और उनका पैसा उनके हाथ में आएगा। 

बजट का सबसे ज्यादा चर्चित प्रस्ताव उन लोगों के लिए टैक्स रिबेट है, जिनकी कर योग्य आय 5 लाख रुपये तक है। यह रिबेट नियोक्ता कर्मचारियों को मुहैया कराएंगे। कर विशेषज्ञों का कहना है कि पहले सीबीडीटी ने कंपनियों को इस बात की मंजूरी दी थी कि अगर कर्मचारी की कर योग्य आय निर्धारित सीमा से कम है तो उनके वेतन से कर नहीं काटा जाए। यह नियम अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहेगा। 

जनवरी के दूसरे सप्ताह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने छोटे कारोबारों के मालिकों को राहत मुहैया कराई थी। जीएसटी परिषद ने 40 लाख रुपये तक के कारोबार वाले छोटे कारोबारियों को जीएसटी से राहत दी है। पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी। डेढ़ करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले छोटे उद्यमों को कंपोजिशन योजना मुहैया कराई गई है। वे केवल एक फीसदी फ्लैट रेट का भुगतान कर सकते है और उन्हें साल में एक रिटर्न भरने की जरूरत होगी। 

सुराणा ने कहा, 'वित्त मंत्री ने उन छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए कंपोजिशन स्कीम के बारे में बात की, जिनका कारोबार 50 लाख रुपये है। वे कंपोजिशन योजना को अपना सकते है और 6 फीसदी जीएसटी का भुगतान कर सकते है। पहले यह दर 18 फीसदी थी।' वह कहते हैं कि यह बहुत अहम है क्योंकि सेवा क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 55 फीसदी से अधिक हिस्सा है। 

Keyword: Budget, Tax compliance, Tax Rebet, TDS, Taxman, CBDT,
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