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'कर राहत से डेवलपरों को नहीं मिलेगी मदद'

राघवेंद्र कामत / मुंबई February 04, 2019

सरकार द्वारा बगैर बिके तैयार रियल एस्टेट के काल्पनिक किराये पर 2 साल तक कर में राहत देने से प्रॉपर्टी डेवलपरों को मदद मिलने की संभावना नहीं है। इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि डेवलपर इस समय नकदी के संकट से जूझ रहे हैं और खाली पड़े मकानों के लिवाल भी कम हैं। आईएलऐंडएफएस के डिफॉल्ट के बाद तमाम डेवलपर वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे हैं क्योंकि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने डेवलपरों को कर्ज देना बंद कर दिया है, जो रियल एस्टेट डेवलपरों के बड़े वित्तपोषक होते हैं। 

रेटिंग और एनॉलिटिक्स फर्म क्रिसिल के मुख्य परिचालन अधिकारी अमीष मेहता ने कहा, 'रियल एस्टेट उद्योग इस समय बिना बिके मकानों व दुकानों के दबाव से जूझ रहा है और 2 साल तक के लिए किराये पर कर में छूट दिए जाने से उन्हें बहुत ही मामूली राहत की उम्मीद की जा सकती है, जो पहले से ही नकदी के संकट और किरायेदार न मिलने से जूझ रहे हैं।'

क्रिसिल रिसर्च का मानना है कि कुल मिलाकर बगैर बिका रियल एस्टेट मेट्रो शहरों में मध्यम से लेकर ज्यादा के स्तर पर बना हुआ है, वहीं बगैर बिके मकानों में रेडी टू मूव प्रॉपर्टी की मात्रा कम है। मेहता ने कहा, 'इसकी वजह से एक और साल तक के लिए राहत देने से सिर्फ डेवलपरों के एक सीमित वर्ग को फायदा होगा।' देश की प्रमुख 27 सूचीबद्ध रियल्टी कंपनियों का गैर बिका भंडार मार्च तिमाही के आखिर तक 93,358 करोड़ रुपये से 21 प्रतिशत बढ़कर 1.12 लाख करोड़ रुपये हो गया। एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के मुताबिक देश के प्रमुख सात शहरों में इस समय 6.73 लाख से ज्यादा गैर बिकी यूनिट्स हैं। 

मेहता ने कहा कि पूंजीगत लाभ का फायदा बढ़ाए जाने व किराये पर लगने वाले कर छूट से नए मकानों की बिक्री पर कोई असर पडऩे की संभावना नहीं है। वैश्विक ब्रोकरेज यूबीएस के गौतम छाओछडिय़ा और तन्वी गुप्ता जैन ने  कहा, 'बढ़ी हुई अवधि भी उन डेवलपरों के लिए पर्याप्त नहीं है, जो लग्जरी परियोजनाएं बना रहे हैं। उनकी मांग बहुत कम हो गई है।'  बहरहाल डेवलपरों और फंड प्रबंधकों की इस मसले पर अलग अलग राय है। मुंबई की सनटेक रियल्टी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कमल खेतान ने कहा, 'अगर खपत कमजोर है तो कर में छूट हमेशा बढिय़ा रहेगी।' 

एएसके प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अमित भगत ने कहा कि इस कदम से डेवलपरों को मदद मिलेगी। भगत ने कहा, 'अब डेवलपरों को बेचने की जल्दबाजी और भारी छूट देने का दबाव नहीं होगा। उनका कर बोझ घटेगा।'

Keyword: Real Estate, Government, Property Developer, NBFC, Rating, Analitics Firm, CRISIL,
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