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मार्ग के हिसाब से रेल यात्री किराया!

शाइन जैकब / नई दिल्ली 02 04, 2019

मार्ग आधारित किराया मॉडल अपना सकता है रेलवे

कुछ मार्गों पर यात्री किराये में हो सकती है वृद्धि
आम चुनावों के बाद ही इस पर आगे बढ़ेगा रेलवे

बिजनेस स्टैंडर्ड मार्ग के हिसाब से रेल यात्री किराया!भारतीय रेल यात्री किराये के मॉडल में बदलाव लाने की योजना बना रहा है। इसके तहत अब मार्ग-आधारित किराया वसूला जा सकता है, जिससे चुनिंदा मार्गों पर यात्री किराये में इजाफा हो सकता है। प्रीमियम रेलगाड़ि‍यों में फ्लेक्सी किराये से राजस्व में इजाफे को देखते हुए रेलवे इस दिशा में विचार कर रहा है। नया मॉडल सभी रेलगाडिय़ों पर लागू होगा। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'किराये के नए मॉडल पर अभी शुरुआती स्तर पर चर्चा हो रही है। यह रेलवे को लिए जरूरी है क्योंकि हम यात्री किराये में भारी नुकसान उठा रहे हैं।' जिस तरह का विचार सामने आया है, इससे मार्ग आधारित मॉडल तैयार किया जा सकता है क्योंकि कुछ मार्गों पर रेलवे भारी घाटे में चल रही है। हालांकि लोकसभा चुनाव तक इस योजना के  सामने आने की संभावना नहीं है। अगली सरकार ही इस पर विचार कर सकती है। 

रेलवे बोर्ड के सूत्रों ने संकेत दिया कि रेलवे पर सामाजिक क्षेत्र को दिए जाने वाले सब्सिडी बोझ पर नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) की हालिया अध्ययन के बाद इस पर विचार किया जा रहा है। एनआईपीएफपी ने सुझाव दिया था कि सब्सिडी के कारण बढ़ रहे वित्तीय दबाव से उबरने के लिए रेलवे को यात्री किराये में इजाफा करना चाहिए। सालाना आधार पर रेलवे सामाजिक क्षेत्र में सब्सिडी के तौर पर 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये खर्च करती है।

फ्लेक्सी किराये को छोड़ दें तो रेलवे ने 2014 में सदानंद गौड़ा के रेलमंत्री रहने के दौरान यात्री किराये में वृद्घि की थी। उस समय सभी श्रेणियों के लिए 14.2 फीसदी यात्री किराया बढ़ाया गया था, वहीं मालभाड़े में भी 6.5 फीसदी की वृद्घि की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। जनवरी 2013 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने यात्री किराये में 2 पैसे से लेकर 10 पैसे तक का इजाफा किया था। हालांकि किराये में यह वृद्घि बजट प्रक्रिया से इतर की गई थी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस साल के बजट में 2019-20 में यात्री राजस्व से रेलवे की आय 8 फीसदी बढ़कर 56,000 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान लगाया है। उपलब्ध ताजा अनुमान के आधार पर रेलवे प्रति 10 किलोमीटर के लिए करीब 36 पैसे किराया वसूलती है जबकि उसका खर्च 73 पैसे आता है। ऐसे में यात्री सेवा मद में होने वाले कुल खर्च का रेलवे केवल 57 फीसदी ही वसूल पाती है, वहीं उपनगरीय रेलवे में उसकी वसूली 40 फीसदी ही हो पाती है। 

अधिकारी ने कहा, 'पिछले दो दशक में रेलवे ने तीन बार किराया बढ़ाया और एक बार उसे यात्री किराये में बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी। रेलवे को कुछ मार्गों पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है जबकि किराया सभी मार्गों पर एकसमान है।'

Keyword: Indian Railway, flexi fare, Route based fair, Rail Minister, Piyush Goyal,
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