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बीओबी, क्रेडिट सुइस ने बेचे ज़ी के शेयर

देव चटर्जी / मुंबई February 03, 2019

बैंक ऑफ बड़ौदा और क्रेडिट सुइस ने कर्ज की रिकवरी के लिए एस्सेल समूह के प्रवर्तकों की ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (जेडईईएल) में हिस्सेदारी का एक भाग बेच दिया है, जिसे उनके पास गिरवी रखा गया था। एक ओर जहां एस्सेल समूह के अधिकारियों को जल्द से जल्द मोरेटोरियम करार पर हस्ताक्षर की उम्मीद है, वहींं दूसरी ओर लेनदारों ने कहा कि पिछले साल 12 फरवरी को आरबीआई की तरफ से जारी सर्कुलर एस्सेल समूह के प्रवर्तकों के विराम वाले प्रस्ताव पर असर डाल सकता है, जिसमें कर्ज पुनर्गठन या विराम की अनुमति तब तक नहीं मिलती है जब तक कि 100 फीसदी लेनदार इस पर सहमत नहीं होते और इसके लिए पूरा प्रावधान नहीं करते।
 
स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़े के मुताबिक, 1 फरवरी को बैंकों ने ज़ी एंटरटेनमेंट के 267 करोड़ रुपये के 74 लाख शेयर बेच दिए। एस्सेल समूह की प्रवर्तक इकाइयों ने विभिन्न कारोबारों में निवेश के लिए म्युचुअल फंडों व बैंकों से ऋण प्रतिभूतियों के जरिए कर्ज जुटाए थे। लेकिन बुनियादी ढांचा क्षेत्र में इसका निवेश समूह के लिए हानिकारक रहा। समूह के शेयर कीमतों में हालिया गिरावट से बैंकों ने मार्जिन की मांग की क्योंकि समूह कंपनियों ने इस साल एक जनवरी से अब तक 15,333 करोड़ रुपये की बाजार पूंजीकरण गंवाई है।
 
एस्सेल के प्रवक्ता ने कहा, छोटे स्तर पर हमने पाया है कि कुछ शेयर बेचे गए हैं और नियामकों व एक्सचेंजों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। लेनदारों से जुड़ी विशिष्ट सूचना साझा नहीं की जा सकती। हालांकि हम दोहराना चाहेंगे कि शेयर के बदले कर्ज देने वाले लेनदार हमें समर्थन जारी रखे हुए हैं और लेनदारों के साथ लिखित सहमति पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है, जो हमारे शेयर के बदले कर्ज वाले पोर्टफोलियो के 95-97 फीसदी हिस्से को कवर करेगा और इस पर सप्ताहांत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं।
 
प्रवक्ता ने कहा कि म्युचुअल फंडों का शेयर के बदले कर्ज आरबीआई के 12 फरवरी के परिपत्र के दायरे में नहीं आता। इस परिपत्र ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वह 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज खाते को दिवालिया अदालत ले जाए, अगर डिफॉल्ट के बाद 180 दिन के भीतर इसका समाधान नहीं निकलता हो। कर्ज का पुनर्गठन तब हो सकता है जब 100 फीसदी लेनदार इसे मंजूरी दे। बैंकों की बात करें तो येस बैंक का डिश टीवी की प्रवर्तक इकाइयों पर 3,300 करोड़ रुपये का कर्ज है। पिछले दो हफ्ते में डिश टीवी के शेयरोंं में भारी गिरावट के बाद येस बैंक ने कर्ज वसूली के लिए कंपनी के प्रवर्तकों से बातचीत शुरू की है क्योंकि शेयरों की कीमतें तय सीमा से नीचे चली गई है। एस्सेल समूह के प्रवर्तकों ने वादा किया है कि गिरवी शेयरों में हुई कमी की भरपाई की जाएगी और आरबीआई के नियमों के तहत और शेयर गिरवी रखने का फैसला लिया है। लेनदारों को लिखे पत्र में एस्सेल समूह के प्रवर्तक सुभाष चंद्रा ने कारोबार बिक्री के जरिए लेनदारों को कर्ज चुकाने का वादा किया है। मूल कंपनी ज़ी की हिस्सेदारी बेचने के लिए समूह कई निवेशकों के साथ सक्रियता से बातचीत कर रहा है, जिसका बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को 34,240 करोड़ रुपये था। चंद्रा ने यह भी कहा है कि डिश टीवी और वीडियोकॉन डी2एच का विलय एक गलती थी, जिससे उन्हें और उनके भाई जवाहर को काफी चोट पड़ी।
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