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सरकार ने दिया स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज का प्रस्ताव

राजेश भयानी / मुंबई February 03, 2019

करीब तीन साल की चर्चा के बाद अब स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की स्थापना के संबंध में संकेत मिल रहे हैं। सरकार ने देश भर के खुदरा और थोक बाजारों में हो रहे सोने के व्यापार के लिए एक स्पॉट एक्सचेंज स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि यह एक्सचेंज इलेक्ट्रॉनिक मंच होगा और इस बात की ज्यादा संभावना है कि यह स्वर्ण आयात से शुरू होने वाले एकल प्रवेश बिंदु के रूप में काम करेगा। अंतरिम बजट के साथ पेश किए गए 2018-19 के बजट प्रस्तावों के कार्यान्वयन संबंधी दस्तावेज में कहा गया है कि वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में सोने को बढ़ावा देने के लिए प्रारूप नीति को संबंधित मंत्रालयों में भेज दिया गया है ताकि इस पर उनके विचार जाने जा सकें तथा गोल्ड एक्सचेंज का गठन विचाराधीन है।
 
हालांकि इस दस्तावेज में स्पॉट एक्सचेंज की संरचना संबंधी नीति का विवरण नहीं है और न ही यह उल्लेख है कि इसे कौन विनियमित करेगा लेकिन सूत्रों ने कहा कि सोने के लिए केवल एकल स्पॉट एक्सचेंज को ही प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि एक स्पॉट एक्सचेंज ही पारदर्शी मंच पर देश के लिए एक दाम प्रदान करता है।  अब तक इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा उपलब्ध कराई की गई कीमतों को ही हाजिर बाजार केलिए बेंचमार्क माना जाता रहा है और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने के लिए भी इसका ही उपयोग किया जाता है। अगर एक से अधिक एक्सचेंज का गठन किया जाता है तो ऐसे में सोने की मात्रा भी बंट जाएगी और दाम भी अलग-अलग रहेंगे।
 
वर्तमान में दो प्रमुख एक्सचेंज - बंबई स्टॉक एक्सचेंज और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ने गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि वे मौजूदा मंच पर ही हाजिर कारोबार शुरू करने को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां फॉरवर्ड ट्रेडिंग की अनुमति है जिसका अर्थ यह है कि डिलिवरी कारोबार की तारीख से अलग तारीख पर की जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों एक्सचेंजों को सेबी द्वारा विनियमित किया जाता है और फॉरवर्ड ट्रेडिंग सेबी के अंतर्गत आती है। सेबी के पास स्पॉट एक्सचेंज को विनियमित करने का अधिकार नहीं है।
 
इस कारण हाजिर एक्सचेंज केलिए एक अलग विनियामक की आवश्यकता रहती है। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा वक्त लगता है। सूत्र के  अनुसार इस विषय में सरकार का रुख स्पष्ट है कि हाजिर एक्सचेंज की आवश्यकता है और वह एक से अधिक एक्सचेंज का भी समर्थन नहीं करती है। यह बात कारोबार की राह को बेहतर बनाती है और इससे आयात से लेकर अंतिम खरीदार तक का लेखा-जोखा रहता है। चीन का शांघाई गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज इसी मॉडल पर काम करता है जहां पहले एक्सचेंज पर आयातित सोना बेचने की शुरुआत होती है और सब कुछ एक्सचेंज के माध्यम से ही होता है। भारत और चीन के एक्सचेंज में अंतर यह होगा कि भारत वास्तव में सोने का खनन नहीं करता है। हालांकि रिफाइनिंग कुल आयात का 30 प्रतिशत से अधिक होती है।
 
फिलहाल सरकार की योजना केवल स्पॉट एक्सचेंज को विनियमित करने के उद्देश्य से गोल्ड बोर्ड स्थापित करने की है। अलबत्ता एकल स्पॉट एक्सचेंज के लिए एक कंपनी तैयार की जाएगी। सरकारी स्वामित्व वाला उद्यम प्रारंभिक हिस्सेदारी लेगा और बाकी शेयर गैर-सरकारी संस्थाओं को दिए जाएंगे। मौजूदा एक्सचेंज भी हिस्सेदारी ले सकते हैं। 
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