बिजनेस स्टैंडर्ड - अगले साल एयर इंडिया के निजीकरण की बेहतर तैयारी
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अगले साल एयर इंडिया के निजीकरण की बेहतर तैयारी

अरूप रायचौधरी /  February 03, 2019

सरकार ने वित्त वर्ष 2019 के लिए पुनरीक्षित विनिवेश लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये और अगले वर्ष के लिए 90,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग  के सचिव अतनु चक्रवर्ती को दोनों लक्ष्य हासिल कर लेने का भरोसा है। अरूप रायचौधरी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि अब आगे निजीकरण तेज किया जाएगा। संपादित अंश...

 
क्या 2019-20 का 90,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य थोड़ा महत्त्वाकांक्षी है?
 
2017-18 में 1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया में अगले संभावित विनिवेश नहीं बचे। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही संभावित विनिवेश की सूची बनाने में बीत गई। विनिवेश के लिए तैयारी की प्रक्रिया लंबी होती है। लेकिन अब हमने अपनी रणनीति के मुताबिक इस साल के साथ अगले वित्त वर्ष के लिए विनिवेश की संभावित परिसंपत्तियां चिह्नित कर ली है। चुनाव की वजह से हमें इनमें से कुछ सौदे रोकने पड़ेंगे, जिसे हमने इस साल की योजना का हिस्सा बनाया था। हमने इस साल की योजना में जिन संपत्तियों के लिए तैयारी की थी, उनका विनिवेश 2019-20 में हो सकेगा। 
 
कार्यालय के भवन, टॉवर, हैंगर्स, हेलीपैट, भूखंड आदि संपत्तियों का विनिवेश नहीं हो पाया। अगले साल क्या बदल जाएगा?
 
इस प्रक्रिया के दो हिस्से हैं। पहला संपत्तियों की पहचान करना। दूसरा उन संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए मंजूरी लेना। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, हम विभिन्न तरह की मंजूरी लेने की प्रक्रिया चला रहे हैं। इसकी कागजी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मैं यह उम्मीद नहीं करता कि सबकुछ आसानी से हो जाएगा। इसमें उतार चढ़ाव होना ही है। हमने पहले ही एयर इंडिया की संपत्तियों के मुद्रीकरण की कवायद से सीखा है।  
 
क्या हम वित्त वर्ष 2020 में सार्वजनिक कंपनियों के और विलय की उम्मीद कर सकते हैं? 
 
हमने पीएसयू में विलय और अधिग्रण की प्रक्रिया चलाई है, जिससे संबंधित कंपनियों का बेहतर मूल्य मिल सके। अगले वित्त वर्ष में भी यह रणनीति जारी रहेगी, जिससे दो बैलेंस शीटें एक साथ आती हैं, उन्हें मजबूत बनाया जा सकता है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि जिस भी क्षेत्र में पीएसयू के विलय होंगे, बेहतर मूल्य आएगा।  हम फॉलोऑन पब्लिक ऑफर्स (एफपीओ) की दिशा में भी काम कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की जरूरतें पूरी हो सकें।
 
निजीकरण या रणनीतिक बिक्री की दिशा में क्या हो रहा है? सरकार एयर इंडिया, पवन हंस, स्कूटर्स इंडिया, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और अन्य संपत्तियों को बेचने में सफल नहीं हुई, जिसका लक्ष्य रखा गया था?
 
यह संपत्तियां निजी क्षेत्र को बेचने के लिए कतार में हैं। मुझे भरोसा है कि इन नामों में से 70 प्रतिशत की रणनीतिक बिक्री जल्द हो जाएगी। जिनके बारे में मुझे भरोसा नहीं है, उनकी किस्मत का इंतजार है।  
 
इस साल का 80,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य बहाल रखा गया है। अब तक सिर्फ 35,000 करोड़ रुपये आए हैं। क्या आप पुनरीक्षित लक्ष्य हासिल कर पाएंगे?
 
बाजार के लिए यह बहुत संवेदनशील वक्त है। ऐसे में हम किसी एक का नाम नहींं लेंगे। लेकिन तमाम ऐसे लेन देन हैं, जिनकी हमने योजना बनाई है, पूरे होने वाले हैं या पूरे होने के करीब हैं। किसी साल की चौथी तिमाही में विनिवेश से आने वाली राशि का 40-50 प्रतिशत आता है। ऐसा इस साल भी होगा। मुझे नहींं लगता कि कोई समस्या होगी।
 
क्या आप अगले साल एयर इंडिया के निजीकरण में सफल होंगे?
 
मुझे भरोसा है कि हम कर पाएगे। मुद्रा बाजार में उतार चढ़ाव और तेल के दाम को लेकर अनिश्चितता की वजह से हमें दूसरी कवायद टालनी पड़ी क्योंकि इन वजहों से एयरलाइन की पूरी अर्थव्यवस्था बिगड़ गई। आप देख रहे हैं कि एयरलाइंस संकट से गुजर रही हैं। अब आलोचनाओं की जांच का अवसर है, जिसका हम सामना कर रहे हैं, जो संभावित खरीदारों ने किया है। मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि हम बेहतर तरीके से तैयार हैं। 
 
कई साल से 2 सीपीएसई एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों का बेहतर प्रदर्शन रहा है? क्या हम इस तरह के और सीपीएसई ईटीएफ देख सकते हैं? 
 
हम निश्चित रूप से नए इक्विटी ईटीएफ पर विचार कर रहे हैं। हम नई अवधारणा पर नए ईटीएफ बनाने पर विचार कर रहे हैं। 
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