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गोयल के पहले अंतरिम बजट में पूर्ण बजट की सारी खूबियां

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  February 03, 2019

यह अंतरिम बजट नहीं है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जो अंतरिम बजट पेश किया है, वह किसी भी रूप में उनके पूर्ववर्तियों- 2004 में जसवंत सिंह, 2009 में प्रणव मुखर्जी और 2014 में पी चिदंबरम द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट से कोई समानता नहीं रखता है। अब तक किसी भी अंतरिम बजट में ऐसी योजना की घोषणा नहीं की गई, जिसके लिए 75,000 करोड़ रुपये के सालाना खर्च का प्रावधान किया गया हो। गोयल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की है, जिसमें 2 हेक्टेयर से कम कृषि भूमि वाले किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आय सहायता दी जाएगी। 

 
वर्ष 2015-16 की कृषि गणना के मुताबिक देश में 14.6 करोड़ कृषि जोत हैं, जिसमें से 86 फीसदी का रकबा दो हेक्टेयर से कम है। इसका मतलब है कि करीब 12.5 करोड़ कृषि जोत दो हेक्टेयर से कम की हैं। इस आंकड़े से बजट का आंकड़ा भी ज्यादा दूूर नहीं है। गोयल के मुताबिक योजना से 12 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को फायदा होगा। इन परिवारों में से करीब एक-तिहाई उत्तर प्रदेश और बिहार में रहते हैं, इसलिए ऐसी योजना के चुनावी फायदे को कम नहीं आंकना चाहिए।  पहले किसी अंतरिम बजट में पेंशन योजना की घोषणा नहीं की गई। इसमें असंगठित क्षेत्र के करीब 10 करोड़ कामगारों के लिए पेंशन योजना शुरू करने के लिए 500 करोड़ रुपये की टोकन राशि का आवंटन किया गया है। इसका लाभ केवल 15,000 रुपये से कम आय वाले कामगारों को मिलेगा। इस तरह असंगठित क्षेत्र के 25 फीसदी कामगार योजना के दायरे में आ जाएंगे। 
 
पिछले किसी भी अंतरिम बजट में इतनी बड़ी आयकर छूट की घोषणा नहीं की गई, जितनी गोयल ने की है। गोयल ने 5 लाख रुपये या उससे कम कर योग्य आय वाले लोगों को पूरी तरह कर छूट मुहैया कराई है। उनका अनुमान है कि इसका फायदा उन लोगों को भी होगा, जिनकी सकल सालाना आय 6.5 लाख रुपये तक है। इसका फायदा अगले साल तीन करोड़ छोटे करदाताओं को हो सकता है। कुछ अन्य फायदे मुहैया कराए गए हैं। उदाहरण के लिए वेतनभोगियों के लिए मानक कटौती बढ़ाकर 50,000 रुपये की गई है। बैंक से मिलने वाले ब्याज पर कटौती की सीमा को सालाना 10,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया है। 
 
दूसरे शब्दों में 2019-20 के अंतरिम बजट में कम से कम 13 करोड़ लोगों और 12 करोड़ किसान परिवारों को वित्तीय राहत मुहैया कराई गई है। आय सहायता की मासिक राशि 500 रुपये महीना ही है, लेकिन इसके ज्यादातर लाभार्थी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में होंगे। ऐसे में यह योजना तेलंगाना और ओडिशा की नकद हस्तांतरण योजनाओं का प्रभावी राजनीतिक जवाब साबित होगी। अगर इस योजना को देश भर में ठीक से लागू किया गया तो इसका पूरे देश के सभी राज्यों और समाज के सभी वर्गों की बड़ी आबादी को फायदा मिलेगा। 
 
इन सभी योजनाओं का कुल सालाना वित्तीय भार 99,000 करोड़ रुपये से कम नहीं होगा। ये एकबारगी दिए जाने वाले लाभ नहीं हैं, इसलिए इनका आने वाले वर्षों में भी वित्तीय भार पड़ेगा। यह राशि भारत के अगले साल के अनुमानित जीडीपी की करीब आधा फीसदी है। अंतरिम बजट को तो भूल जाएं, किसी को आसानी से यह भी याद नहीं आएगा कि हाल के वर्षों में किसी पूर्ण बजट में भी इतने अधिक लोगों के लिए इतने बड़े लाभों की घोषणा की गई हो। अगर ये पहल नरेंद्र मोदी को नई दिल्ली में सत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक संख्या में वोट नहीं दिला सके तो मोदी सरकार से मोहभंग और बड़ा और व्यापक होगा। 
 
फिर भी आश्चर्यजनक बात यह है कि इन योजनाओं के बावजूद राजकोषीय हालात काबू से बाहर नहीं होंगे। वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संशोधित कर 3.4 फीसदी किया गया है, जिसका बजट अनुमान जीडीपी का 3.3 फीसदी था। इसी तरह वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी का 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटा यह दर्शाता है कि इसमें पिछले साल के 3.1 फीसदी के आंकड़े के मुकाबले थोड़ी ही बढ़ोतरी होगी। सरकार ने हाल में जीडीपी के पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को संशोधित किया है। ऐसे में अंतिम आंकड़े लक्ष्यों से अलग नहीं रहने की संभावना है। 
 
लेकिन अब भी अंतरिम बजट के राजस्व अनुमानों को लेकर कुछ सवाल पूछे जाने चाहिए। वर्ष 2018-19 के बजट अनुमानों की तुलना में इसी वित्त वर्ष के संशोधित आंकड़ों में जीएसटी राजस्व की कमी एक लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इसकी भरपाई बजट अनुमानों की तुलना में निगम कर में करीब 50,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी, सीमा शुल्क संग्रह में 17,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी और राज्यों को अनुदान एवं ऋणों में 29,000 करोड़ रुपये की कमी की बदौलत हुई है।  अंतरिम बजट के मुताबिक विनिवेश प्राप्तियां 80,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य पर पहुंचने का अनुमान है, जो अभी तक केवल 35,500 करोड़ रुपये अनुमानित हैंं। ऐसे में यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल काम है। अगर इन राजस्व अनुमानों में से कोई भी मार्च 2019 के अंत तक हासिल नहीं हुआ तो चालू वित्त वर्ष का राजकोषीय घाटे का अंतिम आंकड़ा चिंताजनक होगा। 
 
बजट के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2019-20 में विभिन्न मदों पर खर्च को नियंत्रित रखने का प्रयास किया गया है। सरकार का पूंजीगत खर्च इस साल 20 फीसदी बढ़ा है। यह अगले साल केवल 6 फीसदी बढऩे का अनुमान है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए बजट आवंटन में मामूली गिरावट आएगी। हालांकि रक्षा बजट 2019-20 में 7 फीसदी बढऩे का अनुमान है, जिसमें इस साल 3 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।  कुल मिलाकर मोदी सरकार के लिए गोयल का पहला बजट बहुत व्यापक नजर आ रहा है।
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