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सब्सिडी बोझ में 12 फीसदी वृद्धि के आसार

बीएस संवाददाता /  February 01, 2019

मुख्य तौर पर पेट्रोलियम सब्सिडी में जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण अगले साल सरकार का सब्सिडी बोझ करीब 12 फीसदी बढ़कर 3,34,234.6 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पेट्रोलियम सब्सिडी में दोगुना से भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष के लिए कुल संशोधित सब्सिडी अनुमान बजट सब्सिडी प्रावधान के मुकाबले बढ़कर 3,713.7 करोड़ रुपये अधिक होने के आसार दिख रहे हैं। इससे पता चलता है कि इस वर्ष के लिए कुछ सब्सिडी बोझ को अगले साल के लिए टाल दिया जाएगा। घरेलू इस्तेमाल के लिए सस्ती रसोई गैस और केरोसिन की आपूर्ति के लिए पेट्रोलियम सब्सिडी देने का प्रावधान है जो बढ़कर 2019-20 में 37,478 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संशोधित अनुमानों में इसके 24,833.18 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद थी।

 
रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठï उपाध्यक्ष एवं समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) के रविचंद्रन के आकलन के अनुसार, संशोधित अनुमान के तहत आंकी गई सब्सिडी के मुकाबले वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ईंधन सब्सिडी में करीब 17,000 करोड़ रुपये की गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा, 'ईंधन सब्सिडी की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में इस साल अब तक हुई वृद्धि रही है। ऐसे में सरकार के पास यह विकल्प मौजूद है कि वह इस गिरावट को पाटने के लिए तेल कंपनियों को होने वाले सब्सिडी भुगतान के कुछ हिस्से को अगले वित्त वर्ष के लिए टाल दे। टाली गई सब्सिडी रकम को 2019-20 के लिए बजटीय आवंटन के साथ समायोजित किया जाए और विपणन अथवा उत्खनन कंपनियों को आंशिक सब्सिडी वहन करने के लिए कहा जाए।'
 
जहां तक वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सब्सिडी में गिरावट का सवाल है तो वह करीब 7,000 करोड़ रुपये की होगी बशर्ते कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 72 रुपये के आसपास रहे। रविचंद्रन ने कहा, 'अगर इसी विनिमय दर पर कच्चे तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती है तो तेल का अधिशेष हो सकता है।' सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। इससे रसोई गैस पर सब्सिडी की रकम में वृद्धि होगी जो करीब 32,989 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। चूंकि जिन परिवारों को रसोई गैस और बिजली के कनेक्शन मिल गए हैं उन्हें सब्सिडीयुक्त केरोसिन के लिए हकदार नहीं माना गया है, इसलिए इस पर मिलने वाली सब्सिडी दो वर्षों के दौरान करीब 50 फीसदी घटकर 4,489 करोड़ रुपये रह गई है। वित्त वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 8,804.15 करोड़ रुपये रहा था।
 
खाद्य एवं उर्वरक दोनों सब्सिडी में अगले साल 7 से 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान खाद्य सब्सिडी के लिए 1,84,220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जो 12,922 करोड़ रुपये अधिक है। वित्त वर्ष 2017-18 में 1,00,281.7 करोड़ रुपये की के वास्तविक व्यय के मुकाबले चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित वृद्धि 71,016 करोड़ रुपये है। इस प्रकार वित्त वर्ष 2018-19 के लिए खाद्य सब्सिडी बिल में 70 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि होगी। इसकी मुख्य वजह राष्टï्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लागू होना है। खाद्य सब्सिडी की अधिकांश रकम अनाजों की खरीद के लिए भारतीय खाद्य निगम को दी जाती है। सरकार वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय खाद्य निगम को 1,51,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की उम्मीद कर रही है जबकि इस वर्ष के लिए यह रकम 1,40,098 करोड़ रुपये रहा।
 
उर्वरक सब्सिडी इस साल के लिए 70,075.2 करोड़ रुपये के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में 74,986 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। हालांकि इस सब्सिडी भुगतान का एक बड़ा हिस्सा अगले साल के लिए हस्तांतरित हो जाएगा क्योंकि उर्वरक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जोर नहीं पकड़ पाया है। वास्तव में यूरिया सब्सिडी के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के लिए महज 10 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
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