बिजनेस स्टैंडर्ड - देश में रोजगार के आंकड़े कितने सही, कितने गलत
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देश में रोजगार के आंकड़े कितने सही, कितने गलत

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली January 31, 2019

1970 के दशक में रोजगार संकट दूर करने से संबंधित आंकड़े निकालने वाले पी सी मोहनन ने रोजगार सर्वे को लेकर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। सर्वे में रिकॉर्ड स्तर पर बेरोजगारी की बात कही गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के कार्यवाहक चेयरमैन पीसी मोहनन  और आयोग की सदस्य जे वी मीनाक्षी ने पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) को प्रकाशित नहीं किए जाने के विरोध में इस सप्ताह के शुरू में इस्तीफा दे दिया। जुलाई 2017 और जून 2018 के बीच कराए गए सर्वे की बिजनेस स्टैंडर्ड के पास मौजूद रिपोर्ट में कहा गया कि बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत पर है जो 1972-73 से सर्वाधिक है। अपने इस्तीफे के बाद मोहनन ने कहा कि सरकार द्वारा की गई अनदेशी को लेकर वे चुपचाप बैठे नहीं रह सकते। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय में अपने पूर्व सहयोगियों द्वारा हाई-क्लास पेशेवर समझे जाने वाले मोहनन ने 1978 में बेंगलूरु यूनिवर्सिटी से सांख्यिकी में मास्टर्स की डिग्री ली। उन्होंने हेल्थकेयर, साक्षरता के अलावा रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित सर्वेक्षणों को तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया। सेवा के अपने 36 वर्षों के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) में पारिवारिक सर्वेक्षणों, उद्यम सर्वेक्षणों, कृषि सर्वेक्षणों और उद्योग सर्वेक्षणों के लिए क्षेत्रीय आंकड़ा संग्रहण में सक्रियता के साथ हिस्सा लिया। उनके अनुसार, आजकल लोगों के कम जवाबदेह होने की वजह से आंकड़ा संग्रहण हाल के वर्षों में बेहद सख्त कार्य हो गया है।
 
सांख्यिकी को अपना करियर बनाने के मुद्दे पर मोहनन कहते हैं कि तब बहुत ज्यादा करियर विकल्प नहीं थे और कुछ ही रोजगार मौजूद थे। मोहनन को वर्ष 2020 तक के लिए एनएनसी का सदस्य नियुक्त किया गया था, और जुलाई में आरबी बर्मन का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें आयोग का कार्यवाहक चेयरमैन घोषित किया गया था। जे वी मीनाक्षी दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं और उन्होंने पोषण तथा स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, कृषि बाजारों, खाद्य मांग और सामाजिक समावेश के क्षेत्र में गहन शोध किए हैं। मीनाक्षी ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चरल इक्विनोमिक्स में पीएचडी की और तिरूवनंतपुरम में सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज में विजिटिंग स्कॉलर के तौर पर करियर शुरू किया। मोहनन और मीनाक्षी ने अपने इस्तीफों के लिए सरकार द्वारा एनएसएसओ के 2017-18 के रोजगार सर्वे का प्रकाशन रोकने और पिछले साल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों की पुरानी सीरीज जारी करने से पहले आयोग के साथ परामर्श नहीं किए जाने को मुख्य वजह बताया है। 
 
आगामी आम चुनाव को देखते हुए रोजगार के मुद्दे को दिए जा रहे महत्व के बीच चुनाव से कुछ महीने पहले इन दोनों के इस्तीफे ने लोगों में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार स्वयं रोजगार पैदा करने के बजाय रोजगार पर आंकड़ों के अभाव का बार बार हवाला देती रही है।  सरकार ने पिछले साल नवंबर में नीति आयोग के जरिये जीडीपी-आधारित सीरीज जारी की थी, लेकिन परामर्श प्रक्रिया में एनएससी को शामिल नहीं किया, जो एनएससी सदस्यों के साथ अच्छा नहीं था। इसके अलावा उनका दावा है कि एनएससी से परामर्श किए बगैर ही आर्थिक गणना भी शुरू कर दी गई थी। उनके इस्तीफे राष्ट्रीय सांख्यिकी के राजग द्वारा राजनीतिकरण किए जाने का प्रमुख उदाहरण हैं। 
Keyword: employment, BJP, narendra modi, NSSO,,
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