बिजनेस स्टैंडर्ड - नोटबंदी के साल मिली रफ्तार
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नोटबंदी के साल मिली रफ्तार

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 01 31, 2019

आर्थिक वृद्धि दर 7.2 % रहने का अनुमान

बिजनेस स्टैंडर्ड नोटबंदी के साल मिली रफ्तारनोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के असर के बावजूद वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक वृद्धि की दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। पहले इसके 6.7 फीसदी रहने की बात कही गई थी लेकिन सरकार ने गुरुवार को इसे संशोधित कर 7.2 फीसदी कर दिया।  केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के संशोधित आंकड़े के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 में आर्थिक वृद्घि की दर 8.2 फीसदी रहेगी जो मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में सबसे अधिक है। सरकार ने उसी साल नोटबंदी की थी। पहले इसके 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था और संशोधित आंकड़ों में इसे 1.1 फीसदी बढ़ाया गया है।

इन आंकड़ों में अग्रिम अनुमान नहीं दिए गए हैं लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। अब 2017-18 के उच्च आधार प्रभाव का मौजूदा वित्त वर्ष के आंकड़ों पर भी असर पड़ सकता है। नोटबंदी के साल विनिर्माण भले ही मजबूत नहीं रहा लेकिन अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज रही। संशोधित आंकड़ों में वित्त वर्ष 2017 में विनिर्माण की वृद्धि दर 9.2 फीसदी से घटाकर 7.9 फीसदी कर दी गई और अगले वित्त वर्ष के लिए इसे 5.7 फीसदी से मामूली बढ़ाकर 5.9 फीसदी किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संशोधित आंकड़ों की सावधानी से व्याख्या की जानी चाहिए क्योंकि नए आंकड़े जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते हैं। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'इसमें बहुत सतर्कता की जरूरत है। मुझे इस तरीके पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन नोटबंदी वाले साल के नए आंकड़े जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते हैं।' उन्होंने कहा कि कंपनियों के प्रदर्शन और कृषि के आंकड़ों से नहीं लग रहा है कि नोटबंदी के साल अर्थव्यवस्था की रफ्तार मोदी के कार्यकाल में सबसे तेज रही क्योंकि उस साल बाजार में नकदी संकट पैदा हो गया था।

संशोधित आंकड़ों में नोटबंदी के साल सेवा क्षेत्र में वृद्धि की दर में मामूली सुधार किया गया है। होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017 में 7.6 फीसदी रही जबकि पहले इसके 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। अलबत्ता वित्त वर्ष 2018 में इस सेवा क्षेत्र की वृद्धि 7.7 फीसदी रही जबकि इसके आठ फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।  इसी तरह वित्त, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्र की वृद्धि नोटबंदी वाले साल 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 8.7 फीसदी कर दी गई है। अलबत्ता वित्त वर्ष 2018 के लिए इसकी रफ्तार 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि पहले इसके 6.6 फीसदी रहने की बात कही गई थी। 

वित्त वर्ष 2017 के लिए इस प्राथमिक क्षेत्र की रफ्ताार 6.3 फीसदी पर यथावत रखी गई है। अब ऐसा लग रहा है कि नोटबंदी के कारण निवेश की दर पर प्रभाव पड़ा क्योंकि सकल निश्चित पूंजी निर्माण की दर वित्त वर्ष 2017 में 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि पहले इसके 10.1 फीसदी रहने की बात कही गई थी। अलबत्ता वित्त वर्ष 2018 के लिए इसे 7.6 फीसदी से बढ़ाकर 12.9 फीसदी कर दिया गया है। अर्थव्यवस्था में मांग उतनी बदतर नहीं लग रही है जितनी पहले मानी जा रही थी। नोटबंदी के साल निजी अंतिम खपत व्यय के 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि पहले इसके 7.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। इसी तरह वित्त वर्ष 2018 में इसके 7.4 फीसदी रहने की संभावना है जबकि पहले इसके 6.6 फीसदी रहने का अनुमान था।
Keyword: Demonetisation, narendra modi, GVA,,
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