बिजनेस स्टैंडर्ड - अर्थव्यवस्था में परिवर्तनकारी कदम है जीएसटी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, February 18, 2019 04:00 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

अर्थव्यवस्था में परिवर्तनकारी कदम है जीएसटी

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली January 29, 2019

मध्यरात्रि तक चले संसद के विशेष सत्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्त्व वाली सरकार ने देश के इतिहास के सबसे बड़े कर सुधार की घोषणा की थी, जिसने एक कर ढांचे का दौर शुरू हुआ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के दो साल होने को हैं और लोकसभा चुनाव में इसकी सबसे बड़ी परीक्षा होने वाली है। अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के जटिल ढांचे की जगह जीएसटी लागू किया गया था, जिसकी वजह से अप्रत्यक्ष करदाता बढ़े हैं और उन्हें ज्यादा जवाबदेह बनाया गया है। बहरहाल इस सुधार का अर्थव्यवस्था पर शुरुआत में विपरीत असर पड़ा और 2017-18 की पहली तिमाही में वृद्धि दर सुस्त होकर 5.7 प्रतिशत रह गई। 
 
कंपनियां, खासकर छोटे कारोबारी जीएसटी को लेकर परिचालन संबंधी दिक्कतों से जूझते रहे। हाइटेक जीएटी नेटवर्क (जीएसटीएन) सॉफ्टवेटर आखिरी क्षणों में कर दाखिले की भीड़ का बोझ नहीं सह पाया जिसकी वजह से सरकार को इसकी तिथि बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। जीएसटी व्यवस्था का डिजाइन कर चोरी को हतोत्साहित करने के मुताबिक  तैयार किया गया और उसके बाद इसे सरल बनाया गया है, जिससे अनुपालन ज्यादा आसान हो सके। डेलॉयट इंडिया में वरिष्ठ निदेशक सलोनी रॉय ने कहा, 'सरकार ने उलटे शुल्क ढांचे के मसले के समाधान के वक्त सुधार किए हैं। 2014 के बजट के बाद से ही सरकार इसके लिए कवायद कर रही है। आयात करने व बेचने के मॉडल की जगह घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया गया। छूट और सुविधाएं देकर इसे प्रोत्साहित किया गया, जो पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल के आयात पर लगता है। यह भारत के विनिर्माण क्षेत्र को सक्षम बनाने के लिए अहम है।' 
 
अप्रत्यक्ष कराधान व्यवस्था को स्थिर होने में अभी वक्त लग रहा है, वहीं प्रत्यक्ष कर संग्रह में उतार और चढ़ाव देखा जा रहा है। करदाताओंं की संख्या बढ़ी है, जबकि काले धन पर लगाम लगाने की कवायद इच्छित परिणाम नहींं दे सकी। मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही काले धन पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और काले धन को नियंत्रित करने के विभिन्न कदमों के बारे में सुझाव देने वाली 6 रिपोर्ट आ चुकी हैं।  प्रत्यक्ष कराधान के शीर्ष निकाय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को सफाई की कवायद की जिम्मेदारी दी गई, जिसका मकसद राजकोषीय घाटे को कम करने का दबाव  घटाना है, जो पिछले 5 साल में 5 प्रतिशत  से कम करके 3.5 प्रतिशत पर लाया गया है। पिछले साढ़े चार साल आयकर विभाग (आईटी) के लिए चुनौतीपूर्ण थे क्योंकि उसे यह कवायद करना था कि लोग स्वेच्छा से सामने आएं और राजस्व संग्रह का लक्ष्य हासिल किया जा सके। 
 
बेनामी लेन देन और विदेशी अघोषित आय को लेकर कार्रवाई की पहल की गई और बेनामी लेन देन अधिनियम और काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) अधिनियम लाया गया। बहरहाल इससे वसूली उम्मीद से बहुत कम रही।  नीतिगत मोर्चे पर देखें सो सीबीडीटी ने प्रस्ताव किया कि कर देने वाली कंपनियों, जिनके खाते की ऑडिट होती है, उन्हें अपनी आमदनी का अनुमान और कर देनदारी के बारे में आयकर विभाग को 15 नवंबर तक सूचित करना होगा। हालांकि व्यापक आलोचना के बाद इसे लागू नहीं किया जा सका। सरकार ने बैंक खातों व अन्य लेन देन को आधार से जोडऩे का फैसला किया लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया। कर विभाग ने ऑपरेशन क्लीन मनी, प्रोजेक्ट इनसाइट्स जैसी सफाई की कई कवायदें शुरू की। कर प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए सरकार चाहती है कि विभाग करदाताओं से सीधे संपर्क न करे। 
 
कुल मिलाकर देखें तो कर प्रणाली को लेकर तमाम प्रावधान आए लेकिन नोटबंदी जैसे कदम औंधे मुंह गिर गए। अगस्त 2018 की रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि नोटबंदी वाली मुद्रा में 15.41 लाख करोड़ रुपये में से 15.31 लाख करोड़ रुपये वापस आ गए। सरकार की स्वैच्छिक योजनाओंं के भी  उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए। इसमेंं 3 साल की मोदी सरकार के कार्यकाल की दूसरी स्वैच्छिक योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजेकेवाई) शामिल है। कर विभाग के लोग लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करने में सफल नहीं हुए। सूचनाओं के मुताबिक सरकार इससे महज 2,300 करोड़ रुपये जुटा सकी, जबकि अनौपचारिक रूप से 1 लाख करोड़ रुपये आने का लक्ष्य रखा गया था। 
Keyword: narendra modi, BJP, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या निजी बैंकों के सीईओ के मुआवजे पर बंदिश उचित कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.