बिजनेस स्टैंडर्ड - देश में बनेगा कृत्रिम मेधा केंद्र
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देश में बनेगा कृत्रिम मेधा केंद्र

नेहा अलावधी /  01 28, 2019

एआई तकनीक की संभावना
इसके जरिये कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ ही सरकारी कार्यप्रणाली में एआई तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशा जाएगा

2018-19 बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी एआई में निवेश की बात
जून 2018 में नीति आयोग ने एआई पर साझा किया था चर्चा पत्र
आईटी मंत्रालय ने भारत में एआई की संभावनाओं पर विमर्श के लिए गठित किए चार पैनल
अमेरिका, चीन, कनाडा आदि देश एआई क्षमताओं का कर रहे विस्तार
भारत में भाषाएं, बोली, लेख, और सांस्कृतिक विविधता एआई तकनीक के लिए हो सकती है कारगर

बिजनेस स्टैंडर्ड देश में बनेगा कृत्रिम मेधा केंद्रअपनी तरह के पहले कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार कृत्रिम मेधा (एआई) केंद्र विकसित करने की योजना बना रही है जिससे सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए एआई तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर काम किया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय कृत्रिम मेधा केंद्र (एनएआईसी) के नाम वाली यह इकाई इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का हिस्सा होगी और राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी), प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक) आदि विभिन्न विभागों के साथ मिलकर काम करेगी। यह इकाई जुलाई माह तक परिचालन शुरू कर देगी और इसके लिए काम शुरू हो चुका है। 

अधिकारी ने बताया कि पिछले साल सरकारी कार्यप्रणाली में एआई तकनीक के प्रयोग पर बने मंत्रालय के एक पैनल की रिपोर्ट के बाद यह केंद्र विकसित करने का निर्णय किया गया है। दूसरे कार्यों के अलावा, पैनल ने आम जनता के लिए एआई, डेटा प्लेटफॉर्म विकसित करना, कौशल विकास और प्रशिक्षण, शोध एवं विकास तथा इस क्षेत्र से जुड़ी कानूनी, नियामकीय, नौतिक तथा साइबर सुरक्षा संबंधि चुनौतियों की समीक्षा की। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'पैनल की रिपोर्ट में हमारे लिए बहुत कुछ है। इसमें राष्ट्रीय एआई केंद्र विकसित करने की सलाह दी गई।' उन्होंने कहा, 'एआई के जरिये सरकारी ऐप्लिकेशंस में नवोन्मेष का प्रयास किया जाएगा। हम एआई के जरिये स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और दूसरे सार्वजनिक क्षेत्रों को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे।' एनआईसी पहले से ही एआई आधारित दो छोटे केंद्र के साथ काम कर रहा है लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं में एआई के बेहतर प्रयोग के लिए राष्ट्रीय केंद्र अधिक कारगर तरीके से काम करेगा। सूत्रों के अनुसार इस केंद्र को स्थापित करने में 400-450 करोड़ रुपये खर्च होंगे तथा मंत्रालय इसके स्थान का निर्धारण कर रहा है। 

जून 2018 में सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग ने भी 'कृत्रिम मेधा के लिए राष्ट्रीय रणनीति' पर एक चर्चा पत्र जारी किया था। इसमें स्वास्थ्य, कृषि, स्मार्ट शहर, शिक्षा और परिवहन के रूप में 5 क्षेत्रों को चिह्नित किया गया था, जहां एआई की सहायता से कई चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा, 'आंकड़ों के बिना एआई का उपयोग नहीं हो सकता। एनआई के दो केंद्र हैं, पहला एआई आधारित और दूसरा डेटा एनालिटिक्स पर केंद्रित। वहीं, सी-डैक ने भाषाओं पर बेहतरीन काम किया है।' सरकार की तकनीकी इकाई एनआईसी ने पिछले साल नई दिल्ली में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डेटा एनालिटिक्स (सीईडीए) की स्थापना की।

सी-डैक भारतीय भाषाओं में वेब एड्रेस विकसित करने की परियोजना पर काम कर रहा है। सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था में 15.7 लाख करोड़ डॉलर का योगदान कर सकता है। रोबोटिक क्षेत्र में स्वचालन पर काम करने वाली फर्म ऑटोमेशन एनीव्हेयर के कार्यकारी उपाध्यक्ष (भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका) मिलन सेठ कहते हैं, 'हमने अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर काफी काम किया है। वहां, नागरिक सेवाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में एआई तकनीक का उपयोग हो रहा है। एआई और रोबोटिक्स के जरिये उन्हें काम करने में गति मिली है। भारत में इस तरह का केंद्र विकसित करना काफी लाभदायक होगा।'

वह कहते हैं कि चीन जैसे देश निगरानी और नागरिकों के व्यवहार की जांच के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं लेकिन भारत में नागरिक केंद्रित सरकार विकसित करने और सरकारी प्रणाली बेहतर बनाने में एआई तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। अमेरिका, चीन, कनाडा, रूस और इस्टोनिया जैसे देश अपनी एआई क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात एआई मंत्रालय बनाने वाला पहला देश है और वह सरकारी कार्यप्रणाली में एआई के प्रयोग पर काम कर रहा है। शोध संस्था आईडीसी और स्टोरेज कंपनी सीगेट के एक श्वेत पत्र के अनुसार वैश्विक डेटा वर्ष 2018 के 33 जीटाबाइट के मुकाबले वर्ष 2025 तक 175 जीटाबाइट की गति से बढ़ेगा। एक जीटाबाइट में 1 लाख करोड़ गीगाबाइट होते हैं। 

आंकड़ों के बढऩे के साथ-साथ एआई तकनीक की सटीकता और भरोसा बढ़ता जाएगा। नौकरियों की छंटनी में एआई तकनीक का उपयोग करने वाली फर्म एस्पायरिंग माइंड्स के सह संस्थापक वरुण अग्रवाल ने पिछले साल जून में एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू के एक लेख में लिखा, 'भारत में भाषाएं, बोली, लेख, परिधान और संस्कृति में विविधता एआई तकनीक के लिए बेहतरीन चुनौती है। वर्तमान एआई तकनीक की अपनी सीमाएं हैं और उन्हें विविधता भरे माहौल की चुनौतियों के लिए अभी और विकसित होना होगा। भारतीय जनसंख्या की जरूरत भी एआई के लिए एक बेहतर चुनौती पेश करेगी।'

Keyword: AI, Artificial Intelligence, Language, Article, Clothing, Culture, Population, C-DAC, NAIC,
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