बिजनेस स्टैंडर्ड - ओवीएल को सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव नहीं : प्रधान
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 21, 2021 04:15 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

ओवीएल को सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव नहीं : प्रधान

शाइन जैकब / नई दिल्ली January 28, 2019

तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की विदेश में काम करने वाली इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) की सूचीबद्धता को लेकर विवादों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि इस समय उनके मंत्रालय के सामने इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। 

पिछले साल 21 दिसंबर को ओएनजीसी के बोर्ड ने निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) की ओर से ओवीएल को सूचीबद्ध कराए जाने के प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया था कि किसी अन्वेषण और उत्पादन कंपनी को सूचीबद्ध कराने के लिए बाजार की स्थितियां आदर्श नहीं हैं। इसके बाद खबरें थीं कि सरकार कंपनी से अपनी योजना पर फिर से विचार करने के लिए कह सकती है। ओवीएल की सूचीबद्धता के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रधान ने कहा, 'सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।' 

पिछले 3 साल में भारतीय कंपनियों ने रूस, नामीबिया, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और ओमान सहित 6 देशों में 5.841 अरब डॉलर की संपत्तियों का अधिग्रहण किया है। रूस में वैंकोर और तास युरयाख स्थित 2 संपत्तियों पर 4.847 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं। 

प्रधान ने कहा, 'पहले की सरकार के कार्यकाल में विदेश में निवेश की रणनीति में अन्वेषण ब्लॉकों को खरीदना शामिल था। मौजूदा सरकार की प्राथमिकता उत्पादन करने वाले क्षेत्र में निवेश करने को लेकर है। सामान्यतया, कोई भी देश किसी को उत्पादक क्षेत्र नहीं देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक असर के कारण हमें देश के विभिन्न इलाकोंं जैसे रूस, ओमान और यूएई में बेहतरीन उत्पादक क्षेत्र मिले हैं।' 

ओवीएल की मौजूदगी भारत के बाहर 20 देशों में है और उसने वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 28.36 अरब डॉलर निवेश किया है। उन्होंने कहा, 'अब सरकारी कंपनियों का विदेश में निवेश सिर्फ ओवीएल तक सीमित नहीं है। हमने कंपनियों का कंसोर्टियम बनाया है और विदेश में अब तक का सबसे बड़ा 5 अरब डॉलर का निवेश रूस के तेल उत्पादन क्षेत्रों में किया है।'  2016 में भारत की कंपनियों- ओवीएल, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), ऑयल इंडिया (ओआईएल), भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीआरएल) ने रूस के वैंकोर ब्लॉक में 3.0 अरब डॉलर में 49.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। अक्टूबर 2016 में ओआईएल, आईओसी और बीपीआरएल ने तास युरयाख में 1.149 अरब डॉलर में 29.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। 

सऊदी अरब के वैंकोरनेफ्ट और जाकुम कंसेशन प्रोजेक्ट जैसे उत्पादक ब्लॉकों से बढ़े हुए उत्पाद की वजह से ओएनजीसी विदेश ने पिछले वित्त वर्ष में 1.416 करोड़ टन तेल उत्पादन किया, जो उसका सबसे ज्यादा उत्पादन है। 2016-17 की तुलना में उसके उत्पादन में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। दिलचस्प है कि 2017-18 में कंपनी का 56 प्रतिशत उत्पादन रूस से आया, जबकि 12 प्रतिशत के साथ वियतनाम दूसरे स्थान पर रहा। 

दीपम इसकी सूचीबद्धता के लिए दबाव देता रहा है। हाल के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दीपम चालू वित्त वर्ष में 80,000 करोड़ रुपये लक्ष्य के सापेक्ष महज 35,134.76 करोड़ रुपये जुटा सका है। बोर्ड के सूचीबद्धता के खिलाफ होने के फैसले के पीछे कुछ अहम वजहें हैं, क्योंकि उसकी कुछ संपत्तियां जैसे मोजांबिक में काम 2022 तक ही शुरू हो पाएगा। उम्मीद की जा रही है कि रोवुमा एरिया-1 ऑफशोर ब्लॉक के गोलफिन्हो-अतुम फील्ड में ओवीएल 4.5 अरब डॉलर निवेश करेगी।

भारत में पिछले 5 साल में आए निवेश के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा, 'बड़ी वैश्विक अन्वेषण कंपनी बीपी भारत में काम कर रही है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन में हम बोली का आयोजन कर रहे हैं, इस पर 2-3 बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं। हाल के दिनों में कनाडा की कंपनी ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। देश में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रिफाइनरी क्षेत्र में नयारा एनर्जी लाई है। हमारे ऊर्जा का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां विदेशी निवेश न आया हो। अगर दुनिया की कोई कंपनी अपनी वृद्धि पर विचार कर रही है, जो आज वह भारतीय बाजार की उपेक्षा नहीं कर सकती।' 

Keyword: Oil and Natural Gas Corporation, ONGC, OVL, ONGC Videsh Limited, DIPAM, Listed Company, Dharmendra Pradhan,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या धातुओं की मांग घटने से कंपनियों के लाभ पर पड़ेगा असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.