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बिक सकते हैं सूटी के शेयर

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली January 28, 2019

सरकार ने स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग आफ यूनिट ट्रस्ट आफ इंडिया (सूटी) के जरिये विभिन्न सूचीबद्ध कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को विनिवेश की आपातकालीन योजना के तहत रखा है। अगर सरकार चालू वित्त वर्ष में 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल करने से थोड़ा पीछे रह जाती है तभी सूटी के निवेश के एक हिस्से की बिक्री करेगी। 

सूटी के माध्यम से सरकार के पास ऐक्सिस बैंक में 9.56 प्रतिशत, आईटीसी लिमिटेड में 7.96 प्रतिशत, लार्सन ऐंड टुब्रो में 1.79 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन हिस्सेदारियों का संयुक्त मूल्य सोमवार तक के भाव पर 46,173.35 करोड़ रुपये है। सूटी के माध्यम से कई अन्य सूचीबद्ध कंपनियों में में सरकार की छोटी छोटी हिस्सेदारियां हैं। 

बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक विनिवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) सूटी की हिस्सेदारी की बिक्री चालू वित्त वर्ष के अंतिम दो महीनों, मार्च और अप्रैल में ही हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सूटी हमारी बैकअप योजना है। अगर विनिवेश लक्ष्य में 10,000 करोड़ रुपये तक की कमी आती है तो हम एक्सचेंजों में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा कम कर सकते हैं।' 

सरकार ने जनवरी के मध्य तक विनिवेश प्रक्रिया से 35,134.76 करोड़ रुपये जुटाए हैं। वित्त वर्ष के शेष बचे महीनों में सरकार की योजना पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और संभवत: स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड में 31 मार्च के पहले पूरी हिस्सेदारी बेचने की है। 

मजगांव डॉक, रेल कंपनियों आरवीएनएल और आईआरएफसी (जिनमें 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश किया जाना है) और एमएसटीसी लिमिटेड की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) लाने की योजना है। इसके अलावा सरकारी कंपनियों के शेयरों के बाईबैक की योजना है। इसके माध्यम से सरकार के खजाने में 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये आ सकते हैं। 

उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि केंद्र सरकार अभी कवायद कर रही है कि उसकी एसजेवीएन में हिस्सेदारी एनटीपीसी खरीद ले, जिसका मूल्य करीब 7,000 करोड़ रुपये हो सकता है। कैबिनेट ने भारत की शत्रु संपत्ति (सीईपीआई) की निगरानी वाली 996 कंपनियों में 'एनिमी शेयर्स' की बिक्री को पहले ही मंजूरी दे दी है। साथ ही कैबिनेट ने ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन आफ इंडिया (डीसीआई) में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है, जो चार बंदरगाहों का कंसोर्टियम है। इससे विनिवेश खाते में 3,070 करोड़ रुपये आ सकते हैं। इस मद में स्वाभाविक रूप से आरईसी लिमिटेड में पीएफसी लिमिटेड द्वारा खरीदी गई केंद्र की 12,100 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी भी जुडऩे वाली है।

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