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इस्तेमाल न होने वाले पैसे को ट्रेडिंग अकाउंट में न छोड़ें

संजय कुमार सिंह /  January 27, 2019

अगर आप भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के ब्रोकरों पर जुर्माना लगाने की खबरों पर नजर रखते हैं तो आपको यह बात समझ आ जाएगी कि वे किस तरह के फर्जीवाड़े करते रहते हैं। पिछले हफ्ते ही बाजार नियामक ने आनंद राठी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना शेयर ब्रोकरों से संबंधित नियमों का उल्लंघन करने और कई मौकों पर ग्राहकों के खातों से अपने खाते और अपने खाते से ग्राहकों के खातों में पैसे हस्तांतरित करने के कारण लगाया गया। सेबी के नियमों में कहा गया है कि ब्रोकरों को ग्राहकों की रकम को अपनी रकम से बिल्कुल अलग रखना चाहिए। जीरोधा के मुख्य परिचालन अधिकारी वेणु माधव इसे समझाते हुए कहते हैं, 'जब कोई ब्रोकर किसी बैंक में खाता खोलता है और उस खाते में वह ग्राहकों की रकम रखना चाहता है तो उसे खाते के नाम में यह भी दर्शाना होगा कि वह ब्रोकर-ग्राहक खाता है।' इससे एक और मकसद पूरा हो जाता है। ट्रेड स्मार्ट ऑनलाइन के कार्यकारी निदेशक विकास सिंघानिया बताते हैं, 'एक्सचेंज का ग्राहकों के बैंक खाते पर अधिकार होता है। अगर ब्रोकर डिफॉल्ट करता है तो एक्सचेंज उन्हें भुगतान करने के लिए ग्राहकों के खाते में मौजूद रकम का इस्तेमाल कर सकता है।'

 
हालांकि नियामक ब्रोकरों को ग्राहक के खाते से रकम यूं ही नहीं निकालने देता। ब्रोकर अपने कारोबारी खाते में ग्राहकों की रकम एक्सचेंजों को भुगतान करने, ब्रोकरेज फीस चुकाने और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) भरने जैसे वाजिब मकसदों से ही डाल सकते हैं। अन्यथा सेबी इसकी इजाजत नहीं देता। दिल्ली की एक डिस्काउंट ब्रोकिंग कंपनी एसएएस ऑनलाइन के संस्थापक श्रेय जैन ने कहा, 'अगर ब्रोकर अपने ग्राहक के खाते से इतनी अधिक रकम अपने कारोबारी खाते में हस्तांतरित कर लेता है कि ऑडिट होने पर वह उसे सही ठहरा ही नहीं पाए तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है।' नियमों की यह दीवार इसीलिए खड़ी की गई है ताकि ग्राहकों की रकम का दुरुपयोग नहीं हो सके। माधव ने कहा, 'ब्रोकर आपकी धनराशि का इस्तेमाल कर सकता है। सेबी नहीं चाहता कि ब्रोकर ग्राहक के धन को बाहर निकाल लें और उसका इस्तेमाल अपने लेनदेन, रियल एस्टेट खरीदने या अपने निजी कार्यों के इरादे से करें। ऐसा पहले हो चुका है।'
 
सेबी ने कुछ महीनों पहले ए सी चोकसी शेयर ब्रोकर्स पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। जुर्माना तब लगाया गया, जब सेबी को पता चला कि ब्रोकर ने ग्राहकों के शेयरों में अपने शेयर भी मिला दिए हैं। सेबीा के नियमों में स्पष्टï तौर पर कहा गया है कि जिस तरह रकम को अलग-अलग रखा जाता है, उसी तरह ब्रोकरों और ग्राहकों की प्रतिभूतियों को भी अलग-अलग रखा जाना चाहिए। सिंघानिया ने कहा, 'लंबी अवधि के निवेशक अपने डीमैट खातों में वर्षों तक प्रतिभूतियों को यूं ही पड़े रहने देते हैं। इस हिसाब से देखें तो धनराशि के दुरुपयोग से ज्यादा जोखिम प्रतिभूतियों के दुरुपयोग का है।' ब्रोकर उन प्रतिभूतियों को बेच सकता है या गिरवी भी रख सकता है।
 
ब्रोकरों के मुताबिक सेबी बदलावों पर काम कर रहा है ताकि भविष्य में शेयर सीधे ग्राहक के डीमैट खाते से एक्सचेंज के खाते में भेजे जा सकेंगे। इन्हें ब्रोकर के खाते के जरिये भेजने की जरूरत नहीं होगी, जैसा अभी होता है।  चोकसी मामले में सेबी को यह भी पता चला कि ब्रोकर ग्राहकों के चालू खातों को निपटाने में नाकाम रहा है। मान लीजिए आप अपने ट्रेडिंग खाते में कुछ रकम भेजते हैं, लेकिन प्रतिभूतियां खरीदने के लिए उस रकम का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उस स्थिति में ब्रोकर आपके खाते में पड़ी रकम का दुरुपयोग कर सकता है। दुरुपयोग की आशंका दूर करने के लिए ही सेबी ने एक नियम लागू किया है। उसमें कहा गया है कि जिस रकम का इस्तेमाल नहीं हुआ हो, उसे हर 30 दिन या 90 दिन बाद ग्राहक के पास वापस भेजना होगा। रकम 30 दिन में भेजें या 90 दिन में, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक ने खाता खोलते समय कितने समय के लिए सहमति जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रोकर आपके पैसे और प्रतिभूतियों का संरक्षक है, इसलिए आपको सोच-समझकर ही अपना ब्रोकर चुनना चाहिए। माधव सुझाव देते हैं कि आपको ब्रोकर की माली हालत बारीकी से जांच लेनी चाहिए और उन ब्रोकरों से दूर रहना चाहिए, जो माली तौर पर बहुत अच्छा नहीं कर रहे हैं।
 
जैन का सुझाव है कि नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की वेबसाइट देखते रहें और उन ब्रोकरों से बचें, जिनके खिलाफ बहुत सी शिकायतें आ चुकी हैं। वह हिदायत देते हुए कहते हैं कि अगर कोई ब्रोकर आपका पैसा नहीं लौटा पा रहा है तो यह मुसीबत का संकेत है और आपको तुरंत उससे अपना पैसा वापस निकाल लेना चाहिए। सिंघानिया का सुझाव है कि पैसे को ट्रेडिंग खाते में अनुपयोगी न पड़े रहने दें और नियमित रूप से अपने पोर्टपोलियो को देखते रहें।
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