बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रभावित डेट फंडों से नहीं निकालें निवेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 19, 2019 12:47 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

प्रभावित डेट फंडों से नहीं निकालें निवेश

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  January 27, 2019

विवादों से घिरे आईएलऐंडएफएस समूह की आंच ठंडी होने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन शांत रहने के बाद यह मामला एक बार फिर सिर उठाने लगा है और इस बार म्युचअल फंड पर इसका असर दिख रहा है। तीन अग्रणी म्युचुअल फंड कंपनियों- आदित्य बिड़ला सन लाइफ (एबीएसएल), एचडीएफसी और यूटीआई- के डेट फंडों के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) को आईएलऐंडएफएस ने झटका दिया है। लेकिन इसकी वजह से निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। म्युचुअल फंड विशेषज्ञों का कहना है कि जिन निवेशकों में जोखिम लेने की पर्याप्त क्षमता है, उन्हें इन फंडों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि भुगतान जल्द शुरू होने की संभावनाएं बरकरार हैं। सवाल यह है कि इन तीनों कंपनियों पर आईएलऐंडएफएस की चोट क्यों पड़ रही है? असल में तीनों फंड कंपनियों ने आईएलऐंडएफएस समूह की तीन विशेष कंपनियों (एसपीवी) द्वारा जारी बॉन्ड (ऋण पत्र) में निवेश किया था। ये विशेष कंपनियां नकदी प्रवाह बनाए रखने वाली इकाइयां हैं और इनसे मिला ब्याज भुगतान कर्जदाताओं तक एक अस्थायी बैंक खाते (एस्क्रॉ अकाउंट) के जरिये पहुंचा।

 
कुछ अरसा पहले तक भुगतान नियमित तौर पर हो रहा था। लेकिन अक्टूबर, 2018 में राष्टï्रीय कंपनी अपीलीय न्याधिकरण (एनसीएलएटी) ने एक आदेश जारी कर आईएलऐंडएफएस की सभी परिसंपत्तियों से जुड़ी गतिविधियां अस्थायी तौर पर रोक दी थी। इनमें कुछ विशेष इकाइयों के प्रबंधन ने तय किया कि एनसीएलएटी के आदेश के बाद वे कर्जदाताओं को बकाया रकम का भुगतान नहीं करेंगे। जब एक एसपीवी ने भुगतान नहीं किया तो रेटिंग एजेंसियों ने इसकी रेटिंग घटाकर 'चूक' (डिफॉल्ट) श्रेणी में कर दी। यह बॉन्ड एबीएसएल एमएफ के पास था। इसके बाद फंड कंपनी को उस फंड का मूल्यांकन घटाना पड़ा, जिसके पास यह बॉन्ड था।
 
फंड कंपनियों ने दो अन्य एसपीवी को भी बॉन्ड जारी किए थे। उन्होंने सोचा कि उन दोनों इकाइयों के बॉन्ड की रेटिंग भी कम की जाएगी, इसलिए एक सोची समझी रणनीति के तहत उन्होंने उन बॉन्ड का मूल्यांकन घटा दिया (यह बात अलग है कि उन बॉन्ड की रेटिंग कम नहीं की गई है)।  इन घटनाओं का हवाला देते हुए इक्रा ने इन फंड कंपनियों के छह फंडों को निगरानी में रख दिया और एक (एबीएसएल शॉर्ट टर्म ऑपच्र्युनिटीज) की रेटिंग घटा दी। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समस्याओं के लिए फंड प्रबंधकों को दोष नहीं दिया जाना चाहिए। फंड्सइंडिया डॉट कॉम की शोध प्रमुख विद्या बाला कहती हैं, 'इस बार चर्चा इस बात पर नहीं हो रही है कि फंड प्रबंधक जोखिम का समय रहते पता लगाने में नाकाम रहे। ये उच्च रेटिंग वाले बॉन्ड होते हैं, नकदी प्रवाह सुनिश्चित करते हैं। यह कानूनी मसला है, जो इस बात से ताल्लुक रखता है कि आईएलऐंडएफएस से संबंद्ध इकाइयों को एनसीएलएटी के आदेश को किस तरह देखना चाहिए।' इतना ही नहीं, इन विशेष इकाइयों ने एक सुरक्षा दायरा तैयार कर रखा है, जिसके उनके द्वारा अर्जित रकम कर्जदाता को ही जाती है। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य इन विशेष इकाइयों के कर्जदाताओं को मूल मातृ कंपनी में होने वाली उठापटक से सुरक्षित रखना है। 
 
बाला कहती हैं कि इन छह फंडों के निवेशकों को हालात पर नजर रखनी चाहिए और इंतजार करना चाहिए। 28 जनवरी को एनसीएलएटी तय करेगा कि उन बैंक खातों में लेनदेन बंद करना सही कदम होगा या नहीं, जिनसे इन कर्जदाताओं को ब्याज भुगतान हुआ था। बाला कहती हैं, 'रकम अस्थायी खाते में है, जिसका साफ मतलब हुआ कि यह कहीं दूसरी जगह नहीं जाएगी। ऐसे में ध्यान इस पर नहीं कि आएगी या नहीं बल्कि यह नजर इस पर है कि यह कब आएगी।' अगर एसपीवी भुगतान रोकते हैं तो अधिक डेट फंडों के एनएवी पर असर पड़ सकता है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक-प्रबंध शोध, कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं, 'रेटिंग में कमी, भुगतान में चूक और भुगतान में देरी जैसी बातें तो चलती रहेंगी। अधिक जोखिम के कारण ही डेट फंड बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले 100 से 200 आधार अंक अधिक प्रतिफल देने में सक्षम हैं। अगर मौजूदा घटनाओं से निवेशकों को झटका लगा है और जोखिम लेने की क्षमता की कम हुई है तो उन्हें इन फंडों से बाहर निकल जाना चाहिए।' ऐसे निवेशक विकल्प के तौर पर एएए-रेटिंग वाले बॉन्ड पर दांव आजमा सकते हैं। 
Keyword: debt fund, IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जेट एयरवेज को एनसीएलटी में मिल जाएंगे खरीदार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.