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तेल विपणन कंपनियों पर विश्लेषक सतर्क

उज्ज्वल जौहरी /  January 27, 2019

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) जैसी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों में उनके अक्टूबर के निचले स्तरों से 15-45 प्रतिशत तक की तेजी आई है और वे बड़े अंतर से बीएसई के सेंसेक्स को मात देने में कामयाब रहे हैं। यह तेजी इसलिए भी आई है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की ओएमसी के विपणन मार्जिन को लेकर चिंताएं घटी हैं। अक्टूबर 2018 में जब कच्चे तेल की कीमतें चार वर्ष के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं तो सरकार ने तेल विपणन कंपनियों से वाहन तेल पर प्रति लीटर 1 रुपये की सब्सिडी वहन करने को कहा था जिससे सब्सिडी विभाजन व्यवस्था को लेकर चिंता गहरा गई थी। हालांकि तेल कीमतें अक्टूबर के 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर से 27 प्रतिशत गिर चुकी हैं, इसलिए विश्लेषक अब विपणन मार्जिन में भारी गिरावट का अनुमान जता रहे हैं। कुछ का यह भी मानना है कि वाहन ईंधनों (जैसे पेट्रोल और डीजल) पर दैनिक विपणन मार्जिन तीन महीने पहले के 1 रुपये प्रति लीटर के निचले स्तर से सुधरकर लगभग 8 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचा है। एडलवाइस के विश्लेषकों ने तेल मार्जिन दिसंबर तिमाही में तिमाही आधार पर 46 प्रतिशत तक बढ़कर 3.3 रुपये प्रति लीटर पर रहने का अनुमान जताया है।

 
विपणन मार्जिन में सुधार की वजह से शेयर मूल्यांकन भी अनुकूल दिख रहा है, क्योंकि शेयर कीमतें चढ़ी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि फिर भी निवेशकों को सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) में भारी गिरावट को लेकर सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है, संभवत: कच्चे तेल की कीमतों में कमी से इन्वेंट्री में नुकसान, पूंजीगत खर्च पर ब्याज एवं मूल्यह्रास लागत में संभावित तेजी और आगामी आम चुनाव आदि को देखते हुए, जिससे तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण क्षमता प्रभावित हो 
सकती है। 
 
मुनाफे पर दबाव
 
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से विपणन मार्जिन को मदद मिल सकती है, लेकिन सिंगापुर बेंचमार्क रिफाइनिंग मार्जिन में गिरावट के बाद ओएमसी का जीआरएम दिसंबर 2018 की तिमाही में कमजोर रहने का अनुमान है।  सिंगापुर जीआरएम सितंबर तिमाही के 6 डॉलर प्रति बैरल और दिसंबर 2017 की तिमाही के 7.2 डॉलर प्रति बैरल से घटकर तीसरी तिमाही में 4.3 डॉलर रह गया जो वित्त वर्ष 2014 की तीसरी तिमाही से सबसे कम है। इसके अलावा, ओएमसी को कच्चे तेल की अपनी इन्वेंट्री पर बड़े नुकसान का सामना करना होगा। विश्लेषकों का कहना है कि पिछली कुछ तिमाहियों से मजबूत आय वृद्घि दर्ज कर रही ओएमसी के लिए तीसरी तिमाही की आय कमजोर रहने का अनुमान है। निर्मल बांग सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि औसत कच्चे तेल की कीमत में 4.6 डॉलर प्रति बैरल तक की कमी से इन्वेंट्री नुकसान को बढ़ावा मिलेगा, जिसका जीआरएम पर प्रभाव दिखेगा। निर्मल बांग को आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल की आय में वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में 40.3 प्रतिशत, 93.9 प्रतिशत और 92.2 प्रतिशत की त्रैमासिक गिरावट का अनुमान है।
 
ओएमसी के लिए आय को लेकर निराशा मुख्य रूप से कम जीआरएम, बढ़ती ब्याज लागत के साथ साथ मूल्यह्रास और औसत तेल कीमत 74 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 69.4 डॉलर पर रह जाने की वजह से दिखेगी। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि वाहन ईंधन में ऊंचा मार्जिन ज्यादा लंबे समय तक टिका नहीं रह सकता। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है, 'हमारा मानना है कि मार्जिन 2.5-3 रुपये प्रति लीटर के सामान्य स्तर की तुलना में काफी ऊपर हैं और हमारी नजर में ओएमसी कच्चे तेल में हाल में आई ताजा बड़ी गिरावट से इन्वेंट्री नुकसान की भरपाई पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।' उनका कहना है कि रिफाइनिंग मार्जिन में ताजा कमजोरी भी चिंताजनक है और इससे तेल कंपनियों के लिए हमारे वित्त वर्ष 2020 के अनुमानों में कटौती का जोखिम पैदा हो सकता है।
 
बाहरी चिंताएं
 
भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में सुधार भी दिखा है। तेल उत्पादक कंपनियों द्वारा उत्पादन में कटौती और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से कीमतों में तेजी दिखी है। ऐसे हालात में और आगामी चुनाव को देखते हुए ओएमसी कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप वाहन ईंधन कीमतें बढ़ाने में सक्षम नहीं हो सकती हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि वाहन तेल कीमतों में कमी आई है, लेकिन चुनावी अवधि के दौरान ओएमसी को प्रभावित करने वाले लोक-लुभावन उपायों का जोखिम हमेशा रहा है। शेयरों के संदर्भ में, मजबूत मुक्त नकदी प्रवाह, ऊंचे लाभांश प्रतिफल और सस्ते मूल्यांकन की वजह से आईओसी उनका पसंदीदा शेयर बना हुआ है। हालांकि आईओसी और बीपीसीएल अपने पूंजीगत खर्च चक्र की शुरुआत में हैं और इसलिए मूल्यह्रास और ब्याज लागत में तेजी दिख रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि इसका उनकी आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 
Keyword: OMC, oil, gas, BPCL, HPCL, IOC,,
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