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राजकोषीय खाके पर कायम रहे सरकार: ईएसी-पीएम

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली January 25, 2019

अंतरिम बजट 2019-20 के पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को मौजूदा राजकोषीय समेकन के खाके से नहीं हटना चाहिए, जिसके तहत अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद के 3.1 प्रतिशत पर रखा जाना है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2018-19 के राजकोषीय घाटे के 3.3 प्रतिशत लक्ष्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। ईएसी-पीएम के सदस्यों की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि देश की जीटीपी वृद्धि अगले कुछ साल तक 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच बने रहने की संभावना है और सुधार के माध्यम से ढांचागत समस्याओं का समाधान कर इसे 1 प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है।
 
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अपने हाल के अनुमान में कहा है कि जीडीपी वृद्धि दर 2018-19 में 7.2 प्रतिशत रहेगी।  ईएसी-पीएम की बातचीत से जुड़े सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि बजट की तैयारियों में पैनल से राय नहीं मांगी गई है।  सलाहकार निकाय ने एक बयान में कहा है, 'ईएसी-पीएम  महसूस करता है कि राजकोषीय लक्ष्य पर मजबूती से कायम रहने की जरूरत है, लेकिन सामाजिक क्षेत्र पर निश्चित रूप से जोर दिया जाना चाहिए।' इसमें कहा गया है, 'जिन चुनौतियों के समाधान की जरूरत है, उनमें कृषि क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र, कौशल विकास, कर्ज संबंधी मसले, डिजिटल भुगतान और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार शामिल हैं।' 
 
कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश करने को प्रस्तावित बजट में 2019 के आम चुनाव को देखते हुए कुछ लोकलुभावन कदमों की घोषणा की उम्मीद है क्योंकि हाल में 3 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में सत्तासीन भाजपा को तगड़ा झटका लगा है।  सरकार की ओर से किसानोंं के लिए बड़े देशव्यापी आय समर्थन योजना की घोषणा की जा सकती है, जिसमेंं मुफ्त फसल बीमा शामिल है। इसके अलावा कर ढांचे में बदलाव किया जा सकता है जिसते मध्य वर्ग के वेतनभोगी तबके को लाभ मिल सके। समिति ने पाया कि अर्थव्यवस्था का व्यापक परिदृश्य बेहतर है लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं, जो ढांचागत प्रकृति की हैं। समिति ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि का खाका बहुत बेहतर हनीं है, खासक र विकसित अर्थव्यवस्थाओं का, लेकिन उभरते बाजारों में वृद्धि की बेहतर संभावना है। 
Keyword: fiscal deficit, ICRA, GDP, राजकोषीय घाटा,
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