बिजनेस स्टैंडर्ड - राष्ट्रीय सूची से इतर दवाओं के भी मूल्य नियंत्रण का सुझाव
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राष्ट्रीय सूची से इतर दवाओं के भी मूल्य नियंत्रण का सुझाव

संजीव मुखर्जी और वीणा मणि / नई दिल्ली January 24, 2019

नीति आयोग की उच्च स्तरीय समिति आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) के बाहर की दवाओं को चिह्नित करेगी और अगर जरूरी हुआ तो उनके दाम पर नियंत्रण लगाने का सुझाव देगी। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए नीति आयोग के  सदस्य और दवाओं व स्वास्थ्य उत्पादों पर बनी समिति के चेयरमैन वीके पॉल ने कहा, 'हम बदलाव की सिफारिश करेंगे। यह इस पर निर्भर होगा कि आम लोगों के लिए क्या लाभदायक है। इससे एनएलईएम के संशोधन का इंतजार नहीं करना होगा।' इनमें कैंसर की दवाएं भी शामिल होंगी।
 
पॉल ने कहा कि नवगठित समिति का विचार है कि  कीमतें व्यवस्थित तरीके से तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) के अधिकार कम नहीं किए जाने चाहिए। समिति की घोषणा के कुछ दिन बाद ही उन्होंने कहा, 'हमारी सिफारिश यह होगी कि एनपीपीए को स्वतंत्र और मजबूत बनाया जाना चाहिए। हम एनपीपीए को लेकर एक समग्र सिफारिश करेंगे।' अब तक एनपीपीए औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) की अनुसूची 1  की दवाओं को लेता है और बहुत की कम मामले पैरा-19 से लेता है। अनुसूची-1 की दवाओं को एनएलईएम में रखा गया है, जबकि पैरा-19 असाधारण और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए है। स्टेंट पर कारोबारी मुनाफा तय करने के मामले में सरकार ने पैरा-19 का इस्तेमाल किया। 
 
सरकार का विचार है कि एनपीपीए संभवत: एनएलईएम के बाहर की दवाएं मूल्य नियंत्रण के लिए चिह्नित करने में सक्षम नहीं होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दवा कंपनियां कैंसर के टैबलेट में एमआरपी पर 1,450 रुपये प्रति टैबलेट मुनाफा लेती हैं।  पॉल के अलावा नीति आयोग की समिति में वित्त, स्वास्थ्य एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों के नौकरशाह शामिल हैं। पॉल के मुताबिक इसमें एनपीपीए व दवा विभाग (डीओपी) को शामिल नहीं किया गया है, जिससे हितों के टकराव से बचा जा सके। अगर जरूरत महसूस की गई तो समिति नागरिक समाज के लोगों व दवा संगठनों को भी शामिल करेगी। 
 
सरकार विभिन्न मेडिकल उपकरणों के कारोबारी मुनाफे को तार्किक बनाने पर भी विचार कर रही है। डीओपी मेडिकल उपकरणों को पर काम कर रहा है, जिन्हें नियंत्रण के  तहत लाया जा सकता है। कोरोनरी स्टेंट और ऑर्थोपैडिक घुटना प्रत्यारोपण को पहले ही मूल्य नियंत्रण में लाया जा चुका है। 
Keyword: pharma, medicine, niti aayog,,
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