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'जैतापुर परमाणु संयंत्र में बढ़ाई जाएगी स्थानीय भागीदारी'

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली January 24, 2019

ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ जैतापुर परमाणु बिजली संयंत्र में भारत की कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। कंपनी 6 रिएक्टरों में से अंतिम 2 रिएक्टर में स्थानीय हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक करने को इच्छुक है। कंपनी के मुताबिक यह भारत के आपूर्ति हिस्सेदार पर निर्भर होगा कि वह ईपीआर डिजाइन की जरूरतों को पूरी करने की सुविधाओं पर कितना निवेश करते हैं।  ई मेल के माध्यम से पूछे गए सवाल के जवाब में नए रिएक्टर लगाने के प्रभारी और कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वकीस रैमनी ने कहा कि वे जैतापुर संयंत्र की लागत घटाने की कवायद में हैं, जिससे बिजली की दर कम रहे। पिछले मार्च में सरकारी कंपनी के साथ समझौता करने के बाद कंपनी ने पिछले महीने एनपीसीआईएल को पेशकश दाखिल की है। 
 
समझौते के तहत ईडीएफ बिजली संयंत्रों के लिए 6 रिएक्टरों की आपूर्ति करेगी। रैमनी ने कहा, 'हमने एनपीसीआईएल को फ्रांस के नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र के 50 साल के अनुभव के आधार पर पेशकश की है। मार्च 2018 में हुए औद्योगिक फॉरवर्ड एग्रीमेंट के मुताबिक प्राथमिक रूप से ईडीएफ ईपीआर तनकीक की आपूर्तिकर्ता के रूप में काम करेगी। पेशकश में पूरी डिजाइन इंजीनियरिंग के चरण और उपकरणों की खरीद को भी शामिल किया गया है।'  उन्होंने कहा कि एनपीसीआईएल और भारत सरकार के साथ काम करने के साथ ईडीएफ परियोजना को विकसित करने के लिए धन की व्यवस्था भी कर रही है। समूह एनपीसीआईएल को निर्माण और संयंत्र चालू होने के चरण दोनों में ही सहायता कर रहा है। उन्होंने कहा, 'एनपीसीआईएल को दुनिया भर में हमारे 5 ईपीआर निर्माण परियोजनाओं के अनुभव का लाभ मिलेगा। परिचालन के दौरान हम लगातार सुरक्षा मानकों में सुधार करेंगे और इस महत्त्वपूर्ण संपत्ति की लंबे समय तक व्यावहारिकता बरकरार रखने की कवायद करेंगे।'
 
6 रिएक्टरों की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 10 गीगावॉट होगी और सालाना 75 टीडब्ल्यूएच से ज्यादा उत्पादन होगा और मौजूदा खपत की स्थिति देखें तो इससे 7 करोड़ परिवारों को बिजली मुहैया कराई जा सकेगी। रैमनी ने कहा कि यह परियोजना भारत की महत्त्वाकांक्षी ऊर्जा नीतियों के मुताबिक है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की अहम हिस्सेदारी है। परमाणु बिजली की स्थिरता से अक्षय ऊर्जा के विकास को समर्थन मिलता है, क्योंकि इससे प्राकृतिक रूप से उत्पादन में होने वाले उतार चढ़ाव की भरपाई की जा सकती है।
 
उन्होंने बिजली उत्पादन की वास्तविक लागत का ब्योरा नहीं दिया, लेकिन कहा कि यहां से उत्पादित बिजली दशकों तक प्रतिस्पर्धी रहेगी। उन्होंने कहा, 'एकही स्थल पर 6 ईपीआर इकाइयां स्थापित करने का अपना आर्थिक महत्त्व है। फ्रांस, ब्रिटेन और चीन में हमारे अनुभव से पता चलता है कि इससे लागत घटती है। इसमें निर्माण की लागत कम आएगी।' इस समय ईडीएफ की पेशकश की एनपीसीआईएल द्वारा समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान प्रमुख पहलुओं पर एनपीसीआईएल और ईडीएफ के बीच चर्चा जारी रहेगी, जिसमेंं तकनीकी और वित्तीय मसले शामिल हैं और हमें उम्मीद है कि इसके बाद समझौता हो जाएगा। 
 
ईडीएफ ने स्थानीय कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बनाई है और यह 6 में से अंतिम दो रिएक्टरों में बढ़कर 60 प्रतिशत तक हो सकती है। इस परियोजना में लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी), रिलायंस, ब्यूरो वेरिटास इंडिया, इजिल इंडिया के साथ कुछ अन्य कंपनियां हैं, जिन्हें ईडीएफ रणनीतिक साझेदार बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, 'एलऐंडटी को लंबा औद्योगिक अनुभव है। एनपीसीआईएल की आपूर्तिकर्ता के रूप में कंपनी की साझेदारी हमें आगे ले जाएगी। हमारी सहायक इकाई फार्माटोम एलऐंडटी के साथ विनिर्माण में साझेदारी कर भारत में परमाणु ऊर्जा के कुछ प्रमुख घटकों का विनिर्माण कर सकती है।' 
 
वहीं रिलायंस इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म का हिस्सा है, जो इन सभी 6 रिएक्टरों की नाभिकीय व्यवस्था के विस्तृत इंजीनियरिंग का काम कर सकती है। एसेस्टेम, इजिस इंडिया और बोउगस भी इस प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं। जुलाई 2018 में ईडीएफ के साथ रिलायंस और एसेस्टेम के साथ बोली पूर्व समझौता भी हुआ था। 
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