बिजनेस स्टैंडर्ड - द्वितीयक इस्पात उत्पादकों की होगी अहम भूमिका
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द्वितीयक इस्पात उत्पादकों की होगी अहम भूमिका

अदिति दिवेकर /  01 23, 2019

बीएस संवाददाता

भारत 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता बनाने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि इसमें घरेलू द्वितीयक इस्पात उत्पादकों की अहम भूमिका होगी। सिंह ने अदिति दिवेकर के साथ एक साक्षात्कार में स्क्रैप नीति और वैश्विक कंपनियों द्वारा नई परियोजनाएं स्थापित किए जाने के लिए भूमि की उपलब्धता के बारे में बातचीत की। बातचीत के अंश: 

मौजूदा इस्पात उत्पादकों के लिए 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना बहुत कठिन है। देश में अब तक वैश्विक कंपनियों की भागीदारी भी बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में आप पूरे उद्योग को किस तरह देखते हैं? 

बिजनेस स्टैंडर्ड द्वितीयक इस्पात उत्पादकों की होगी अहम भूमिकाउद्योग के 30 करोड़ टन का लक्ष्य हासिल करने की योजना के तीन हिस्से होंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने में द्वितीयक इस्पात विनिर्माताओं की अहम भूमिका होगी। इस समय कुल उद्योग में द्वितीयक इस्पात विनिर्माताओं की हिस्सेदारी 57 फीसदी है, जिसके अगले 3-4 वर्षों में 60 से 64 फीसदी पर पहुंचने की संभावना है। हम द्वितीयक इस्पात विनिर्माताओं को कच्चे माल के स्तर पर मदद देंगे। योजना का दूसरा हिस्सा वैश्विक कंपनियों को जोडऩा है। ये कंपनियां तकनीक हस्तांतरित करेंगी और यहां अपने संयंत्र स्थापित करेंगी। संयंत्र स्थापित करने के लिए जापान और पोस्को जैसी कंपनियां पहले ही पूछताछ कर रही हैं। योजना का तीसरा हिस्सा वे वर्तमान घरेलू इस्पात उत्पादक होंगे, जो पहले ही अपनी क्षमता में बढ़ोतरी की योजना बना चुके हैं। 

भूमि अधिग्रहण से संबंधित अड़चनों के कारण आज भी भारत में नए संयंत्र स्थापित करना बहुत मुश्किल है। आप यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि वैश्विक कंपनियां यहां नए संयंत्र स्थापित करेंगी? 

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 में कई संशोधनों की जरूरत है, लेकिन इस समय सार्वजनिक क्षेत्र की 5-6 कंपनियों के पास 85,000 एकड़ जमीन है, जिसमें से 20 फीसदी से अधिक जमीन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसलिए वैश्विक कंपनियों के पास हिस्सेदारी खरीदकर या पीएसयू के साथ साझेदारी के जरिये नए संयंत्र स्थापित करने की भरपूर गुंजाइश है। ऐसा बहुत तेजी से किया जा सकता है। 

सरकार ने 86 फीसदी इस्पात उत्पादों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित बना दिया है। इसके चलते कार विनिर्माताओं ने उत्पादन रोकने की धमकी दी है क्योंकि वे भी इन उत्पादों में से कुछ का आयात करते हैं। सरकार ने इस स्थिति से कैसे निपटने की योजना बनाई है? 

पहले ही 86 फीसदी उत्पादों में बीआईएस लागू कर दिया गया है। आगे हम सभी इस्पात उत्पादों को बीआईएस प्रमाणित बनाना चाहते हैं। बीआईएस प्रमाणन से वैश्विक बाजारों में इस्पात उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं। इन उत्पादों को निर्यात करना आसान बन जाता है क्योंकि उत्पाद का एक निश्चित मानक होता है। कुछ कार कंपनियां इस कदम का इसलिए विरोध कर रही हैं क्योंकि वे अपने देश से एफटीए (मुक्त व्यापार समझौते) के तहत कलपुर्जों का आयात कर रही थीं। इन मानकों के चलते वे एफटीए होने के बावजूद ऐसा नहीं कर पाएंगी। 

बैंकिंग प्रणाली के सबसे ज्यादा कर्ज इस्पात क्षेत्र में ही फंसे हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? हालांकि अब इन फंसे कर्जों के समाधान की प्रक्रिया चल रही है। एस्सार स्टील के लिए रुइया परिवार की बोली को लेकर आपकी क्या राय है? 

समाधान इस्पात उद्योग के लिए अच्छा रहा है। ऋणों का एनपीए बनना चिंताजनक है, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भूषण स्टील के मामले में बैंकों को केवल 37 फीसदी राशि ही छोडऩी पड़ी। एस्सार स्टील के लिए रुइया परिवार ने पूरी राशि की बोली लगाई थी। इन एनपीए का समाधान एक मील का पत्थर है। इस्पात एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें पूंजी की बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है। इसलिए एस्सार स्टील जैसी संपत्ति से कोई भी व्यक्ति आसानी से दूर नहीं होना चाहेगा। रुइया परिवार (एस्सार स्टील के प्रवर्तक) भी यह जानता है कि वे अगले 10 वर्षों में भी ऐसा संयंत्र स्थापित नहीं कर सकते। 

इस्पात मंत्रालय ने देश भर में पांच स्क्रैप इकाइयां स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसे करीब पांच साल हो गए हैं और अभी तक इस मोर्चे पर मुश्किल से ही कोई प्रगति हुई है। इस योजना के लागू नहीं होने की क्या वजह हैं? 

देश को कम से कम 50 से 70 रिसाइक्लिंग या स्क्रैप इकाइयों की जरूरत है। इस समय केवल एक इकाई है। यह महिंद्रा इंटरट्रेड और सरकारी धातु स्क्रैप कारोबारी कंपनी एमएसटीसी का संयुक्त उद्यम है। अब इस्पात मंत्रालय ने एक स्क्रैप नीति बनाई है, जो न केवल वाहन स्क्रैप बल्कि सभी तरह के स्क्रैप पर लागू होगी। हमने इस नीति को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष पेश करने की योजना बनाई है। 
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